चीफ जस्टिस रमेश रंगानाथन बोले, देवभूमि में नशामुक्ति के लिए जागरुकता सबसे बड़ा हथियार
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नैनीताल उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस रमेश रंगानाथन ने कहा कि देवभूमि को नशा मुक्त करने के लिए जागरुकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्प्रभाव बताकर युवाओं को इससे दूर रखा जाए और जो पीड़ित हैं उनके पुनर्वास व इलाज के लिए बड़े कदम उठाए जाएं।
चीफ जस्टिस शनिवार को उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संकल्प नशामुक्त देवभूमि कार्यक्रम में बोल रहे थे। ओएनजीसी सभागार में शनिवार को प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस अभियान के बारे में जानकारी दी।
बताया कि यह अभियान नशा पीड़ितों को विधिक सहायता, नशा उन्मूलन और नशा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए चलाया जाएगा। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित चीफ जस्टिस ने संकल्प नशा मुक्त देवभूमि अभियान से संबंधित प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया।
साथ ही पम्पलैट्स भी जारी किए। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जिन विभागोें और जिम्मेदार लोगों को जोड़ा गया है उन्हें पूर्ण सहयोग देना होगा। इस अभियान में समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायतीराज विभाग, गृह विभाग एवं वित्त विभागों को सहभागी बनाया गया है।
इसके तहत विशेष इकाईयों का गठन किया गया है। यह अभियान 20 कार्य दिवसों तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, कार्यपालक अध्यक्ष उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. जीके शर्मा आदि उपस्थित रहे।