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अब जबरन धर्म परिवर्तन कराने वालों की खैर नहीं, जानिए त्रिवेंद्र कैबिनेट के अहम फैसले

Tue, 13 Mar 2018 07:26 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 13 Mar 2018 07:26 AM IST
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uttarakhand cabinet big decision for proselytism
trivendra singh rawat

राज्य में किसी प्रकार के प्रलोभन, छलावे या दबाव में अब धर्म परिवर्तन कराने को लेकर त्रिवेंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब ऐसा करने वाले सीधे जेल जाएंगे।

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राज्य सरकार ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2018 को बनाए जाने की तैयारी कर ली है। सोमवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। बैठक में होम स्टे योजना को लागू करने के साथ ही नई आबकारी नीति का प्रस्ताव भी पास किया गया।
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इसके अतिरिक्त राज्य में गाय-भैसों की नस्ल को बेहतर करने के मकसद से गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशु प्रजनन अधिनियम-18 के मसौदे को भी मंजूरी दी गई। इसके साथ ही गैरसैंण सत्र में अभिभाषण और बजट के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया।
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अन्य राज्यों को तरह ही राज्य में धर्म परिवर्तन के मामलों को गंभीरता से लेते हुए एक्ट बनाने की तैयारी है। इस संबंध में एक प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में पेश किया गया। इसका उद्देश्य छद्म संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा प्रलोभन, दबाव या अन्य कारणों से धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकना है।

प्रस्तावित एक्ट के तहत राज्य में संबंधित व्यक्ति की मर्जी के बगैर कराए गए धर्म परिवर्तन को लेकर पीड़ितपक्ष अदालत में आरोपी पक्ष पर मुकदमा करेगा। एक्ट की धारा तीन एवं चार में प्रावधान किया गया है कि दोष साबित होने पर एक साल से पांच साल तक की सजा और जुर्माना होगा।

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trivendra singh rawat

यही कृत्य यदि किसी एससी-एसटी परिवार के साथ किया गया है तो सजा दो साल से सात साल तक होगी। यही नहीं यदि छलावे या दबाव के चलते विवाह कराकर धर्म परिवर्तन हुआ है तो ऐसी दशा में विवाह शून्य घोषित हो जाएगा।

यदि किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करना है तो प्रस्तावित एक्ट के तहत वह धर्म परिवर्तन की तिथि से एक माह पूर्व संबंधित जिलाधिकारी को आवेदन करेगा। इसमें वह एक शपथ पत्र भी देगा कि वह किसी दबाव, प्रलोभन आदि के कारण धर्म परिवर्तन नहीं कर रहा है।

जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ही वह धर्म परिवर्तन कर सकेगा। वहीं ऐसी संस्थाएं जो धर्म परिवर्तन को लेकर सामूहिक आयोजन करती हैं, उन्हें भी एक माह पूर्व जिलाधिकारी से अनुमति लेकर ही आयोजन करेगा।

इसका उल्लंघन करने पर तीन माह से एक साल तक कारावास का प्रावधान किया गया है। वहीं एससी-एसटी के मामलों में यह सजा दोगुनी होगी। साथ ही धर्म परिवर्तन भी अवैध साबित हो जाएगा। प्रस्तावित एक्ट में धर्म परिवर्तन गैर जमानती होने के साथ ही संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा।

 कैबिनेट ने होम स्टे योजना को भी लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत वर्ष 2020 तक पांच हजार आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें शर्त यह है कि खान-पान की व्यवस्था घर में ही होगी। साथ ही इसमें एक से लेकर छह कमरे होंगे।

तीन साल तक होने वाली आय पर दिए जाने वाले जीएसटी की भरपाई सरकार करेगी। साथ ही बिजली, पानी और हाउस टैक्स का भुगतान व्यावसायिक के बजाए घरेलू दरों पर करना होगा। इसके निर्माण में सरकार खर्च होने वाली राशि पर दस लाख तक कैपिटल सब्सिडी भी देगी। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां पर्यटकों को भेजने का काम भी सरकार ही करेगी। एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को मंजूरी भी दे दी है। इसके तहत शराब के ठेकों की ऑनलाइन नीलामी होगी।

प्रमुख फैसले

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प्रमुख फैसले
- प्रलोबन, छलावे या दबाव में धर्म परिवर्तन कराने वालों पर कार्रवाई के लिए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक-18 को बनाए जाने पर सहमति।
- होम स्टे योजना को भी लागू करने का फैसला। योजना के तहत वर्ष 2020 तक पांच हजार आवास बनाए जाएंगे। निर्माण में भी मदद करेगी सरकार।
- नई आबकारी नीति को मंजूरी। अब शराब के ठेकों की ऑनलाइन नीलामी होगी। साथ ही एक व्यक्ति चार ठेकों के समूह को भी ले सकेगा।
- उत्तराखंड अधीनस्त सेवा चयन आयोग में सदस्य का एक पद कम किया गया। अब अध्यक्ष के अलावा सिर्फ एक सदस्य ही आयोग में रहेगा।

