चमोली त्रासदी :19वें दिन नहीं मिला कोई शव, जारी रहा सुरंग से मलबा हटाने का काम, एसएफटी के पास पहुंची टीम
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उधर, एनटीपीसी के महाप्रबंधक आरपी अहिरवार का कहना है कि हम सुरंग में एसएफटी के समीप तक पहुंच चुके हैं। यहां भारी मात्रा में मलबा और पानी आने से भारी दिक्कतें आ रही हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखकर हम आगे बढ़ रहे हैं। बैराज साइट में भी धौली नदी में भारी भरकम पत्थर को तोड़ने के लिए ब्लास्ट किया जा रहा है, जिससे पानी का प्रभाव बैराज की तरफ न हो। तीन दिनों से अभी तक कोई भी शव नहीं मिला है।
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अब तक सुरंग में हुई 180 मीटर तक की खोदाई
चमोली में तपोवन सुरंग में बुधवार रात 11:10 बजे से 2:30 बजे तक खोदाई का काम चला। सुरंग से पानी निकाला जा रहा है और 180 मीटर तक की खोदाई अब तक हो चुकी है।
#WATCH Uttarakhand: Excavation work carried out from 11:10 pm to 2:30 am last night at Tapovan tunnel in Chamoli. Water being pumped out of the tunnel & excavation up to 180 meters is complete as of now.
— ANI (@ANI) February 25, 2021
Operations going on here from 7th Feb after a flash flood hit Chamoli. pic.twitter.com/Pgpi1OUGMr
वहीं आईटीबीपी और एसडीआरएफ के जवान मिलकर चमोली में बाढ़ के बाद बनी झील से पेड़ों और बोल्डर को हटा रहे हैं। पानी की निकासी सुचारू रूप से हो रही है।
#WATCH Uttarakhand: ITBP jawans, along with SDRF, removes stump of trees and boulders from the artificial lake created after Chamoli flash flood. The water is getting discharged smoothly as of now.
— ANI (@ANI) February 25, 2021
(Source: Indo-Tibetan Border Police) pic.twitter.com/CqEp6VZv4e
रैणी में बैली ब्रिज का गार्डर जोड़ने का काम शुरू
चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी हाईवे पर बना पुल ऋषिगंगा की आपदा में बह गया था, जिससे करीब 12 गांवों के साथ ही सीमा पर तैनात सेना और आईटीबीपी के जवानों की आवाजाही बाधित हो गई थी। आवाजाही सुचारु करने के लिए बीआरओ ने यहां पर बैली ब्रिज बनाने का काम शुरू कर दिया था। अब यहां पर गार्डर जोड़ने का काम शुरू हो गया है, जिसके बाद पुल जल्द तैयार हो जाएगा। आपदा के कुछ दिन बाद ही बीआरओ ने यहां पर बैली ब्रिज बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन दोनों तरफ की सपोर्ट दीवार बनाने में समय लग गया। अब बीआरओ ने यहां पर गार्डर जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि फरवरी महीने में ही पुल बनकर तैयार हो जाएगा।
जुग्जू गांव के लिए ट्रॉली लगाने की मांग
ऋषिगंगा की आपदा में रैणी से जुग्जू को जोड़ने वाला झूला पुल बह गया था। अभी तक ग्रामीणों की आवाजाही के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से झूला पुल बनने तक यहां पर वैकल्पिक तौर पर ट्रॉली लगाने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि तीन किमी पैदल चलकर गांव तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जुग्जू में ट्रॉली की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिससे ग्रामीण लाता होकर पहुंच रहे हैं। यह मार्ग काफी खतरनाक है। लोग जोखिम लेकर आना-जाना कर रहे हैं। यदि गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसे अस्पताल ले जाने में बड़ी समस्या हो जाएगी।