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Uttarakhand Cyber Attack: 22 करोड़ का ठेका 27 करोड़ पर पहुंचा, फिर भी हमले से न बच पाए
Fri, 18 Oct 2024 06:24 PM IST
अलका त्यागी
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 18 Oct 2024 06:24 PM IST
सार
डाटा सेंटर का ठेका पहले ऑर्बिट, टीएनएस और रिगार्ड कंपनी के पास था। ये तीनों कंपनियां अलग-अलग तरह से सेवाएं देती थीं। यह तीन साल का ठेका करीब 22 करोड़ रुपये का था। पिछले साल जब नए टेंडर हुए तो आईटीडीए ने पूरा ठेका तीन के बजाए एक ही कंपनी ऑर्बिट को 27 करोड़ में दे दिया।
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- फोटो : ANI
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विस्तार
सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने डाटा सेंटर के रखरखाव और संचालन का 22 करोड़ का ठेका पिछले साल 27 करोड़ रुपये में दिया। इसके बाद भी साइबर हमले से न बच पाए। अब आईटीडीए ने सेवा दे रही ऑर्बिट कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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कंपनी की टीम के करीब 40 सदस्य पिछले 15 दिनों से आईटीडीए में बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। दरअसल, डाटा सेंटर का ठेका पहले ऑर्बिट, टीएनएस और रिगार्ड कंपनी के पास था। ये तीनों कंपनियां अलग-अलग तरह (मैनपावर, आईटी आदि) से सेवाएं देती थीं। यह तीन साल का ठेका करीब 22 करोड़ रुपये का था।
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पिछले साल जब नए टेंडर हुए तो आईटीडीए ने पूरा ठेका तीन के बजाए एक ही कंपनी ऑर्बिट को 27 करोड़ में दे दिया। कंपनी पिछले करीब एक साल से डाटा सेंटर के संचालन, रखरखाव, सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही है। बावजूद इसके माकोप रैनसमवेयर साइबर हमले से डाटा सेंटर बच नहीं पाया। मामले में आईटीडीए ने ऑर्बिट कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि साइबर हमले में सेवा दे रही कंपनी की भूमिका की जांच करके कार्रवाई की जाए।
कई शर्तें जोड़कर दिया गया था सर्विस लेवल टेंडर
आईटीडीए की निदेशक नितिका खंडेलवाल का कहना है कि पहले डाटा सेंटर का टेंडर तीन कंपनियों के पास था। कहीं कोई जरूरत होने पर एक-दूसरे के ऊपर रखती थीं। लिहाजा, तय किया गया कि सभी सेवाएं एक ही कंपनी से ली जाएंगी। इसके लिए ही ऑर्बिट कंपनी को ठेका दिया गया था। इसमें शर्त थी कि मैनपावर 18 के बजाए 34 करनी होगी। डाटा सेंटर संबंधी जो लाइसेंस एक्सपायर होंगे, उनका रिनिवल और मेंटिनेंस भी खुद ही करना होगा, जो काफी महंगा होता है। ये भी शर्त दी गई कि कंपनी को 24 घंटे और सात दिन सेवाएं देनी होंगी। इस वजह से ही टेंडर की कोस्ट में बढ़ोतरी हुई।