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चमोली आपदाः घराट को दुत्कार, टरबाइन से दुलार, स्थानीय तकनीक और परंपरा को भी नहीं पर्याप्त तवज्जो
Thu, 11 Feb 2021 04:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 11 Feb 2021 04:12 PM IST
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डा. अनिल जोशी, संस्थापक निदेशक हैस्को एवं पर्यावरणविद
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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नदी और पहाड़ी गाड़-गदेरों से सीधा ताल्लुक रखने वाले घराट दम तोड़ रहे हैं और कई तरह का विरोध झेलने वाली बांधों की टरबाइन को घुमाने की पुरजोर कोशिश होती रही है। प्रदेश में घराट स्थानीय परंपरा और जरूरत के प्रतीक भी हैं। कभी गांवों की आर्थिकी और रोजगार का प्रमुख साधन घराट अब दम तोड़ रहे हैं। इनसे बिजली बना सकने की तकनीक सामने आई तो भी इनका पुनर्जीवन नहीं हो पा रहा है। घराट नदी से थोड़ा पानी लेते हैं और सारा पानी वापस नदी को दे देते हैं।
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इसके उलट, शहरों की बढ़ती जरूरत, शहर के हिसाब से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की चाहत में बांधों की टरबाइन को घुमाने के लिए जमीन आसमान एक की जा रही है। राज्य गठन के बाद से अब तक उरेडा करीब 1400 घराटों को ही अपग्रेड कर पाया है। दूसरी ओर, बांधों के मामले में हालात यह हैं कि सर्वोच्च न्यायालय को प्रदेश में 24 बांधों के निर्माण पर रोक लगानी पड़ी। कैग ने भी भागीरथी पर एक साथ 75 से अधिक बांधों के निर्माण पर चिंता जताई और पूछा कि इनके पर्यावरण पर संयुक्त प्रभाव का अध्ययन क्यों नहीं किया गया।
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अधिकतर बांध निजी क्षेत्र में
एक अध्ययन के मुताबिक प्रदेश में करीब 86 जल विद्युत परियोजनाएं हैं। इनमें से 11 ही सरकारी क्षेत्र की हैं। बाकी सब निजी क्षेत्र की हैं। करीब 25000 मेगावाट की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इसमें वे लोहारी नागपाला समेत वे 24 परियोजनाएं भी शामिल हैं जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण रोक लिया गया था।
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यह साफ हो चुका है कि पहाड़ के विकास के लिए पहाड़ोन्मुख तकनीक का उपयोग होना चाहिए। आखिर कब तक पहाड़ की बिजली से लेकर पानी तक का उपयोग शहरों का चकाचौंध करने के लिए किया जाता रहेगा। जहां तक घराट का सवाल है, हैस्को पूरा रोडमैप सरकार के सामने रख चुका है।
- डा. अनिल जोशी, संस्थापक निदेशक हैस्को एवं पर्यावरणविद
पांच किलोवाट तक की बिजली पैदा कर सकते हैं घराट
एक घराट से पांच किलोवाट तक की बिजली बनाई जा सकती है और करीब 500 मीटर के दायरे में इससे 15-20 परिवारों के घर रोशन किए जा सकते हैं। केदानाथ संरक्षति क्षेत्र में गोंदार गांव को घराटों की बदौलत ही बिजली मिल रही है। नदी क्षेत्र में जाने की बजाय घराटों को छोटी नदियों के किनारे लगाया जा सकता है।
सबसे अधिक घराट चमोली में
प्रदेश में सबसे अधिक घराट आपदा प्रभावित जिले चमोली में ही हैं। यहां इनकी संख्या 298 से अधिक है। उरेडा के एक अध्ययन के मुताबिक प्रदेश में इस समय 15 हजार से अधिक घराट हैं। इनमें से 1341 को ही अपग्रेड किया जा सका है। मौसम बदलाव के कारण सूख रही जलधाराओं के कारण भी घराट प्रभावित हुए हैं। हैस्को के संस्थापक निदेशक अनिल जोशी के मुताबिक प्रदेश में कभी दो लाख से अधिक घराट थे।
केंद्र सरकार दे चुकी है घराटों को लघु उद्योगों का दर्जा
केंद्र सरकार ने हाल ही में घराटों को लघु उद्योगों का दर्जा दिया। इससे अब घराटों को अपग्रेड करने में लोन मिलना भी आसान हुआ है। राज्य सरकार की ओर से घराट के लिए 60 हजार रुपये दिए जाते हैं और बिजली की व्यवस्था के लिए 35 हजार अलग से दिए जाते हैं।