उत्तराखंड: सदन में विशेषाधिकार हनन को लेकर गरमाया मामला, अल्मोड़ा के डीएम की जांच मुख्य सचिव को
- स्पीकर ने पीठ से दिए प्रदेश सरकार को निर्देश
- विधानसभा उपाध्यक्ष की नारफरमानी का है डीएम पर आरोप
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विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रदेश सरकार को डिप्टी स्पीकर व अल्मोड़ा के विधायक रघुनाथ सिंह चौहान के विशेषाधिकार हनन के मामले में जिलाधिकारी की जांच मुख्य सचिव से कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पीठ से कहा कि संसदीय कार्यमंत्री की बातों का अक्षरश: पालन हो।
सदन में प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल के स्थान पर उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान पीठ पर आ गए। तभी विपक्ष की ओर से बात आई कि डिप्टी स्पीकर सदन में अल्मोड़ा के जिलाधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला ला रहे हैं। विपक्ष के तार छेड़े जाने के बाद डिप्टी स्पीकर खुद को नहीं रोक पाए और उन्होंने कहा कि वह विशेषाधिकार हनन का मामला लेकर आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके क्षेत्र में तीन लोग कोरोना से मर गए।
उनके बार-बार कहने के बावजूद डीएम ने सीएमओ को नहीं भेजा। डिप्टी स्पीकर ने पीठ पर रहते हुए ये सारी बातें कहीं। इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सोमवार को इसका समाधान हो गया था। डीएम ने कहा था कि वह खेद व्यक्त करेंगे। इस पर डिप्टी स्पीकर ने कहा कि डीएम ने उनसे माफी नहीं मांगी है। इस पर कौशिक ने कहा कि वह मामले को दिखवा लेंगे। इस पर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया।
उनका आरोप था कि अफसरशाही मनमानी कर रही है। पीठ से कुछ कहा जा रहा है, उसका संज्ञान लेना चाहिए। करीब 15 मिनट तक सदन में खूब गहमागहमी होती रही। इस बीच स्पीकर अग्रवाल पीठ पर आ गए। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि यदि अध्यक्ष अनुमति देंगे तो मुख्य सचिव से जांच कराई जाएगी। मामले का परीक्षण करा लिया जाएगा। स्पीकर ने पीठ से निर्देश दिए कि संसदीय कार्यमंत्री की बातों का अक्षरश: पालन हो।
ये है मामला
अल्मोड़ा के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया पर क्षेत्र के विधायक रघुनाथ सिंह चौहान की नाफरमानी का आरोप है। चौहान जो विधानसभा उपाध्यक्ष भी हैं, का कहना है कि उनके क्षेत्र में तीन लोगों की कोविड-19 महामारी से मौत हो गई। उन्होंने जिलाधिकारी को कहा कि वह सीएमओ को वहां भेजें, लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं सुनी।
मुझसे नहीं मांगी माफी
सदन में जब संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सोमवार को जिलाधिकारी से बात हो गई थी। जिलाधिकारी ने कहा था कि वह खेद जताएंगे। इस तरह मसले का समाधान हो गया था। इस पर डिप्टी स्पीकर चौहान ने कहा कि उनसे डीएम ने अब तक कोई खेद प्रकट नहीं किया है।
मैंने सदन में कहा कि यदि अध्यक्ष अनुमति दें तो मामले की जांच मुख्यसचिव को दे सकते हैं। डीएम की गलती की जांच करके उसे बताएं। अध्यक्ष ने भी पीठ से कहा कि शासन इस पर उचित कार्रवाई करे।
- मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री
मैं पीठ पर बैठा हुआ था। खुद अपने मामले में निर्णय नहीं ले सकता था। लेकिन यह विशेषाधिकार हनन का मामला है। बाद में स्पीकर आए और उन्होंने कहा कि इसमें जांच होगी। मैं देख रहा हूं कि मामले नहीं सुलझा तो मैं सदन विशेषाधिकार हनन का मामला उठाऊंगा।
- रघुनाथ सिंह चौहान, डिप्टी स्पीकर