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उत्तराखंड : सांप्रदायिक होने के आरोपों से वसीम आहत, मनचाही टीम न देने का लगाया आरोप

Thu, 11 Feb 2021 12:31 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अभिषेक सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी
अभिषेक सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 11 Feb 2021 12:31 PM IST
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Uttarakhand cricket team Head coach Wasim Jaffer resigns, hurt by allegations of being communal
वसीम जाफर - फोटो : फाइल फोटो

उत्तराखंड क्रिकेट की सीनियर टीम के कोच पद से इस्तीफा देने से चर्चा में आए वसीम जाफर सांप्रदायिक होने के आरोपों से आहत हैं। उन्होंने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के सचिव महीम वर्मा के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने सीनियर सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन पर अपने पद की जिम्मेदारी के अनुरूप और टीम हित में काम न करने का भी आरोप लगाया। महीम वर्मा और रिजवान ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि जाफर ने अपरिपक्वता दिखाई है।       

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दो दिन पहले सीएयू को इस्तीफा भेजने वाले पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने बुधवार को वर्चुअल माध्यम से प्रेसवार्ता करते हुए उनपर सांप्रदायिक होने के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह सांप्रदायिक होते तो इतने साल के क्रिकेट कॅरिअर में भी उनपर आरोप लगने चाहिए थे। सभी को पता है कि उनका पूरा कॅरिअर बेदाग रहा है, लेकिन उत्तराखंड में उन पर लगे आरोपों ने उन्हें आहत किया है।
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जाफर ने कहा कि यहां के बच्चों में अच्छा टैलेंट है।

उन्हें यकीन था कि अपने अनुभव से वह उत्तराखंड क्रिकेट और युवाओं को ऊंचे मुकाम पर ले जाने पर सफ ल होंगे, लेकिन सचिव महीम वर्मा की ओर से स्वतंत्रता नहीं मिलने के कारण ऐसा हो नहीं पाया। बकौल जाफर ऐसी परिस्थितियों में उनका काम करना संभव नहीं था और उन्होंने त्यागपत्र देना उचित समझा। पत्रकार वार्ता के बाद फोन पर हुई बातचीत में सचिव के साथ अभद्रता भाषा के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये बात गलत है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि एक बार सचिव ने उनसे व्हाइट बॉल और रेड बॉल के लिए अलग टीम की बात कही तो उन्होंने कहा था कि आपने क्रिकेट नहीं खेला है, उन्होंने और रिजवान भाई ने खेला है तो वे बात कर लेंगे।
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‘रिजवान ने नहीं की मैच और टीम पर बात’

जाफर ने उत्तराखंड सीनियर टीम के चयनकर्ता रिजवान शमशाद पर आरोप लगाया कि उन्होंने आज तक मैच और टीम पर बात नहीं की। यहां तक कि कभी फोन भी नहीं उठाया।  कोच की जिम्मेदारी देते समय महीम ने उनसे कहा था कि सिर्फ  उनसे और रिजवान से बात करनी है। यही वजह है कि उन्होंने एसोसिएशन के किसी अन्य पदाधिकारी से कभी बात करने की कोशिश नहीं की। सबसे महंगे कोच होने के सवाल को नकारते हुए जाफर ने कहा कि सीएयू ने अब तक उन्हें तय वेतन का 20 प्रतिशत ही दिया है। उत्तराखंड के क्रिकेटर और यहां के भविष्य के बाबत पूछने पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों में काफी प्रतिभा है, पर किसी भी कोच को एसोसिएशन से सपोर्ट नहीं मिला तो उत्तराखंड की टीम को वह सफ लता मिलने में मुश्किलें आएंगी।


इस बारे में सीनियर सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन रिजवान शमशाद ने वसीम के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि जब चयन समिति के सदस्य मैच देखने गए थे तो कोच ने कभी उनसे बात नहीं की। जब उनसे वो बात नहीं कर रहा है तो मेरे से कैसे बात करता। वसीम को अगर कोई दिक्कत थी तो बात की जा सकती थी। इस तरह की बात सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए थी। चयन समिति सदस्य अजय तिवारी ने भी कहा कि वसीम से फोन न पर जब उन्होंने मैच के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि वह उनसे बात नहीं कर सकता।

 

उन्होंने वसीम पर आरोप लगाया कि 18 जनवरी को उत्तराखंड की टीम ने आखिरी मैच खेला पर अभी तक उन्होंने अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई की नियमावली के तहत नहीं सौंपी है। सचिव महीम वर्मा का कहना है कि वसीम बड़े खिलाड़ी हैं, इसमें कोई शक नहीं पर सचिव को इग्नोर करना और बात करने का गलत लहजा उन्हें पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट का कोई मजहब नहीं होता तो मैदान में धार्मिक गुरू का आना समझ से परे है।

 

....तो दिक्षांशु को वसीम बनाना चाहते थे कप्तान
वसीम जाफर ने कहा कि विजय हजारे के लिए वह दिक्षांशु को कप्तान बनाना चाहते थे पर उन्हें मना कर दिया गया। विजय हजारे के लिए उन्होंने 22 खिलाड़ियों की लिस्ट मेल की पर महीम और चयन समिति ने उस लिस्ट को तवज्जो नहीं दी। इस बारे में चयन समिति के सदस्य अजय तिवारी ने कहा कि पहली बात कोच टीम नहीं चुनता, यह काम चयनकर्ताओं का होता है। कोच सिर्फ  अपनी राय देता है, लेकिन वसीम अपनी मनमर्जी चलाना चाहते थे।

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