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बजट काउंटडाउन: उत्तराखंड की सेहत और किसानों की चिंता करे सरकार

Sun, 01 Mar 2020 01:30 PM IST
अलका त्यागी सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 01 Mar 2020 01:30 PM IST
सार

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रति व्यक्ति सरकार का खर्च मात्र 1534 रुपये, हिमाचल में 2016

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Uttarakhand budget 2020 Session: Challengers for Government for Development
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

नए निवेश और रोजगार बढ़ाने के दावे के बीच प्रदेश सरकार को उत्तराखंड के आम आदमी की सेहत की भी चिंता करनी होगी। तमाम दावों के बाद भी प्रदेश में स्वास्थ्य का बजट हिमाचल से कम है और लोगों को अपनी जेब से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। यही हाल, अन्नदाता और स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों का भी है।

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विभागों के बजट में पिछले दो सालों में इजाफा ही होता आया है। इतना होने पर भी यह इजाफा नाकाफी साबित हो रहा है। सरकार के स्तर से जारी अलग-अलग रिपोर्ट बता रही हैं कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो अस्पतालों में डाक्टर भी कम हैं।
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विभागों का अधिक बजट नई योजनाओं को बनाने और उन्हें लागू करने में कम, वेतन आदि में ज्यादा खर्च हो रहा है। इससे इतर अन्नदाता को भी अधिक बजट की दरकार है। प्रदेश में सबसे कमजोर कृषि क्षेत्र ही साबित हो रहा है। कौशल विकास की तमाम योजनाओं के लिए सरकार का बजट 500 करोड़ से अधिक नहीं बढ़ पा रहा है। 

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ये हैं चुनौतियां 

कृषि : प्रदेश सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा पिछले दो बजट में लगातार की। इसके लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के सहयोग से योजना भी तैयार की जा चुकी है। प्रदेश की जीडीपी में कृषि का योगदान अभी तक करीब 10 प्रतिशत ही है। यह तब है जबकि प्रदेश में करीब 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। पर्वतीय जिलों में 85 प्रतिशत से अधिक खेती असिंचित है। जैविक खेती से संबंधित योजनाओं का अभी प्रभाव दिखना बाकी है। 

स्वास्थ्य : प्रदेश सरकार इस समय स्वास्थ्य पर जीडीपी का करीब तीन प्रतिशत खर्च कर रही है। पहले यह खर्च 0.9 प्रतिशत था। इतना होने पर अन्य राज्यों की तुलना में यह खर्च कम है। प्रदेश में एक करोड़ से अधिक की जनसंख्या पर मात्र 55 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जबकि इनकी संख्या 104 होनी चाहिए थी। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र 254 हैं जबकि इनकी संख्या मानकों के हिसाब से 417 होनी चाहिए। प्रदेश में 6528 की जनसंख्या पर केवल एक सरकारी डाक्टर तैनात है।

शिक्षा : आर्थिक सर्वे के मुताबिक प्रदेश में पर्वतीय जिलों में नियमित पांच हजार से अधिक पद खाली हैं। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में केवल 55 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में खेल के मैदान हैं। 78 प्रतिशत स्कूलों में ही प्राथमिक स्वास्थ्य जांच हो रही है। माध्यमिक स्तर के 31 प्रतिशत स्कूलों में ही खेल के मैदान और 40 प्रतिशत में पुस्तकालय हैं। हिमाचल से तुलना करने पर यह कमी और अधिक नजर आती है। हिमाचल में 85 प्रतिशत स्कूलों में खेल के मैदान, 95 में पुस्तकालय मौजूद हैं।

बिजली : जल विद्युत परियोजनाओं, सौर ऊर्जा, पिरुल से बिजली आदि के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश सरकार को 52 प्रतिशत बिजली खरीदनी पड़ रही है। प्रदेश में बिजली की कुल मांग करीब 1600 मेगावाट प्रतिदिन है। सौर ऊर्जा में 4077 मेगावाट की क्षमता है। अभी तक प्रदेश में मात्र 257 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।  
 

विभागों का बजट 

वर्ष    कृषि    स्वास्थ्य    विद्यालयी शिक्षा    कौशल विकास    ग्राम्य विकास    पेयजल    शहरी विकास         
2019-20    1341.34    2545.40    7642    394.54    3141.34    997.44    1425.64
2018-19    966.68    2286.57    6741    354    2293    862    773
(स्रोत- बजट प्रदेश सरकार, धनराशि करोड़ रुपये में) 

प्रति व्यक्ति खर्च
राज्य    स्वास्थ्य पर खर्च    सरकारी खर्च    निजी खर्च

उत्तराखंड    4233    1534    2545
हिमाचल    4547    2016    2274
(स्रोत- आर्थिक सर्वे, आंकड़े रुपये में हैं। )
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