देहरादूनः कांग्रेस से संभल नहीं पा रही विधायकों की नाराजगी, संयुक्त बैठक का इरादा भी फ्लॉप
- प्रीतम सिंह विधायकों के संपर्क में, नेता प्रतिपक्ष फिलहाल वेट एंड वाच की भूमिका में
- राजभवन गए कांग्रेस प्रतिमंडल में शामिल नहीं हुए पांच विधायक
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कांग्रेस विधायकों की नाराजगी का मामला कांग्रेस से संभाले नहीं संभल रहा है। राजभवन में गए प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के पांच विधायकों के शामिल न होने को भी इसी नाराजगी का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने हालांकि विधायकों की नाराजगी को दूर करने के लिए आगे आने का इरादा जताया है, लेकिन विधानमंडल दल के स्तर पर अभी कोई पहल नहीं हुई है। माना जा रहा है कि इंदिरा हृदयेश फिलहाल चुप रहकर इंतजार करने का मन बनाए हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत की उपेक्षा से नाराज कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा सत्र के दौरान सभी विधायकों की संयुक्त बैठक कर मामले को सुलझाना तय किया था। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का धारचूला विधायक हरीश धामी के खिलाफ बयान सोशल मीडिया पर तैर गया।
इससे हरीश धामी सहित अन्य विधायक नाराज हो गए। इनकी नाराजगी मंगलवार को मीडिया के सामने खुलकर आ गई। इसी के चलते सभी विधायकों की संयुक्त बैठक का मसला भी अधर में लटक गया। बुधवार को राज्यपाल से मिलने के दौरान कांग्रेस के सामने विधायकों की बैठक का एक मौका था, लेकिन पांच विधायकों के न आने के कारण यह बैठक नहीं हो पाई।
बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने पहल करने का इरादा जाहिर किया है। यह पहल किस तरह की होगी और इसमें नेता प्रतिपक्ष का प्रीतम को कितना साथ मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। उधर, नेता प्रतिपक्ष इस मामले में कोई कदम उठाने के मूड में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इंदिरा विधायकों की नाराजगी को परख रही हैं और उनका इरादा वेट एंड वाच का है। इंदिरा इस मामले में सीधे कुछ कहने को तैयार भी नहीं हैं। उधर, प्रीतम सिंह कह रहे हैं कि विधायकों में कोई गुटबाजी नहीं है।
राजभवन से की प्रदेश और केंद्र सरकार की शिकायत
महंगाई, भ्रष्टाचार समेत अन्य कई मुद्दों को लेकर बुधवार को कांग्रेस विधायक दल ने बुधवार को राज्यपाल बेबी रानी मोर्य से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की। राज्यपाल से मिले प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतर रही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। करीब आधे घंटे की मुलाकात में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से विभिन्न मुद्दाें पर बात की और नौ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल से भ्रष्टाचार की रोकथाम से लेकर अन्य मुद्दों पर सीधी बात की। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में जल्द ही लोकपाल के गठन की मांग की, जिस पर राजभवन ने भी सहमति जताई। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि पार्टी और विधायक दल की ओर से भी इस मांग को उठाया जाएगा।
ये मुद्दे उठाए कांग्रेस ने
महंगाई - भाजपा सरकार ने सौ दिन में महंगाई कम करने का वादा किया था। हर क्षेत्र में अब महंगाई बढ़ रही है।
किसान - किसानों का कर्ज माफ करने और गन्ना किसानों का बकाया मूल्य अदा करने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ। प्रदेश में 13 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
बेरोजगारी - भर्ती रोजगार वर्ष की घोषणा के बाद भी प्रदेश में कोई भर्ती नहीं हो रही है। बेरोजगारी बढ़ रही है।
जिला विकास प्राधिकरण - जिला विकास प्राधिकरण का फैसला वापस लिया जाना चाहिए। प्राधिकरणों के गठन से लोग खासे नाराज हैं।
कानून व्यवस्था - प्रदेश में कानून व्यवस्था की हालत लगातार खराब हो रही है।
टीएचडीसी- जिस बांध के लिए लोगों ने अपनी भूमि दी, उसी बांध को एनटीपीसी को देकर बांध की पहचान खत्म की जा रही है।
भू अध्यादेश - पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश के नाम पर भू अध्यादेश में परिवर्तन किया गया है।
एनसीसी अकादमी- देवप्रयाग में स्थापित होने वाली अकादमी को पौड़ी शिफ्ट कर स्थानीय लोगों से अन्याय किया गया।
11 में से छह विधायक शामिल थे प्रतिनिधिमंडल में
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और चकराता विधायक प्रीतम सिंह, विधायक दल के उपनेता करन माहरा, विधायक फुरकान अहमद, विधायक आदेश चौहान, विधायक ममता राकेश, पूर्व विधायक राजकुमार और अनसुइया प्रसाद मैखुरी, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, गरिमा दसौनी आदि नेता प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।