उत्तराखंड बोर्ड की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में सामने आई लापरवाही, छात्र की सजगता से खुला मामला
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उत्तराखंड में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में लापरवाही का मामला उजागर हुआ है। मूल्यांकनकर्ता की इस लापरवाही का खामियाजा एक मेधावी छात्र को भुगतना पड़ा है। हालांकि पुनर्मूल्यांकन के बाद छात्र के सात अंक और बढ़े हैं, लेकिन छात्र और विद्यालय के शिक्षकों का दावा है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद छात्र के 14 अंक बढ़ने चाहिए थे। पीड़ित छात्र अब पहले उत्तरांचल शिक्षा बोर्ड में दावा पेश करेगा, फिर भी न्याय नहीं मिला तो न्यायालय की शरण लेगा।
मामला राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उचौलीगोठ का है। वर्ष 2018-19 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा विद्यालय के छात्र करन सिंह महर पुत्र राजेंद्र सिंह महर ने 93 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। उसे गणित में 100, हिंदी में 97, संस्कृत में 93, सामाजिक विज्ञान में 97 और विज्ञान विषय में 78 अंक मिले हैं। छात्र को विज्ञान विषय में नंबर कम मिलने की आशंका हुई तो उसने बोर्ड से सत्यापित उत्तर पुस्तिका मंगाई। इसमें पुस्तिका के मूल्यांकन की लापरवाही का मामला उजागर हुआ है।
उसने विषय विशेषज्ञ शिक्षकों से उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन कराया तो उनके मुताबिक छात्र को चौदह अंक और मिलने चाहिए थे, लेकिन पुनर्मूल्यांकन कराने पर चौदह की जगह सिर्फ सात अंक बढ़ाए गए हैं। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य एसपी यादव के पुस्तिका मूल्यांकन में लापरवाही की पुष्टि करते हुए बताया कि छात्र की उत्तर पुस्तिका में प्रश्न संख्या 26 ख का दो अंकों का द्वितीय खंड जांचा ही नहीं गया है। ऐसे ही दो-दो अंकों के कई प्रश्नों के सही उत्तर पर भी उसे एक-एक अंक दिए गए हैं।
सही मूल्यांकन होता तो जिले की टॉप टेन सूची में शामिल होता मेधावी करन
विद्यालय के शिक्षकों की मानें तो छात्र करन की उत्तर पुस्तिका यदि सही मूल्यांकन होता तो वह हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत अंकों की जगह 95.8 प्रतिशत के साथ जिले की टॉप टेन सूची में शामिल हो सकता था।