{"_id":"cc160843b2e0fe5a86bbfa493119b0d6","slug":"uttarakhand-cm-harish-rawat-one-year-on-health-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"CM साहब, एक साल में और बदतर हो गया इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CM साहब, एक साल में और बदतर हो गया इलाज
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 02 Feb 2015 11:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लोगों से सस्ते और सुलभ इलाज का वादा किया था। स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की शुरुआत उन्होंने दून अस्पताल से की थी।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने पिछले एक साल में चार बार अस्पताल का निरीक्षण भी किया, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बदतर हो गए। अस्पताल की सेहत तो नहीं सुधरी, इलाज जरूर महंगा हो गया। मुख्यमंत्री के वादों की हकीकत जानने अमर उजाला टीम रविवार को अस्पताल पहुंची तो हालात चिंताजनक मिले।
विज्ञापन
ओपीडी के बाहर सीवर की गंदगी
सीएम ने पहले ही निरीक्षण में अस्पताल परिसर के साथ वार्ड और शौचालयों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अस्पताल में आज भी गंदगी का अंबार लगा है।
विज्ञापन
बच्चों की ओपीडी कक्ष संख्या एक के बाहर सीवर का पानी जमा रहता है। यहां कुछ पल खड़ा होना भी मुश्किल है। गंदगी से संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। मरीजों और तीमारदारों को स्वच्छ पेयजल तक उपलब्ध नहीं है। वाटर कूलर और पानी की टंकियों की जर्जर स्थिति और उनके आसपास फैली गंदगी को देखकर लोग पानी पीने से कतराते हैं।
तेज नहीं हुआ काम
मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद दून अस्पताल में मेडिकल कालेज के लिए चल रहे निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ पाई है। निर्माण सामग्री कब मरीजों के ऊपर गिर जाए, कहा नहीं जा सकता।
आपातकालीन कक्ष में तो हालत बेहद खराब है। यहां पर आने वाले मरीजों का जैसे तैसे इलाज किया जाता है। मेडिकल कालेज के निर्माण में देरी का नतीजा है कि इसमें नए सत्र से मेडिकल की पढ़ाई नहीं हो पाएगी।
हाईटेक एंबुलेंस का इंतजार
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधायक राजकुमार की मांग पर नवंबर 2014 में दून अस्पताल को वेंटीलेटर जैसी सुविधाओं से युक्त दो हाईटेक एंबुलेंस देने की घोषणा की थी। लेकिन यह एंबुलेंस अब तक अस्पताल नहीं पहुंच पाईं।
24 घंटे नहीं चल रही पैथोलोजी
तीन जनवरी 2015 को सुबह साढ़े आठ बजे पैथोलोजी कक्ष में ताला देख मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अस्पताल प्रशासन को कड़ी नाराजगी जताई थी। मुख्यमंत्री ने पैथोलोजी विभाग को 24 घंटे खोलने का निर्देश प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल को दिया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ।
दवाओं की कमी से मरीज परेशान
दून अस्पताल में अक्सर दवाओं की कमी बनी रहती है। कुछ दिन पहले ही कैल्शियम टैबलेट और मधुमेह की दवाएं खत्म हो गई थीं। कई दिन तक मरीजों को बाजार से महंगे दामों पर दवाएं लेनी पड़ीं। शहर में स्वाइन फ्लू का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन अस्पताल में इसकी दवा नहीं है।
वहीं, ओपीडी में दवा के दुकानदार और दवा कंपनियों के प्रतिनिधि खुलेआम घूमते हैं। अस्पताल में सस्ती दवा होने के बावजूद कमीशन के चक्कर में डाक्टर बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं और मरीजों को जांच के लिए निजी पैथोलोजी लैब भेजा जा रहा है।
न्यूरो वार्ड का नहीं हुआ विस्तार
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने निरीक्षण के दौरान देखा था कि न्यूरो वार्ड में जगह कम होने से मरीजों को खड़े होने में भी मुसीबत होती है। मुख्यमंत्री ने वार्ड का विस्तार करने के निर्देश अस्पताल प्रशासन को दिए थे। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने मुख्यमंत्री के आदेश पर अमल करना भी मुनासिब नहीं समझा।
बजट की कमी से मरीजों की मुसीबत
अधिकारियों की हीलाहवाली से अस्पताल में अक्सर बजट की कमी बनी रहती है। उधारी बढ़ने पर कभी दवाओं की स्थानीय खरीद (एलपी) बंद हो जाती है तो कभी मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने वाले कैंटीन ठेकेदार आंख दिखाते हैं।
कई बार विभिन्न जांचों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की आपूर्ति बंद हो जाती है। बिजली का बकाया नहीं देने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी ऊर्जा निगम से मिलती रहती है। इसका सीधा नुकसान मरीजों को झेलना पड़ता है।
...और इलाज हो गया महंगा
दून अस्पताल में सुविधाएं भले ही न बढ़ी हों, लेकिन इलाज जरूर महंगा हो गया है। जबकि, मुख्यमंत्री ने सस्ते इलाज का वादा किया था। इस साल पहली बार ऐसा हुआ कि एक हफ्ते के भीतर दून अस्पताल में विभिन्न जांचों और इलाज की दरें दो बार बढ़ा दी गईं।
एक जनवरी 2015 को सरकार ने पंजीकरण और विभिन्न जांचों पर दस फीसदी शुल्क बढ़ाया था। छह जनवरी को दोबारा इस शुल्क में बढ़ोतरी की गई। मरीज को भर्ती करने से लेकर, सीटी स्कैन, डायलिसिस, ईसीजी, ईको, ईईजी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन और खून, बलगम समेत विभिन्न जांचों में करीब 25 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी की गई।