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देवस्थानम बोर्ड की जल्द हो सकती है घोषणा, तीन-चार दिन में हो सकता है फैसला

Thu, 06 Feb 2020 05:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 06 Feb 2020 05:30 AM IST
सार

  • शासन ने प्रस्ताव बनाकर सीएम को भेजा, तीन-चार दिन में हो सकता है फैसला
  • बद्री केदार मंदिर समिति और चारधाम विकास परिषद का भविष्य बोर्ड गठन पर निर्भर 

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uttarakhand : Devasthanam board may be announced soon
त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

श्राइन बोर्ड की तर्ज पर चारो धामों के लिए देवस्थानम अधिनियम के तहत प्रदेश में जल्द ही गठित होने वाले बोर्ड की घोषणा हो सकती है। शासन ने बोर्ड गठन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेज दिया है। चारधाम विकास परिषद और बद्री केदार मंदिर समिति का भविष्य इस बोर्ड के गठन पर निर्भर है। 

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प्रदेश सरकार देवस्थानम अधिनियम दिसंबर माह में आयोजित सत्र में लेकर आई थी। अधिनियम की अधिसूचना जारी होने के बाद भी कई मामलों को लेकर संशय बना हुआ है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अधिनियम के लागू होने के बाद बद्री केदार मंदिर समिति की स्थिति क्या होगी।
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इसी तरह चारों धामों के मंदिरों की प्रबंधन व्यवस्था को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। चार धाम यात्रा अप्रैल माह से शुरू हो रही है। गंगोत्री के यमुनोत्री मंदिर माह के कपाट भी अप्रैल माह में ही खुल जाएंगे। इसके तुरंत बाद ही बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में चार धाम यात्रा की तैयारी के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। 

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बुधवार को शासन ने स्पष्ट किया कि देवस्थानम बोर्ड का गठन जल्द हो जाएगा। बोर्ड का गठन होते ही सीईओ तैनात किया जाएगा और बोर्ड की बैठक होगी। इस बैठक में ही बद्री केदार मंदिर समिति सहित अन्य मामलों में बोर्ड को फैसला लेने का अधिकार भी मिल जाएगा। 

बोर्ड के गठन का विधिवत प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री को भेज दिया गया है। उम्मीद है के तीन चार दिन में ही बोर्ड गठन को स्वीकृति मिल जाएगी। जहां तक  अन्य मामलों का सवाल है, वह अधिनियम के लागू होते ही साफ हो गए हैं। देवस्थानम अधिनियम अब अन्य सभी कानूनों पर लागू है। लिहाजा बद्री केदार मंदिर समिति भी अपनी तरफ से कोई वित्तीय या प्रशासनिक फैसला नहीं कर सकती।
- दिलीप जावलकर, सचिव पर्यटन

पुरोहितों का विरोध जारी, पीआइएल का इंतजार

देवस्थानम अधिनियम का विरोध जारी है। तीर्थ पुरोहित महापंचायत सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने के लिए अधिवक्ता और सुब्रमण्यम स्वामी से संपर्क साध ही चुकी है। स्वामी भी जनहित याचिका दायर करने पर सहमति दे चुके हैं। अब तीर्थ पुरोहितों को याचिका के दायर होने का इंतजार है। बोर्ड गठन से पहले ही याचिका दायर होती है और सुप्रीम कोर्ट याचिका को स्वीकार कर लेता है तो प्रदेश सरकार को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। 

बद्रीनाथ में बाजियों को मिलता है दस्तूर

तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव हरीश डिमरी के मुताबिक बद्रीनाथ मंदिर में बाजियों को दस्तूर मिलता है। इनके अधिकार परंपरा के तहत सुरक्षित हैं। देवस्थानम अधिनियम के नाम पर अधिकारों से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। हाल ही में विधि आयोग ने देवस्थानम अधिनियम के बाजियों के अधिकारों को स्पष्ट करने का संस्तुति भी की। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि इस प्रस्ताव पर बोर्ड गठन के बाद ही विचार किया जा सकता है।

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