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चमोली त्रासदी :19वें दिन नहीं मिला कोई शव, जारी रहा सुरंग से मलबा हटाने का काम, एसएफटी के पास पहुंची टीम

Thu, 25 Feb 2021 11:11 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ(चमोली)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ(चमोली) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 25 Feb 2021 11:11 PM IST
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Uttarakhand Chamoli News: Debris Removed up to 180 meters in 18 days from tunnel, water leakage Continue
चमोली में आपदा - फोटो : अमर उजाला
आपदा के 19वें दिन भी रैणी और तपोवन क्षेत्र में मलबा हटाने और लोगों की खोज का अभियान जारी रहा।  बैराज  साइट और टनल से मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनें लगी रही। बृहस्पतिवार को भी यहां कोई शव नहीं मिला है। टनल के पीछे से लगातार मलबा और पानी आ रहा है, जिससे काम करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक आपदा में मारे गए 70 लोगों के शव और 30 मानव अंग बरामद हो चुके हैं। इनमें 40 की पहचान हुई है। जिनकी शिनाख्त नहीं हुई है, उनके डीएनए सैंपल  सुरक्षित  रखे जा रहे हैं। 
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उधर, एनटीपीसी के महाप्रबंधक आरपी अहिरवार का कहना है कि हम सुरंग में एसएफटी के समीप तक पहुंच चुके हैं। यहां भारी मात्रा में मलबा और पानी आने से भारी दिक्कतें आ रही हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखकर हम आगे बढ़ रहे हैं। बैराज साइट में भी धौली नदी में भारी भरकम पत्थर को तोड़ने के लिए ब्लास्ट किया जा रहा है, जिससे पानी का प्रभाव बैराज की तरफ न हो। तीन दिनों से अभी तक कोई भी शव नहीं मिला है।
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अब तक सुरंग में हुई 180 मीटर तक की खोदाई

चमोली में तपोवन सुरंग में बुधवार रात 11:10 बजे से 2:30 बजे तक खोदाई का काम चला। सुरंग से पानी निकाला जा रहा है और 180 मीटर तक की खोदाई अब तक हो चुकी है।
 
वहीं आईटीबीपी और एसडीआरएफ के जवान मिलकर चमोली में बाढ़ के बाद बनी झील से पेड़ों और बोल्डर को हटा रहे हैं। पानी की निकासी सुचारू रूप से हो रही है।
 

रैणी में बैली ब्रिज का गार्डर जोड़ने का काम शुरू

चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी हाईवे पर बना पुल ऋषिगंगा की आपदा में बह गया था, जिससे करीब 12 गांवों के साथ ही सीमा पर तैनात सेना और आईटीबीपी के जवानों की आवाजाही बाधित हो गई थी। आवाजाही सुचारु करने के लिए बीआरओ ने यहां पर बैली ब्रिज बनाने का काम शुरू कर दिया था। अब यहां पर गार्डर जोड़ने का काम शुरू हो गया है, जिसके बाद पुल जल्द तैयार हो जाएगा। आपदा के कुछ दिन बाद ही बीआरओ ने यहां पर बैली ब्रिज बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन दोनों तरफ की सपोर्ट दीवार बनाने में समय लग गया। अब बीआरओ ने यहां पर गार्डर जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि फरवरी महीने में ही पुल बनकर तैयार हो जाएगा। 

जुग्जू गांव के लिए ट्रॉली लगाने की मांग
ऋषिगंगा की आपदा में रैणी से जुग्जू को जोड़ने वाला झूला पुल बह गया था। अभी तक ग्रामीणों की आवाजाही के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से झूला पुल बनने तक यहां पर वैकल्पिक तौर पर ट्रॉली लगाने की मांग की।

ग्रामीणों ने कहा कि तीन किमी पैदल चलकर गांव तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जुग्जू में ट्रॉली की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिससे ग्रामीण लाता होकर पहुंच रहे हैं। यह मार्ग काफी खतरनाक है। लोग जोखिम लेकर आना-जाना कर रहे हैं। यदि गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसे अस्पताल ले जाने में बड़ी समस्या हो जाएगी। 

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