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उत्तराखंड: 21 हजार उपनलकर्मियों की फरियाद, सुप्रीम कोर्ट से केस वापस ले सरकार

Sun, 09 Aug 2020 10:38 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 09 Aug 2020 10:38 PM IST
सार

  • उपनलकर्मियों के पक्ष में आए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है सरकार

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Uttarakhand: Complaint of 21 thousand upnl workers, government withdraws case from Supreme Court
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

राज्य व केंद्र के संस्थानों में कार्यरत करीब 21 हजार उपनल कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से फरियाद की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस ले ले। प्रदेश सरकार उपनल कर्मियों के पक्ष में आए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई है।

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हाईकोर्ट ने सरकार को उपनलकर्मियों के मामले में समान कार्य का समान वेतन देने का आदेश दिया था। साथ ही उन्हें पक्का करने को लेकर नियमावली बनाने को भी कहा था, लेकिन प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। 
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उपनल कर्मचारी महासंघ सरकार से मांग कर रहा है कि वह हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को वापस ले ले। इस संबंध में महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल अपर मुख्य सचिव कार्मिक से मुलाकात कर चुका है और अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी अनुरोध करने की तैयारी में है।
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अब तक 500 उपनलकर्मियों को हटाया
उपनल कर्मचारी महासंघ का कहना है कि 2018-19 में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मामला न्यायालय में विचारधीन है। इस हिसाब से विभागों को यथास्थिति बनानी चाहिए। लेकिन कोर्ट का आदेश आने के बाद से अब तक 500 उपनल कर्मचारियों को हटाया जा चुका है। यह सिलसिला जारी है।

राज्य में क्यों ही समान वेतन
महासंघ का कहना है कि उपनल के जो कर्मचारी केंद्र सरकार के संस्थानों में कार्यरत हैं, उन्हें समान कार्य का समान वेतन दिया जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार के विभागों व संस्थानों में तैनात उपनलकर्मियों को न्यूनतम वेतन मिल रहा है। इससे उनका परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

अब न इधर के रहे न उधर के
21 हजार उपनल कर्मचारियों में से आठ हजार कर्मचारी 10 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं। 16 हजार कर्मचारी पांच से 10 साल की सेवा पूरी चुके हैं। इनमें से अधिकांश कर्मचारी ऐसे हैं कि यदि उन्हें नौकरी से हटा दिया गया तो वे कहीं के नहीं रहेंगे। 

न्यायालय में डाली अर्जी
महासंघ की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में यह अर्जी डाली गई है कि जब तक न्यायालय में वाद चल रहा है, तब तक किसी भी उपनल कर्मचारी को नौकरी से न हटाया जाए।

प्रदेश में 21 हजार उपनल कर्मचारी हैं। इनके अलावा हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारी भी हैं। समय समय पर अदालतों से कर्मचारियों को समान कार्य का समान वेतन देने के आदेश हो चुके हैं। लेकिन सरकार आदेश लागू करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में चली गई। सरकार से अनुरोध है कि वह हमारे भविष्य के बारे में गंभीरता विचार करे और हजारों युवाओं के हित में सुप्रीम कोर्ट दायर केस वापस ले।
- दीपक चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड उपनल कर्मचारी महासंघ

ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों में 3500 उपनल कर्मचारी हैं। इनमें से अधिकांश 10 से 15 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं। कोर्ट से समान कार्य का समान वेतन देने के आदेश पारित हो चुके हैं। प्रबंधन से विनम्र अनुरोध है कि वह उपनल कर्मचारियों को चरणबद्ध ढंग से नियमित करने या समान कार्य का समान वेतन देने पर विचार करे।
- विनोद कवि, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ

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