सात वाहन और 13 कर्मचारियों के भरोसे बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट
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सात वाहन और 13 कर्मचारियों के भरोसे मेडिकल पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी (एमपीसीसी) की ओर से पूरे गढ़वाल क्षेत्र में बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है। देहरादून से मेडिकल वेस्ट उठान के लिए एक संस्था पहल का भी नाम लिया जाता है, मगर वह क्या कर रही है, कैसे कर रही है, उससे जिम्मेदार भी अंधेरे में है।
देहरादून, मसूरी और ऋषिकेश सहित अन्य शहरों के छह सौ से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल तथा पैथोलॉजी से निकले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए कमेटी के पास मंडावर में मात्र एक प्लांट है, जहां पूरे गढ़वाल क्षेत्र से बायो मेडिकल वेस्ट एकत्रित कर निस्तारण करने का दावा किया जाता है।
ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कितने प्रभावी ढंग से हो रहा है। कमेटी पदाधिकारियों की मानें तो फिलहाल आधे से भी कम निजी और सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दी जा रही हैं। अधिकांश ने अभी तक कमेटी और पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है।
उत्तराखंड के रुड़की, हरिद्वार, देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, विकासनगर सहित गढ़वाल के अधिकांश शहर में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का जिम्मा मेडिकल पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी-एमपीसीसी पर है। इसके तहत पूरे गढ़वाल मंडल में 602 सरकारी और निजी अस्पताल, पैथोलॉजी संस्था से पंजीकृत हैं।
पूरे गढ़वाल क्षेत्र में अस्पतालों से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए कमेटी की ओर से भगवानपुर क्षेत्र के मंडावर में प्लांट लगाया गया है। लगभग 12 साल से उक्त कमेटी की ओर से बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है, लेकिन आज भी कमेटी के पास संसाधनों का अभाव है। स्थिति यह है कि कमेटी के पास प्लांट चलाने और मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए मात्र 13 कर्मचारी और सात वाहन हैं।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है। दूसरी ओर आधे से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल कमेटी से पंजीकृत नहीं हैं, यानी की कमेटी की ओर से वहां निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का निस्तारण नहीं किया जाता है।
46 में से छह सरकारी अस्पतालों के कचरे का ही निस्तारण
हरिद्वार जिले में स्थित 46 सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में से मात्र छह अस्पतालों से ही बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कराया जा रहा है, जिन्होंने एमपीसीसी में पंजीकरण कराया है। शेष अस्पतालों से निकलने वाला कचरा कहां जा रहा है। इसका किसी को पता नहीं है।
भले ही मेडिकल काउंसिल और सरकार की ओर से बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर से देहात तक अधिकांश अस्पतालों से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट नगर निगम और निकायों के ही जिम्मे है, जिनका सही ढंग से निस्तारण नहीं किया जाता है।