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उत्तराखंडः अलग पर्यावरण मंत्रालय के गठन के साथ मंत्रिमंडल में लगी इन फैसलों पर मुहर...

Wed, 14 Aug 2019 02:24 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 14 Aug 2019 02:24 PM IST
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uttarakhand cabinet meeting at cm house 10 main decision

प्रदेश सरकार ने शासन स्तर पर पर्यावरण मंत्रालय गठित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने पर्यावरण निदेशालय गठित करने के प्रस्ताव को व्यापक रूप देते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित दो अन्य इकाइयां नव गठित विभाग के अधीन लाने का निर्णय लिया है। वन विभाग से स्वतंत्र यह विभाग पर्यावरण से संबंधित सभी मसलों का निस्तारण करेगा। नए विभाग के अस्तित्व में आने से विकास योजनाओं में पर्यावरण क्लेयरेंस के मामले जल्द निस्तारित हो सकेंगे। 

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मंत्रिमंडल की बैठक में 21 प्रस्ताव आए, जिनमें से 19 को मंजूरी दी गई है। शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि कैबिनेट ने कई अहम फैसले लिये है, जिसमें शासन स्तर नया पर्यावरण मंत्रालय बनाने का फैसला अहम है। इसके तहत चार संस्थान रहेंगे, जिसमें नए निदेशालय का गठन होगा। निदेशालय का निदेशक अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी होगा। इसके अलावा प्रांतीय सेवा का एक संयुक्त निदेशक और विशेषज्ञ विज्ञानक के इलाका 14 अन्य पद रहेंगे। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन आने वाला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बायोडायवर्सिटी बोर्ड और स्टेट इन्वायरमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट अथारिटी तथा स्टेट इन्वायरमेंट एसेसमेंट कमेटी भी नये विभाग का हिस्सा होंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन संबंधी कार्य, पर्यावरण संबंधी प्रकरणों में राज्य सरकार को परामर्श देना, स्टेट क्लाइमेट चैंज एक्शन प्लान का क्रियान्वयन, पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील एको सिस्टम का चिन्हिकरण करने जैसे कार्य रहेंगे। 

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ईको सेंसटिव जोन में बड़ी राहत

प्रदेश के 13 राष्ट्रीय पार्कों व वन्य जीव विहारों के चारों ओर 10 किलोमीटर की परिधि में ईको फ्रैजाइल जोन अधिसूचित किये गए हैं। मंत्रिमंडल ने गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और नंधौर वन्य जीव अभ्यारण के प्रस्तावित ईको सेंसटिव जोन के संशोधन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को उपलब्ध करवाने का निर्णय है, जिसमें स्थानीय वासियों को व्यापक राहत दी गई है। गंगोत्री पार्क इको सेंसटिव जोन में बसे कई कस्बे और गांव संशोधन प्रस्ताव पारित के बाद बाहर हो जाएंगे।

गांवों को राहत देने के साथ 10 किलोमीटर की परिधि में 28 प्रकार की गतिविधियों संचालित हो सकेंगी। जिसमें मुख्यत: खनन, पेड़ों का कटान, आरा मशीन की स्थापना, नए उद्योगों की स्थापना, होटल और रिजार्ट निर्माण, भूमि के उपयोग में परिवर्तन, जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण जैसे बड़ी बाधाएं दूर होंगे। हालांकि केंद्र से अधिसूचित होने के बाद ही संशोधन प्रस्ताव मान्य होगा। नंधौर वन्य जीव अभ्यारण में 10 किलोमीटर की परिधि में पांच गांव में से तीन डांडा, कठौती मल्ली और बेतलाड़ को इको सेंसटिव जोन से बाहर कर दिया है, जबकि दो कठौल और बकरियाल यथावत रहेंगे। 

खांडसारी एवं पावर क्रशर इंडस्ट्री को बड़ी राहत

मंत्रिमंडल ने प्रदेश में शुगर मिलों के गन्ना पेराई में किसानों को बकाया भुगतान समय पर नहीं करने से अब खांडसारी और पावर क्रशर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। वर्ष 2019-20 के गन्ना पेराई सत्र में खांडसारी इकाइयों और पावर क्रशर सेक्टर के लिए विशेष प्रावधान रहेगा। जिससे अब चीनी मिल के 6 किलोमीटर की परिधि के बाहर खांडसारी इकाई को लाइसेंस दिया जा सकेगा। चीनी मिल के सुरक्षित क्षेत्र से भिन्न क्षेत्र में भी नया खांडसारी लाइसेंस दिए जाने पर प्रतिबंध हटा दिया गया है।

विलंब शुल्क के साथ पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण होगा। इससे बंद खांडसारी इकाईयां पुनर्जीवित होंगी। प्रदेश की ऐसी इकाईयां जिन्हें उत्तराखंड बनने के बाद लाइसेंस जारी किया गया है। जिसने कभी पूर्व में कार्य किया हो और गन्ना क्रय कर उसका भुगतान किया हो, लेकिन ऐसी इकाईयों पर कोई बकाया न हो ऐसी खांडसारी इकाईयों का विलंब शुल्क के साथ लाइसेंस नवीनीकरण किया जा सकेगा।

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प्रमुख फैसले...

- एनडीए और सीडीएस में चयनित अभ्यर्थियों की भांति आफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, इंडियन एयर फोर्स एवं इंडियन नेवल एकेडमी में चयनित अभ्यर्थियों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। - न्याय विभाग की उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिक वर्गीय अधिष्ठान में किया आंशिक संशोधन।
- उत्तरप्रदेश अधीनस्थ सिविल न्यायालय अधिष्ठान में नाम परिवर्तित करते हुए उत्तराखंड और नैनीताल को किया संशोधित। उत्तरप्रदेश की जगह उत्तराखंड और इलाहाबाद की जगह नैनीताल किया गया है।
- न्यायिक सेवा नियमावली में आंशिक संशोधन किया गया है।
- उत्तराखंड वन क्षेत्राधिकारी सेवा नियमावली 2019 के धारा 8 में संशोधन। 
- मोटरयान नियमावली में संशोधन। वीआईपी नंबर 001 और 786 की न्यूनतम बोली दस हजार से एक लाख रुपये की।  परिवहन कर अधिकारी द्वितीय की वर्दी में किया आंशिक परिवर्तन।
- उत्तराखंड स्टेट सीड एंड आर्गेनिक प्रोडक्शन सर्टिफिकेशन एजेंसी के ढांचे को मंजूरी, 171 पद किये गए स्वीकृत।

- उच्च शिक्षा में आंशिक संशोधन, सर्टिफिकेट कोर्स इन लिपिक में सी लीव ओर बि लीव और एम लीव को किया मान्य।
- उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली में संशोधन। पहले लिखित एग्जाम फिर होगी शारीरिक दक्षता की जांच।
-  उत्तराखंड लेखा परीक्षा राजपत्रिका सेवा नियमावली लायी गई।
- विश्व बैंक से पोषित योजना के तहत अर्द्धनगरीय क्षेत्र में किये जाने वाले पेयजल कार्यों के लिए पेयजल नियमावली को मिली मंजूरी। 35 कस्बों को मिलेगा लाभ। 
- गन्ना विभाग के तीन कनिष्ठ अभियांता को आरईएस भेजने के बाद अब नियमावली लाई गई। 
- हिलट्रोन बंद होने के बाद तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में शामिल उसके 79 कर्मचारियों की पदोन्नति और अन्य लाभ के लिए नियमावली मंजूर की गई। 
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