- फाइनेंशियल हैंडबुक के तहत विभागाध्यक्षों, कार्यालय अध्यक्षों केे वित्तीय अधिकारों में बढ़ोत्तरी। अब छोटी-छोटी बातों पर फाइल शासन नहीं आएगी।
- उपनल के ढांचे में रखे गए लोगों के अलावा ब्रिडकुल के 11 स्थायी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ देने का फैसला।
- उत्तराखंड अधीनस्थ अभियंता सिंचाई सेवा नियमावली, उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग व्यक्तिक सहायक सेवा नियमावली को मंजूरी मिली।
- भूमि अर्जन अमीन, भूमि अध्याप्ति निरीक्षक सेवा नियमावली व उत्तराखंड भू-सर्वेक्षण तथा अभिलेख प्रक्रियाओं के कर्मियों की सेवानियमावली मंजूर।

- उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्र अधिनियम-12 की धारा-8 के तहत आपत्तियां करने के लिए समय सीमा छह माह से बढ़ाकर डेढ़ साल की गई।
- मध्यान भोजन बनाने वाली संस्था अक्षय पात्र को देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल में लीज पर भूमि देने के लिए डीएम अधिकृत।
- नैनीताल के बवार डोबा गोनियारो गांव में बीएसएनएल को टावर बनाने व अन्य कार्यों के लिए लगभग तीन सौ वर्ग मीटर भूमि निशुल्क आवंटित।
 

प्रमुख फैसले

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demo

- उत्तराखंड महाधिवक्ता कार्यालय अधिष्ठान सेवा नियमावली में सीधी भर्ती के लिए आवेदन तक रोजगार कार्यालय में पंजीकरण अनिवार्य किया।
- उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का वेतन 80 हजार प्रतिमाह से बढ़ाकर सवा दो लाख किया गया। सदस्यों के वेतन भी बढ़ाए गए।
- उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाष एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की वर्ष 2005 में समाप्त हो चुकी धारा 68(ए) के तहत चल रहे मामले होंगे समाप्त।
- उत्तराखंड राष्ट्रीय विधि विद्यालय अधिनियम की धाराओं में संशोधन करते हुए इसकी स्थापना का अधिकार अब राज्य सरकार के पास रहेगा।

- दून विश्वविद्यालय अधिनियम-2005 के तहत कुल सचिव, सहायक कुल सचिव आदि की नियुक्ति में भी होगा राज्य सरकार का पूरा दखल।
- उत्तराखंड गैर अनुदानित निजी शिक्षण संस्थाओं की फीस कमेटी के अध्यक्ष पद के लिए आयु सीमा को 62 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष किया गया।
- एक अक्टूबर 2005 से पूर्व नियुक्त अंशकालिक, तदर्थ, संविदा आदि अस्थायी कर्मचारियों को पेंशन नहीं। एक्ट लाने पर कैबिनेट का फैसला।
- इनवेस्टर समिट के लिए सीआईआई को पार्टनर बनाने पर फैसला। पचास लाख मैनेजमेंट फीस और 35 लाख राउंड टेबल कांफ्रेंस की फीस देंगे।
- पछुआदून स्थित एयरफोर्स-नेवल हाउसिंग बोर्ड के 70 मकानों की बिक्री आर्मी के जवानों की विधवाओं और अर्धसैनिक बलों को ही बेचे जाएंगे।


- गाय और भैसों की प्रजातियों को बेहतर करने के मकसद से गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशु प्रजनन अधिनियम-2018 बनाने पर बनी  सहमति।
- अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के संचालन का जिम्मा आईएलएफएस कंपनी को दिया जाएगा। कंपनी को 2.8 एकड़ भूमि भी होगी आवंटित।
- पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग, इनवायरमेंटल साइंस, सोशल स्टडीज आदि के कोर्स संचालित किए जाने की भी मंजूरी।
- पैरा मेडिकल में एडमिशन के लिए इंट्रेंस टेस्ट देना होगा। इसी आधार पर मेरिट बनेगी और उसी आधार पर दाखिले करने पर कैबिनेट की सहमति।
- कक्षा एक से बारह तक के बच्चों को एनसीईआरटी की किताबों का पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से दिए जाने संबंधी प्रस्ताव पर लगी मुहर।
- राइट ऑफ वे नीति बनाने पर कैबिनेट की सहमति। इस नीति के तहत आवासीय क्षेत्रों में भी मोबाइल टॉवर लगाने को मिलेगी अनुमति।

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