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यहां शिक्षा विभाग ने लटकाई डेढ़ सौ स्कूलों की मान्यता, केवल 40 के मामलों का हुआ निस्तारण 

Thu, 18 Apr 2019 12:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 18 Apr 2019 12:34 PM IST
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uttarakhand education department hold 150 schools recolonization
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

देहरादून जिले के करीब डेढ़ सौ निजी स्कूल शिक्षा विभाग की मान्यता के बिना चल रहे हैं। इसके लिए केवल स्कूल नहीं बल्कि शिक्षा विभाग भी जिम्मेदार है। विभाग ने पिछले करीब दो वर्षों से इन स्कूलों की मान्यता के प्रकरणों को लटका रखा है। इस अवधि में केवल 40 स्कूलों के मामलों का ही निस्तारण हुआ है। 

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निजी विद्यालयों को शिक्षा विभाग से मान्यता के लिए कई दस्तावेज जमा कराने होते हैं। मान्यता के लिए पहले विद्यालय में ढांचागत सुविधाएं व अन्य संसाधन विकसित करने होते हैं। पहले जमीन की रजिस्ट्री, शौचालय, भवन व कक्षा कक्ष का निर्माण करना होता है। साथ ही छात्र संख्या के मुताबिक छात्र संख्या का ब्योरा देना होता है। इसके आधार पर विभाग स्कूलों को मान्यता देता है। 
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लेकिन पिछले दो वर्ष से ज्यादातर स्कूलों के मान्यता के प्रकरणों पर कोई फैसला नहीं हुआ है। पूर्व सीईओ एसबी जोशी के कार्यकाल के अंतिम दिनों में कुछ स्कूलों की मान्यता को मंजूरी मिली थी। वहीं मौजूदा सीईओ आशारानी पैन्यूली के कार्यकाल में भी कुछ स्कूलों को मान्यता मिली है, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है।
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ज्यादातर स्कूलों के मान्यता संबंधी आवेदन न तो आपत्ति लगाकर लौटाए गए हैं और न ही उन पर कोई कार्रवाई हुई है। जिन स्कूलों की मान्यता के प्रकरण शिक्षा विभाग में लटके हुए हैं, वह ज्यादातर पहली से आठवीं कक्षा के हैं। इस मामले में विभागीय पक्ष जानने के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी आशारानी पैन्यूली से फोन पर संपर्क किया गया था लेकिन उन्होंने छुट्टी के दिन बात करने से इनकार करने की बात कहते हुए फोन काट दिया। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।

रिन्यूवल के मामले भी लटके 
इसमें कई स्कूलों की मान्यता के रिन्यूवल के मामले भी शामिल हैं। पूर्व में जिन विद्यालयों को मान्यता मिल चुकी है, उन्हें भी आरटीई के तहत मान्यता का रिन्यूवल कराना होता है। विभाग कई विद्यालयों को औपबंधिक मान्यता भी प्रदान करता है। इसके तहत कुछ शर्तों के अधीन विद्यालयों को मान्यता दी जाती है। 
 
जानबूझकर लटकाई मान्यता 
सूत्रों के अनुसार कुछ विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर विद्यालयों की मान्यता की फाइलें लटकाई हुई हैं। जल्द और नियमों में शिथिलता बरतते हुए मान्यता देने के नाम पर लेन-देन के आरोप भी अधिकारियों पर लगते रहते हैं। एक निजी विद्यालय संचालक ने बताया कि वह पिछले काफी समय से विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें बार-बार जल्द मान्यता प्रक्रिया पूरी करने का आश्वासन देकर टरका दिया जाता है। 


...तो बंद हो जाएंगे सरकारी स्कूल 
निजी स्कूलों को मान्यता न देने का विभागीय अधिकारियों के पास भी अपना तर्क है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई स्कूलों को जानबूझकर मान्यता नहीं दी जा रही है। अगर सभी स्कूलों को मान्यता दे दी जाए, तो हर गली-मोहल्ले में स्कूल खुल जाएंगे। ऐसे में कई सरकारी स्कूलों को बंद करने की नौबत आ जाएगी। उनकी मानें तो कई निजी स्कूलों को केवल इसीलिए मान्यता नहीं दी जा रही है।

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