उत्तराखंडः गैरसैंण को नया मंडल बनाने पर आंदोलनकारियों ने उठाए सवाल
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गैरसैंण को नया मंडल घोषित किए जाने संबंधी राज्य सरकार के फैसले को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने जहां खुशी जताई है, वहीं सरकार व आला अधिकारियों की मंशा पर सवाल भी खड़े किए हैं।
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राज्य आंदोलनकारियों का मानना है कि कहीं नवसृजित गैरसैंण मंडल का भी वही हाल न हो जो कुमाऊं और गढ़वाल मंडल का हुआ है। राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि गैरसैंण को मंडल घोषित किया जाना बड़ा मुद्दा नहीं है।
मुद्दा यह है कि मंडल मुख्यालय पर मंडलायुक्त समेत तमाम आला अधिकारी बैठें और पहाड़ के लोगों की समस्याओं का समाधान करें। अमर उजाला ने जब राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर कुछ राज्य आंदोलनकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो आंदोलनकारियों ने कुछ इस अंदाज में प्रतिक्रियाएं दीं।
गैरसैंण को मंडल घोषित किया जाना सरकार का सही फैसला है। लेकिन, सरकार का यह फैसला तब सही माना जाएगा जब मंडलायुक्त समेत मंडल स्तर के तमाम अधिकारी मुख्यालय पर बैठें और पहाड़ के लोगों की समस्याओं का समाधान करें। राज्य आंदोलन के साथ ही मांग उठाई गई थी कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया जाए। लेकिन, फिलहाल गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल पाया है। सरकार को गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने के साथी गैरसैंण मंडल मुख्यालय पर भी अधिकारियों को उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
- सुशीला बलूनी, राज्य आंदोलनकारी
कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अलावा राज्य में एक और मंडल का गठन किए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। सरकार ने गैरसैंण को मंडल घोषित करने का फैसला तो ले लिया है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कहीं नवसृजित मंडल का हाल नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जैसे मंडल मुख्यालयों जैसा न हो। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि मंडल सृजित करने के साथ ही तमाम आला अधिकारी मंडल मुख्यालयों पर बैठें और आमजन की समस्याओं का समाधान करें।
- प्रदीप कुकरेती, राज्य आंदोलनकारी
राज्य में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल पहले से ही वजूद में हैं। नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल मंडल मुख्यालय बनाए गए हैं। लेकिन, इन दोनों मंडलों के मंडल आयुक्त समेत तमाम अधिकारी मुख्यालयों के बजाय देहरादून और हल्द्वानी में डेरा जमाए रहते हैं। ऐसे में मंडलायुक्त के स्तर से समस्याओं के निराकरण में आमजन को तमाम समस्याएं आती हैं। जब पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल जैसी जगहों पर अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते तो भला इन दोनों शहरों से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित गैरसैंण में अधिकारी कहां रुकेंगे। सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि मंडलायुक्त समेत तमाम अधिकारी मंडल मुख्यालयों में बैठें और आमजन की समस्याओं का समाधान करें।
- रवींद्र जुगरान , राज्य आंदोलनकारी
गैरसैंण को मंडल बनाना अच्छा कदम है। गैरसैंण की बेहतरी में जो भी फैसला लिया जाएगा, उसका स्वागत किया जाएगा। लेकिन, उत्तराखंड की जनता के साथ न्याय तब होगा, जब गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाएगा।
-ओमी उनियाल, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी
राज्य निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। राज्य निर्माण के समय गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाना था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। आंदोलनकारी आज भी गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनता देखने का इंतजार कर रहे हैं।
