Uttarakhand: 30 साल के लिए लीज पर दी जाएगी सितारगंज चीनी मिल, प्रति वर्ष सरकार को पांच करोड़ देगी कंपनी
पूर्व में कई सालों तक घाटे में चलने के कारण सितारगंज चीनी मिल को बंद करना पड़ा था। गन्ना किसानों के हित में सरकार ने मिल को दोबारा शुरू किया था। अब पीपीपी मोड पर मिल को संचालित करने वाले कंपनी प्रति वर्ष पांच करोड़ रुपये सरकार को देगी। मिल कर्मचारियों का दूसरी सहकारी चीनी मिल में समायोजन किया जाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऊधमसिंह नगर जिले की सरकारी चीनी मिल सितारगंज को पब्लिक प्राइवेट पाटर्नशिप (पीपीपी) मोड पर संचालित करने के लिए सरकार ने 30 साल के लिए लीज पर देने का निर्णय लिया है। पेराई सत्र समाप्त होने के बाद मिल को कंपनी को सौंपा जाएगा।
सितारगंज चीनी मिल को चलाने के लिए सरकार हर साल 35 से 40 करोड़ रुपये खर्च रही है। पूर्व में कई सालों तक घाटे में चलने के कारण मिल को बंद करना पड़ा था। गन्ना किसानों के हित में सरकार ने मिल को दोबारा शुरू किया था। अब पीपीपी मोड पर मिल को संचालित करने वाले कंपनी प्रति वर्ष पांच करोड़ रुपये सरकार को देगी। मिल कर्मचारियों का दूसरी सहकारी चीनी मिल में समायोजन किया जाएगा।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand Cabinet Decision: तहसीलदार को प्रमोशन का मौका, डीएम को वीआईपी ड्यूटी से मुक्ति
सितारगंज में 50 करोड़ से बनेगा एकीकृत एक्वा पार्क
प्रदेश में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज में 50 करोड़ की लागत से एकीकृत एक्वा पार्क विकसित किया जाएगा। इसके लिए राजस्व विभाग की 41 एकड़ जमीन मत्स्य विभाग को साैंपी जाएगी।
एक्वा पार्क में मत्स्य बीज उत्पादन के साथ ही मार्केटिंग, मछली पालन के लिए आधुनिक तकनीक की जानकारी, एक्वेरियम समेत अन्य तमाम सुविधाएं होगी। इस पार्क को बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 90 प्रतिशत धनराशि दी जाएगी।