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छात्रों की सभी समस्याओं पर सरकार गंभीर, श्रीनगर से शिफ्ट नहीं होगा एनआईटी: त्रिवेंद्र सिंह रावत

Thu, 15 Nov 2018 09:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 15 Nov 2018 09:01 AM IST
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uttarakhand cm said Nit srinagar garhwal will not shift
trivendra singh rawat

एनआईटी श्रीनगर के लिए जल्द ही स्थायी कैंपस बन जाएगा। इसके लिए राज्य में स्थानीय निकाय की चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद उत्तराखंड सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी।

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साथ ही छात्रों की अन्य समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी रास्ता तलाशा जा रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस संबंध में आज केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर से फोन पर बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआईटी श्रीनगर से शिफ्ट नहीं होगा।
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 एनआईटी श्रीनगर के स्थायी कैंपस के लिए सुमाड़ी के पास ही करीब 122 एकड़ जमीन तलाश ली गई है। चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद सरकार इस जमीन का हस्तांतरण एनआईटी के नाम करने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी।

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जावड़ेकर से सीएम ने की बात, बलूनी की मुलाकात

पत्र में उल्लेख है कि संस्थान 20 नवंबर तक अस्थाई कैंपस में शिफ्ट हो जाएगा।  सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए इस पत्र के बाद सियासी हलकों में एनआईटी के श्रीनगर गढ़वाल से शिफ्ट किए जाने की अटकलों ने जोर पकड़ा।

इससे असहज सरकार भी हरकत में आई। अपर मुख्य सचिव (तकनीकी शिक्षा) ओम प्रकाश ने कहा कि संस्थान किसी भी सूरत में श्रीनगर से शिफ्ट नहीं होगा। कैंपस की भूमि को लेकर उठे सवाल पर उन्होंने कहा कि संस्थान को इस बारे में रिपोर्ट देनी है। रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। 

एनआईटी के मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से टेलीफोन पर बात की। बाद में सीएम ने साफ किया कि श्रीनगर गढ़वाल से एनआईटी शिफ्ट नहीं होगा। वहां स्थायी कैंपस बनाया जाएगा और छात्रों के हास्टल की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

एनआईटी के रजिस्ट्रार पर गिर सकती है गाज

स्थायी कैंपस बनने तक श्रीनगर में ही प्रशासनिक भवन और संकाय भवन तक पहुंचने के लिए अलग से मार्ग बनाया जाएगा। इससे छात्रों को राष्ट्रीय राजमार्ग से नहीं गुजरना पड़ेगा। सांसद अनिल बलूनी ने भी केंद्रीय मंत्री ने मुलाकात करके एनआईटी को श्रीनगर गढ़वाल से शिफ्ट न करने की मांग की।  

एनआईटी को लेकर चल रहे विवाद में रजिस्ट्रार की भूमिका को लेकर प्रदेश सरकार बेहद नाराज है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने दूरभाष पर वार्ता के दौरान इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में रजिस्ट्रार पर कार्रवाई हो सकती है।


एनआईटी को लेकर की जा रही राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। संस्थान किसी भी स्थिति में श्रीनगर से शिफ्ट नहीं होगा। इस संबंध में मेरी केंद्रीय मंत्री से बातचीत हो गई है।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

एनआईटी शिफ्टिंग की तैयारी पर बवाल 

एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड शिफ्टिंग पर मचा बवाल थम नहीं रहा है। शिफ्टिंग के विरोध में जहां कांग्रेस ने एनआईटी प्रशासनिक भवन गेट के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। वहीं, छात्र संगठन आर्यन ने बिड़ला परिसर गेट के समक्ष सरकार का पुतला फूंककर विरोध-प्रदर्शन किया।  

छात्रों के आंदोलन के दबाव में एनआईटी की कमेटी की ओर से ऋषिकेश में विकल्प के रुप में जगह देखी गई है। इसका खुलासा होने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क गया है। बुधवार को कांग्रेस नगर कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र पुंडीर की अध्यक्षता में कांग्रेसजनों ने पूर्वाह्न 11 से अपराह्न 3 बजे तक एनआईटी प्रशासनिक भवन के गेट  के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। इस अवसर पर कहा गया कि केंद्र व राज्य सरकार की ढिलाई से एनआईटी पहाड़ से मैदान को पलायन कर रही है। यदि शीघ्र पहाड़ में एनआईटी का निर्माण नहीं किया गया, तो अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।  

कांग्रेसजनों ने एनआईटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार संस्थान के कुछ अधिकारियों के इशारे पर किया गया है। यदि ऐसा नहीं होता, तो आज तक संस्थान उनके खिलाफ कार्रवाई कर देता। धरने में कांग्रेस के प्रांतीय प्रवक्ता प्रदीप तिवाड़ी, जिला महामंत्री गणपति भट्ट, महेंद्र असवाल, प्रदीप सिंह, राजेश जुगरान, मीना रावत, अंजू भट्ट, रेखा अग्रवाल, पूनम, कुसुम, मनोरमा विजय रावल, वीरेंद्र नेगी और रघुवीर आदि बैठे। संचालन परवेज अहमद ने किया।  

वहीं, आर्यन संगठन ने बिड़ला परिसर गेट के आगे सरकार का पुतला फूंकते हुए सरकार पर पहाड़ की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही से एनआईटी जैसा प्रशिक्षण संस्थान को पहाड़ से खिसकाने की तैयारी चल रही है।  

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