-जगमोहन सिंह नेगी, अध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच
गैरसैंण को पहचान दिलाने के लिए हर फैसले का स्वागत किया जाएगा। लेकिन, गैरसैंण व उत्तराखंड के साथ न्याय तभी होगा, जब इसे स्थायी राजधानी बनाया जाएगा। आंदोलनकारी इस मांग को लेकर हमेशा संघर्ष करते रहेंगे।
-पूरण सिंह लिंगवाल, राज्य आंदोलनकारी
गैरसैंण को मंडल बनाने का फैसला सराहनीय है। लेकिन, यह सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए। शीर्ष अधिकारी पर्वतीय जिलों में बने कार्यालयों में नियमित रूप से बैठें, ताकि पहाड़ की जनता को लाभ मिल सके।
- रामलाल खंडूड़ी, राज्य आंदोलनकारी
गैरसैंण के साथ न्याय की दिशा में सरकार एक कदम आगे बढ़ी है। लेकिन, स्थायी राजधानी ही अंतिम समाधान है। गैरसैंण राज्य आंदोलनकारी व प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं से जुड़ा है।
- वेद कोठारी, राज्य आंदोलनकारी
उत्तराखंड आंदोलन में बलिदान देने वाले आंदोलनकारियों को सच्ची श्रद्धांजलि गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाकर ही दी जा सकती है। आंदोलनकारी स्थायी राजधानी की मांग को लेकर हमेशा संघर्ष करते रहेंगे।
- सुरेश नेगी, राज्य आंदोलनकारी
कोई बोला मंडल से होगा विकास तो किसी ने रुपयों का दुरुपयोग बताया
सरकार की ओर से गैरसैंण को बीते बृहस्पतिवार को प्रदेश का तीसरा मंडल बनाया गया है। सरकार के इस फैसले का किसी ने स्वागत किया तो किसी ने कहा कि सरकार ने जनता के रुपयों का दुरुपयोग करने का काम किया है।
गैरसैंण को प्रदेश का तीसरा मंडल बना सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसका हम स्वागत करते हैं। मंडल बनने से पहाड़ के चार जिलों का विकास तेजी से होगा। इसका पहाड़ के लोगों को लाभ मिलेगा।
- कमल रजवार, अध्यक्ष, केंद्रीय कुर्मांचल परिषद
सरकार ने यह एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। गैरसैंण को मंडल बनाने से अब पहाड़ में भी उच्च अधिकारी होंगे, जिससे पहाड़ के इन चार जिलों में पलायन रुकने के साथ युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
- महेश भंडारी, अध्यक्ष, दून रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन
गैरसैंण को मंडल बनाने से ज्यादा पहाड़ में अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी है। कोई भी अधिकारी पहाड़ चढ़ने से बचना चाहता है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में विकास नहीं हो पा रहा है। इस ओर सरकार को काम करना होगा।
- साधन शर्मा, अध्यक्ष उमा
सरकार की ओर से गैरसैंण को मंडल बना ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। इससे पहाड़ में पलायन रुकने के साथ ही रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे प्रदेश के हर जिले का समानता से विकास होगा।
- बिजेंद्र प्रसाद ममगाईं, प्रवक्ता, उत्तराखंड विद्वत सभा
गैरसैंण को मंडल बना सरकार ने पहाड़ में होने वाले विकास के रास्ते को खोला है। यह एक ऐतिहासिक फैैसला है हम इसका स्वागत करते हैं। पलायन पहाड़ का सबसे बड़ा दर्द है जो अब कम होगा।
- रमेश घिल्डियाल, गढ़वाल सभा, सचिव
गैरसैंण में मंडल बना सरकार ने जनता की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग करने का काम किया है। पहाड़ी इलाकों में विकास के लिए बीते 20 सालों में किसी भी सरकार ने काम नहीं किया है।
- कुलदीप, अध्यक्ष, वीर सावरकर संगठन
गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने से बचने के लिए सरकार ने गैरसैंण में मंडल बनाया है। मंडल बनाने से पहाड़ का विकास नहीं होगा। उच्च अधिकारी और नेता पहाड़ जाने से बचना चाहते हैं।
- लेखराज, जिला महामंत्री, सीटू
जनहितों की अनदेखी कर हो रही सिर्फ राजनीति
प्रदेश सरकार द्वारा गैरसैंण को मंडल बनाने के निर्णय पर राजनीति दलों ने निशाना साधा है। आप, उक्रांद व स्वराज पार्टी का कहना है कि भाजपा ने जनहितों की अनदेखी कर कमिश्नरी का निर्णय लिया है। विभागों में पहले से ही अधिकारी/कर्मचारियों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। इन हालातों में बिना ढांचे के कमिश्नरी का संचालन कैसे होगा, इसका जवाब सरकार के पास नहीं है।
एक जारी बयान में उत्तराखंड क्रांतिदल के केंद्रीय प्रवक्ता देवेंद्र चमोली व जिला उपाध्यक्ष मोहित डिमरी का कहना है कि गैरसैंण के नाम पर सरकार सिर्फ राजनीति कर रही है। सही होता कि जिला गठन कर राजधानी की ओर एक कदम बढ़ाया जाता। लेकिन कमिश्नरी बनाकर सरकार से खानापूर्ति की है।
वहीं, आप के वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार का चार वर्ष का कार्यकाल पूरी तरह से निराशाजनक रहा है। गैरसैंण के सत्र के नाम पर जन भावनाओं की अनेदखी का ऐसा निर्णय लिया गया है, जो धरातल पर उतरेगा भी या नहीं, कहना मुश्किल है।
कहा कि गैरसैंण में मूलभूत सुविधाओं को सुधारने की दिशा में कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। बिना किसी सुझाव व वार्ता के कमिश्नरी का बनाने का निर्णय लिया गया है, जो उचित नहीं है। वहीं, स्वजन स्वराज पार्टी के जिलाध्यक्ष सुनीत चौधरी का कहना है कि एक तरफ सरकार जायज मांग करने वाले लोगों पर लाठीचार्ज कराती है।
दूसरी तरफ कमिश्नरी की घोषणा, जो सरकार की नियत पर शक पैदा करता है। उत्तराखंड राज्य निर्माण के साथ गैरसैंण राजधानी की मांग वर्षें से हो रही है। लेकिन सरकार आमजन की आवाज को अनसुना कर अपना निर्णय थोप रही है।
पूर्व अफसर बोले-जनता के करीब पहुंचेगी सरकार
गैरसैंण को मंडल बनाने के बाद उन अधिकारियों ने भी तारीफ की है, जिन्होंने लंबे समय तक या तो बतौर गढ़वाल आयुक्त सेवाएं दी हैं या फिर प्रदेश के मुख्य सचिव जैसे अहम पद पर सेवाएं दी हैं। उनका कहना है कि इस कदम के बाद निश्चित तौर पर सरकार, जनता के और करीब पहुंच जाएगी। एक ओर विकास कार्यों की निगरानी आसान होगी तो दूसरी ओर लोगों को भी अपने कामों के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
पहाड़ में एक दिक्कत यह थी कि दूरस्थ इलाकों की वजह से सरकारी सिस्टम को काम करने में कठिनाई होती थी। निश्चित तौर पर अगर छोटी इकाई होगी तो निगरानी बेहतर हो सकेगी। गैरसैंण को मंडल बनाना इसी दिशा में सकारात्मक कदम है। मंडल बनाने से सरकार जनता के करीब पहुंचेगी। चुनौती यह है कि इस सुविधा और खर्च के बीच तालमेल बनाना होगा।
-इंदु कुमार पांडेय, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
जब भी किसी प्रशासनिक इकाई का गठन होता है तो सामान्य जनता को आनेभ-जाने में, सरकारी काम निपटाने में सुविधा होती है। किसी स्थल का समुचित विकास करना है तो उसकी प्रशासनिक इकाईयां निकटस्थ होंगी तो बेहतर होगा। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में सरकार ने मंडल बनाने का जो कदम उठाया है, वह स्वागत योग्य है। इससे निश्चित तौर पर बेहतर नतीजे सामने आएंगे। -जगदीश चंद्र, पूर्व अधिकारी
गैरसैंण को मंडल बनाने को मैं सरकार का बहुत अच्छा निर्णय मानता हूं। प्रशासनिक इकाई जितनी जनता के करीब होगी, उतनी ही लोगों को सहूलियत होगी। विकास कार्यों की निगरानी भी और करीब से की जा सकेगी।
-सुवर्धन, पूर्व गढ़वाल आयुक्त
चमोली काफी दूरस्थ है। रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा के साथ ही बागेश्वर के लोगों के लिए भी गैरसैंण को मंडल बनाना अच्छा कदम है। इससे ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का भी विकास आसान होगा। सीनियर अफसर होने से लाभ मिलेगा।
-डीएस गर्ब्याल, पूर्व आयुक्त गढ़वाल
मेरा मानना है कि गैरसैंण को मंडल बनाने से ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का खर्च भी बढ़ेगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कमिश्नरी का कोई जिक्र नहीं है। गैरसैंण मंडल बनने से बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा, इससे भी नुकसान ही है क्योंकि ठेकेदारी प्रथा बढ़ने के साथ ही प्राकृतिक सुंदरता भी प्रभावित होगी।
-एसएस पांगती, पूर्व आयुक्त, गढ़वाल