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हरक सिंह बोले, ‘ऐसा मैंने किसी सरकार में नहीं देखा.. मंत्री पद छोड़ दूंगा, आमरण अनशन करूंगा

Fri, 17 May 2019 10:24 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 17 May 2019 10:24 AM IST
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Uttarakhand bjp minister harak singh rawat told for give resignation from minister post
हरक सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो

उत्तराखंड के वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने अब अपर मुख्य सचिव लोनिवि ओम प्रकाश को निशाने पर ले लिया है। उन्होंने लालढांग-चिल्लरखाल वन मोटर मार्ग का काम रोकने को लेकर एसीएस से कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

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दूरभाष पर रावत ने कहा कि उन्होंने राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, मायावती सरीखे नेताओं के साथ काम किया है, लेकिन ऐसा कभी नहीं देखा, जो इस सरकार में हो रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए वे आमरण अनशन करेंगे। यदि उन्हें मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा तो छोड़ देंगे। 
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जेल जाना पड़ा तो जेल भी चले जाएंगे। लेकिन सड़क बनवा कर ही दम लेंगे। बुधवार को हरक सिंह छह वन अधिकारियों की विदेश यात्रा की फाइल उन्हें बाईपास कर सीधे मुख्यमंत्री से स्वीकृत कराए जाने पर कार्मिक विभाग पर बरस पड़े।
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बृहस्पतिवार को वन मोटर मार्ग को लेकर उन्होंने लोक निर्माण विभाग को आड़े हाथ लिया। उन्होंने बताया, ‘मैंने एससीएस ओम प्रकाश जी से फोन पर पूछा कि उन्होंने मोटर मार्ग निर्माण पर रोक लगाने के आदेश क्यों दिए? वे अनुभवी अधिकारी हैं। उनसे मुझे ऐसी आशा नहीं थी। ये उनका बचकाना कदम है। ये माफ करने लायक हरकत नहीं है।’ 

रोक लगा दी, पत्रावली मुझे क्यों नहीं भेजी : हरक 

वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने लालढांग-चिल्लरखाल वन मोटर मार्ग का काम रोके जाने के मामले में कहा कि कहा कि पूरी लड़ाई लड़ने के बाद अब टाइगर रिजर्व एरिया बताकर मार्ग को रोका जा रहा है। 

डॉ. रावत ने सवाल किया कि डीएफओ को काम रोकने का अधिकार किसने दिया? जब मोटर मार्ग की सभी पत्रावलियां विभागीय मंत्री के माध्यम से गईं, तो फिर रोक लगाने से पहले पत्रावली मुझे क्यों नहीं भेजी गईं, सरकार निर्णय लेती। उन्हें निर्णय लेने का अधिकार किसने दिया? सरकार एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट में जाती।

वन मोटर मार्ग के राजाजी टाइगर रिजर्व एरिया में होने का हवाला देते हुए पीसीसीएफ से मार्ग पर रोक लगाने की संस्तुति करने वाले डीएफओ पर वन मंत्री जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि डीएफओ को मीडिया की सुर्खियों में रहने का बहुत शौक है। उनकी संस्तुति पर पीसीसीएफ ने भी काम रोकने वाली पत्रवाली सीधे लोनिवि को भेज दी।

अधिकारी पहले गलत थे या अब गलत हैं
वन मंत्री ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों ने मोटर मार्ग की पूर्व में स्वीकृतियां प्राप्त कीं, जिनके आधार पर शासनादेश हुए। अब वही अधिकारी मोटर मार्ग पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं। या तो वे पहले गलत थे, या अब गलत हैं। ऐसे अधिकारी प्रदेश का भला नहीं कर सकते। लोनिवि ने टेंडर कर दिए। तीन किमी सड़क बन गई। पुलों का निर्माण हो गया। जनता के जो साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, उस पैसे की जवाबदेही किसकी है?
 

फक्कड़ हूं, हजार बार मंत्री पद छोड़ना पड़े तो छोड़ दूंगा

आहत वन मंत्री ने कहा कि वे फक्कड़ मिजाज के हैं, उन्हें कोटद्वार और प्रदेश की जनता के लिए यदि हजार बार भी मंत्री पद छोड़ना पड़े तो छोड़ देंगे। उन्हें मंत्री बने रहने का कोई शौक नहीं है। हरक सिंह रावत की कोई हैसियत नहीं है, लेकिन विधायक और मंत्री होने के नाते उनकी जनता के प्रति जवाबदेही है। यदि अधिकारी सड़क का काम रोकेंगे तो वे आमरण अनशन करेंगे। कोटद्वार की जनता की अनदेखी नहीं होने देंगे। वे हर षड़यंत्र का मुकाबला करेंगे।  

पीसीसीएफ विदेश चले गए.. तब जीव जंतुओं से प्यार कहां चला गया
वन मंत्री ने कहा कि टाइगर रिजर्व का हवाला देकर पीसीसीएफ जयराज ने वन मोटर मार्ग का कार्य रोके जाने के संबंध में पत्र लिख दिया, लेकिन जीव जंतुओं के प्रति उनका ये प्यार तब कहां चला गया जब वे विदेश चले गए और जंगल में आग लग रही है।

ब्यूरोक्रेसी वन मंत्री को बाईपास कर रही है, किसकी शह पर, जो यह हो रहा है। मैं समझता हूं कि हरक सिंह रावत को पता चल गया होगा, अब। उनके खिलाफ मोर्चा खोलें, लड़ाई लड़ें। वे साहस दिखाएं। बैठे आमरण अनशन पर। सड़क के लिए हम कांग्रेस के लोग भी साथ रहेंगे। त्यागें मंत्री पद। छोड़े भारतीय जनता पार्टी को।
-प्रीतम सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

मंत्री स्पष्टीकरण ले सकते हैं। उनके हाथ में बहुत बड़ी ताकत है। मंत्री अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकता है। उन्हें स्पष्टीकरण लेने का अधिकार है। मुख्यमंत्री से शिकायत कर सकते हैं।
-अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

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