Uttarakhand : साढ़े चार साल से सरकार के लिए मुसीबत बना है विकास प्राधिकरणों का फैसला, सदन में भी गरमाया मुद्दा
13 नवंबर 2017 को सरकार ने सभी जिलों के स्थानीय प्राधिकरणों और नगर निकायों की विकास प्राधिकरण से संबंधित शक्तियां लेते हुए 11 जिलों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण गठित किए। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में हरिद्वार के क्षेत्रों को शामिल कर लिया गया था जबकि मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण में दून घाटी विकास प्राधिकरण को निहित कर दिया गया था। इन पर लगातार उंगली उठती आ रही है।
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दरअसल, 13 नवंबर 2017 को सरकार ने सभी जिलों के स्थानीय प्राधिकरणों और नगर निकायों की विकास प्राधिकरण से संबंधित शक्तियां लेते हुए 11 जिलों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण गठित किए। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में हरिद्वार के क्षेत्रों को शामिल कर लिया गया था जबकि मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण में दून घाटी विकास प्राधिकरण को निहित कर दिया गया था।
इन पर लगातार उंगली उठती आ रही है। पूर्ववर्ती सरकार में दो समितियां बनी। सरकार को बैकफुट पर जाते हुए जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा था। यानी 2016 के बाद जो भी नए क्षेत्र इन विकास प्राधिकरणों में शामिल हुए थे, उन्हें पूर्व की भांति राहत दे दी गई थी।
2016 के बाद यह क्षेत्र हुए थे जिला स्तरीय प्राधिकरणों में शामिल
चमोली- स्थानीय विकास प्राधिकरण गैरसैंण, गोचर, चमोली-गोपेश्वर, औली, बदरीनाथ, चमोली के सभी स्थानीय विकास निकाय जैसे नगर पालिका, नगर पंचायत, एनएच और राज्य हाईवे के मध्य के दोनों ओर के 200 मीटर तक के राजस्व ग्राम।
रुद्रप्रयाग- स्थानीय विकास प्राधिकरण, जिले के तहत आने वाले नगर पालिका व नगर पंचायत, एनएच, एसएच के 200 मीटर क्षेत्र के गांव।
पौड़ी- स्थानीय विकास प्राधिकरण श्रीनगर, पौड़ी जिले के सभी नगर पालिका व नगर पंचायत, 200 मीटर के आसपास के गांव।
उत्तरकाशी- गंगोत्री विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, स्थानीय विकास प्राधिकरण, नगर पालिका, नगर पंचायत, 200 मीटर के आसपास के गांव।
टिहरी- टिहरी झील परिक्षेत्र विकास प्राधिकरण, नई टिहरी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, नगर पालिका, नगर पंचायत, 200 मीटर के आसपास के गांव।
पिथौरागढ़- स्थानीय विकास प्राधिकरण, नगर पालिका, नगर पंचायत, 200 मीटर के गांव।
बागेश्वर- स्थानीय विकास प्राधिकरण बागेश्वर, कौसानी, ल्वेशल, नगर पालिका, नगर पंचायत, 200 मीटर के गांव7
चंपावत- स्थानीय विकास प्राधिकरण, नगर पालिका, नगर पंचायत, 200 मीटर के गांव।
अल्मोड़ा- पूर्ववर्ती यूपी की अधिसूचना 30 अक्तूबर 1980 के तहत अधिसूचित क्षेत्र, नगर पालिका, नगर पंचायत, 200 मीटर के गांव।
नैनीताल- नैनीताल झील परिक्षेत्र विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, स्थानीय विकास प्राधिकरण रामनगर, हल्द्वानी-काठगोदाम, नगर निगम, नगर पालिकाएं, नगर पंचायत और 200 मीटर के गांव।
एचआरडीए- हरिद्वार के वह क्षेत्र जो पूर्व में किसी विकास प्राधिकरण के तहत अधिसूचित नहीं था। नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत व 200 मीटर के गांव।
एमडीडीए- दून घाटी विकास प्राधिकरण, ऋषिकेश, नगर पालिका, नगर पंचायत आदि।
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सरकार के लिए ये सवाल कर रहे माहौल खराब
- जब जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को स्थगित कर दिया गया तो उनमें नक्शा पास करने की आजादी कैसे दी गई?
- जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को स्थगित करने के बाद भी सरकार यहां अधिकारियों की तैनाती क्यों कर रही है?
- प्राधिकरण स्थगित करने का आदेश तो जारी किया लेकिन पूर्व की भांति विशेष प्राधिकरण, नगर पालिका या नगर पंचायतों से नक्शे पास कराने का प्रावधान बहाल क्यों नहीं किया गया?
- नक्शे पास कराने की अनिवार्यता खत्म हुई लेकिन भविष्य में अगर यह जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण बहाल हुए तो इस दौरान निर्माण करने वालों के साथ क्या बर्ताव होगा? उनका निर्माण अवैध के श्रेणी में तो नहीं आएगा?
- जब जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को स्थगित कर दिया गया है तो वह किसी भी नए क्षेत्र में किस आधार पर नोटिस या वसूली का काम कर सकते हैं?