उत्तराखंड: महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर
- सुविधाओं का बकाया जमा नहीं करने के मामले में गुरुवार को हो सकती है सुनवाई
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हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सुविधाओं का बकाया जमा नहीं करने पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है।
इस मामले में हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट सुविधाओं के बकाया मामले में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंप्तूरी के खिलाफ जारी अवमानना के नोटिस पर रोक लगा चुकी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक बिजली, पानी का करीब 11 लाख रुपये बकाया जमा कर चुके हैं।
मामले के अनुसार, पूर्व में रूरल लिटिगेशन एंड एन्टाइटलमेंट केंद्र (रूलक) ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास और अन्य सुविधाओं का बकाया छह माह के भीतर जमा करने के निर्देश दिए थे। पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर रूलक ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी।
अनुछेद 361 के तहत नोटिस भेजा था
कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा था कि क्यों न इनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। रुलक संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को संवैधानिक पद पर होने की वजह से संविधान के अनुछेद 361 के तहत नोटिस भेजा था।
इसके तहत राज्यपाल व राष्ट्रपति के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने से दो माह पहले सूचना देनी होती है। नोटिस को 60 दिन 10 अक्तूबर को पूरे हो गए हैं। इसके बाद रूलक ने पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी पर आवास और अन्य सुविधाओं का बाजार दर से 47 लाख 57 हजार, 758 रुपये बकाया है। इसके अतिरिक्त बिजली-पानी का बकाया भी है।