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पांच महीने पहले भी चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क पर पुल टूटने से धौली गंगा में समा गया था पोकलैंड ले जा रहा ट्राला

Mon, 22 Jun 2020 08:59 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 22 Jun 2020 08:59 PM IST
सार

  • 20 जनवरी को कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर हुई थी ऐसी ही घटना 

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Uttarakhand: Bridge broken on Munsiyari-Milam road, Same incidence Done before five months on kailash mansarovar Road
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

सामरिक महत्व की निर्माणाधीन मुनस्यारी-मिलम सड़क पर पोकलैंड मशीन से लदे ट्राला को कमजोर पुल से गुजारने का प्रयास किया गया। इसके चलते चीन सीमा को जोड़ने वाला पुल चंद सेकेंडों में धराशायी हो गया। महज पांच माह पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर हुए हादसे के बाद भी नहीं सबक नहीं लिया गया। 

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मुनस्यारी-मिलम मार्ग पर निर्माण कार्य के लिए पोकलैंड मशीनों को सड़क कटिंग वाली जगहों पर ले जाया जा रहा है। सीमा के लिए बन रही इस सड़क में सैनरगाड़ में बना यह पुल कुछ समय पहले क्षतिग्रस्त हो गया था।
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कमजोर होने से इस पुल पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित करने की चेतावनी लिखी है। इस चेतावनी को नजरंदाज कर ट्राला चालक ने आगे बढ़ने की कोशिश की और पोकलैंड समेत ट्राला लेकर नदी में समा गया।
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यह भी पढ़ें: उत्तराखंड : चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क पर सेनर गाड़ में बना पुल टूटा, नदी में समाई पोकलैंड

इसी तरह की लापरवाही 20 जनवरी को धारचूला- तवाघाट मार्ग पर भी हुई थी, उस समय भी पोकलैंड ले जा रहा ट्राला पुल टूटने से धौली गंगा में समा गया था। हालांकि बीआरओ ने वैली ब्रिज को 10 दिन में तैयार कर लिया था। 2017 में भी गणाईगंगोली में एक साथ दो ट्रकों के गुजरते समय मोटर पुल ध्वस्त हो गया था। आज तक यह पुल नहीं बन सका है। यहां के लोग अब ट्राली से नदी पार करने को मजबूर हैं।  

सीमा पर तनातनी और हद दर्जे की लापरवाही 

चीन सीमा पर तनातनी के बाद भारत हर हाल में सीमा तक सड़क का निर्माण कर अपनी पहुंच बनाने के प्रयास में है। डेढ़ दशक के अथक प्रयासों के बाद लिपुलेख तक सड़क लिंक करने के बाद अब मिलम तक सड़क निर्माण का काम पूरा करने का प्रयास युद्ध स्तर पर जारी है। मुनस्यारी और मिलम के बीच 18 किलोमीटर तक सड़क में बाधा बन रही चट्टानों को काटने के लिए हाल ही में सेना के हेलिकाप्टरों से मशीनें मिलम पहुंचाई गई थी।

मुनस्यारी और मिलम दोनों छोरों से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सीमा के मौजूदा हालातों को देखते हुए सड़क और पुलों का दुरुस्त होना जरूरी है। बावजूद इसके सामरिक महत्व के पुल में टनों भार वाले पोकलैंड लदे ट्राला को चलाकर पुल ध्वस्त करने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुनस्यारी से मिलम तक सड़क लिंक नहीं होने से जवानों को पैदल ही अग्रिम चौकियों पर पहुंचना पड़ता है। इसके अलावा सैन्य साजो सामान और रसद भी घोड़े खच्चरों से पहुंचाना पड़ता है। सैनरगाड़ में पुल टूटने से अब और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 

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