उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2019: कसौटी पर त्रिवेंद्र सरकार की साख, ये है चुनौती
- पांच साल पहले मिली करारी हार की भाजपा को आज भी कसक
- लोस चुनाव में पांचों सीटें जीतने के बाद बुरी तरह हारी थी पार्टी
- विस चुनाव 2016 से शुरू हुआ जीत का सिलसिला जारी रखना चुनौती
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चुनावों में लगातार जीत का पताका फहराती आ रही भाजपा और उसकी सरकार के लिए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एक बड़ी चुनौती है। इस चुनाव में एक बार फिर त्रिवेंद्र सरकार का कामकाज कसौटी पर होगा। सियासी जानकारों की मानें तो पंचायत चुनाव के नतीजे त्रिवेंद्र सरकार के ढाई साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी बताएंगे। उसके पास इस चुनाव में कांग्रेस से पुराना हिसाब चुकता करने का भी अवसर है। पांच साल पहले उसे पंचायत चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। उसकी कसक अब भी बरकरार है।
उस समय मिली हार इसलिए शर्मनाक थी कि पंचायत चुनाव से एक माह पहले हुए लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी पांचों सीटें जीती थी। लेकिन कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के सामने भाजपा को जिला पंचायत में तीस प्रतिशत सीटों पर जीत मिली। इसके तुरंत बाद हुए तीन विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में पार्टी बुरी तरह हारी। अब एक बार फिर पंचायत चुनाव का शंखनाद हो चुका है। बस इस बार बड़ा अंतर है कि अब प्रदेश में भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार है। देखना यह है कि सत्ता में आने के बाद त्रिवेंद्र सरकार के सभी चुनावों में प्रचंड जीत का सिलसिला आगे बढ़ता है या फिर थम जाता है।
वर्ष 2014 में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा ऊंचे मनोबल के साथ उतरी थी। प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटें जीतने के बाद तब वो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उतरी थी, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस के आगे भाजपा पूरी तरह पस्त हो गई। जिला पंचायत में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। 30 प्रतिशत सीटें ही पार्टी जीत पाई। कांग्रेस को नतीजों ने संजीवनी दी। डोईवाला, धारचूला और सोमेश्वर विधानसभाओं के उपचुनाव में भाजपा को एक बार फिर पटकनी दी। हार का यह सिलसिला वर्ष 2017 में टूटा, जब भाजपा ने 70 विधानसभाओं में से 57 पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया।
इसके बाद सत्ता में आई त्रिवेंद्र सरकार ने हर चुनाव को जीता। विधानसभा उपचुनाव से लेकर नगर निगम में पार्टी की जीत हुई। चार माह पहले एक बार फिर मोदी लहर ने पांचों लोकसभा सीटों पर बड़े अंतर से पार्टी को जीत दिलाई। हालांकि अमूमन पंचायत चुनाव में सत्ताधारी पार्टी की जीत होती रही है, लेकिन 12 जिला पंचायतों में कितनी पर भाजपा जीतती है, इस पर पार्टी प्रदर्शन का दारोमदार टिका है।
पांच साल पहले जैसा संयोग
पिछले पंचायत चुनाव के बाद तीन विधानसभाओं धारचूला, डोईवाला और सोमेश्वर में उपचुनाव हुआ था। इस बार भी पंचायत चुनाव के बाद एक विधानसभा पिथौरागढ़ में उपचुनाव होना है। यह उपचुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भाजपा का बढ़ता जीत का ग्राफ
वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में पांचों सीटों पर जीत
वर्ष 2014 में तीन विधानसभा उपचुनाव में भाजपा हारी
वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव में 57 सीट जीत कर प्रचंड बहुमत
वर्ष 2018 विधानसभा उपचुनाव थराली में जीत
वर्ष 2018 नगर निगम चुनाव में भाजपा का सात में से पांच निगमों पर कब्जा
पंचायत चुनाव के लिए पार्टी पूरी तरह तैयार है। केंद्र में मोदी सरकार और प्रदेश में त्रिवेंद्र सरकार की नीतियों को जनता पसंद कर रही है। चुनावी रणनीति के तहत वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा चुकी है। इस बार तय है कि पार्टी की चुनाव में बंपर जीत होगी है।
- अजय भट्ट, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
प्रदेश की जनता भाजपा सरकार से संतुष्ट नहीं है। जनता के बीच आक्रोश है, जिससे कांग्रेस को फायदा पहुंचेगा। पार्टी चुनावों के लिए रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है। नतीजे आने के बाद साफ हो जाएगा कि ग्राउंड पर भाजपा की क्या स्थिति है।
- प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष