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उत्तराखंड: माननीयों पर अब दिखने लगा इलेक्शन का दबाव, सड़कों को सुधारने के लिए हुए सक्रिय

Sat, 26 Dec 2020 12:13 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 26 Dec 2020 12:13 PM IST
सार

  • बजट के अभाव से जूझ रहे लोनिवि में बढ़ गया धर्मसंकट

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Uttarakhand: Assembly Election 2022 pressure seen on Ministers Now
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में माननीयों पर अब आगामी विधानसभा चुनाव का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। वे अपने चुनाव क्षेत्र की सड़कों को लेकर चिंता में हैं। उनका पूरा प्रयास है कि लोक निर्माण विभाग उनके चुनाव क्षेत्र में कम से कम प्रमुख मोटर मार्गों की हालत सुधार दे। इसकी बानगी पिछले दिनों उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ.धनसिंह रावत की नाराजगी के तौर पर सामने भी आई। 

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अपने चुनाव क्षेत्र को लेकर खासे सक्रिय डॉ.रावत ने लोनिवि के अफसरों को अपने चुनाव क्षेत्र की सड़कों की हालत सुधारने के निर्देश दिए। उनकी नाराजगी की वजह पिछली दो बैठकों में निर्देश के बाद भी सड़कों का कार्य शुरू न होना था।
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लेकिन जब उन्होंने इत्मिनान से विभागीय अधिकारियों के साथ मंथन किया तो समझ गए कि माजरा बजट की उपलब्धता का है। अब वह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक कराकर सड़कों के लिए बजट का प्रबंध कराने की तैयारी में हैं। दरअसल, लोक निर्माण विभाग के पास इतना बजट नहीं है कि वह सभी विधानसभा क्षेत्रों की बदहाल सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण के कार्य को अंजाम दे सके।
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26 हजार किमी पक्की सड़कें, 300 करोड़ बजट
प्रदेश में लोक निर्माण विभाग की करीब 36 हजार किमी सड़कें हैं। इनमें से लगभग 26 हजार किमी सड़कें पक्की हैं। इन सड़कों में से हर साल 5000 किमी सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण की आवश्यकता है। इसके लिए विभाग को करीब एक हजार के बजट की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग को मरम्मत, नवीनीकरण व डामरीकरण के मद में सालाना करीब 300 करोड़ रुपये मिलते हैं। इस धनराशि से बामुश्किल लगभग 2000 किमी सड़कों की मरम्मत ही हो पाती है।

स्थिति एक अनार सौ बीमार वाली
ऐसी स्थिति में विभाग में सड़कों के सुधारीकरण के लिए जनप्रतिनिधियों में खासी जोर आजमाइश होती है। वे अपने चुनाव क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा सड़कों के लिए बजट हासिल करने की कोशिश करते हैं। स्थिति एक अनार सौ बीमार वाली है। अब जबकि सरकार को चार साल पूरे होने जा रहे हैं, ऐसे हालात में सत्ता पक्ष के विधायक अपने क्षेत्र की सड़कों को लेकर कुछ ज्यादा ही दबाव में आ गए हैं।

ग्रामीण सड़कों की मरम्मत बड़ी चुनौती

सरकार के सामने ग्रामीण सड़कों की मरम्मत सबसे बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में इन सड़कों का निर्माण तो हो गया है। लेकिन जिन सड़कों को बने पांच से सात साल हो चुके हैं, वे मरम्मत के अभाव में बद से बदतर हो गई हैं। योजना में उनकी मरम्मत के बजट का प्रावधान नहीं है।

देखरेख के लिए इन सड़कों को बाद में लोनिवि के हवाले कर दिया जाता है। लेकिन ये बात उच्च शिक्षा राज्यमंत्री की बैठक में खुलकर सामने आ चुकी है कि लोनिवि इन बदहाल सड़कों को लेने के लिए तैयार नहीं है। इसकी एक मात्र वजह बजट की कमी है। इन्हीं बदहाल गांवों की सड़कों को सुधारने का दबाव विधायकों पर है।

विभाग ने इस साल करीब एक हजार किमी सड़कों का नवीनीकरण किया है। बजट की उपलब्धता के हिसाब से सालाना करीब 1500 से 2000 किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य तय होता है। विभाग के पास सड़कों की मरम्मत के जो भी प्रस्ताव हैं, उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य हो रहा है। अनुपूरक बजट में 222 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस धनराशि के प्राप्त होने से सड़कों पर और तेजी से काम होगा। 
- हरिओम शर्मा, प्रमुख सचिव, लोनिवि

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