चैरिटेबल संस्थाओं को लेकर त्रिवेंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानिए कैबिनेट बैठक की अहम बातें...
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बजट के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने चैरिटेबल संस्थाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने चैरिटेबल संस्थाओं के लिए पीएचसी और सीएचसी के संचालन के रास्ते खोल दिए हैं।
बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। सीएमओ की अध्यक्षता वाली कमेटी की देख रेख में चैरिटेबल संस्थाएं पीएचसी और सीएचसी का संचालन कर पाएंगी।
स्टाफ उनका होगा लेकिन इलाज की दरें सरकारी ही रहेंगी। कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण एक और निर्णय में धार्मिक संस्थाओं और अखाड़ों का हाउस टैक्स माफ करने पर सहमति की मुहर लग गई है।
बजट पेश करने से पूर्व बृहस्पतिवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक विधान भवन में हुई। पहाड़ की पीएचसी और सीएचसी में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सरकार ने इन्हें गोद लेने के लिए चैरिटेबल संस्थाओं को विकल्प उपलब्ध करा दिया है।
हंस फाउंडेशन समेत कुछ एक संस्थाएं पूर्व में पीएचसी और सीएचसी को गोद लेने की इच्छा सरकार के सामने प्रकट कर चुकी है। कैबिनेट में इस मामले में एक मंत्री की इस रूप में आपत्ति सामने आई कि राजनीतिक उद्देश्य वाली संस्थाओं को इस मामले में दूर रखा जाना चाहिए।
एक अन्य निर्णय में धार्मिक ट्रस्ट, अखाडे़ या फिर वे जगह जहां पर संत रहते हैं, वहां हाउस टैक्स नहीं लिया जाएगा। कुछ मामलों में व्यवसायिक की जगह घरेलू दर लागू करने की बात पर सहमति बनी है।
चिट फंड कंपनियों पर कसा शिकंजा
चिट फंड कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए कैबिनेट ने डीएम और एसपी की भूमिका को उनकी मॉनीटरिंग से जोड़ दिया है। अब किसी भी चिट फंड कंपनी को अपना काम शुरू करने से पहले डीएम और एसपी को रिपोर्ट करनी होगी। इसके अलावा, उन्हें हर तीन महीने में डीएम और एसपी को रिपोर्ट करनी होगी।
ये भी हुए निर्णय
-प्रतिपूर्ति बगैर सीएम विवेकाधीन कोष से जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण और नवनिर्माण के लिए धनराशि जारी की जा सकेगी।
-गोवंश संरक्षण नियमावली में आंशिक संशोधन
-सिंचाई और सहकारिता विभाग की नियमावली में आंशिक संशोधन।