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Uttarakhand Election 2022: युवाओं में कांग्रेस, महिलाओं को मौका देने में भाजपा आगे, परिवारवाद को बढ़ावा देने में दोनों आगे

Fri, 28 Jan 2022 12:35 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 28 Jan 2022 12:35 PM IST
सार

भाजपा ने आठ और कांग्रेस ने पांच महिलाओं को टिकट दिए। युवा मुख्यमंत्री की अगुवाई में चुनाव लड़ने जा रही भाजपा ने भाजयुमो के एक भी नेता पर भरोसा नहीं जताया जबकि कांग्रेस ने युवा कांग्रेस के दो नेताओं को टिकट दिया है।

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Uttarakhand Assembly Election 2022: BJP ahead in giving opportunities to women, congress and bjp ahead in promoting familyism
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

एक परिवार-एक टिकट, पिता के बाद बेटे को मौका नहीं, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, युवाओं को राजनीति में मौका... जैसे राजनीतिक दलों के दावे हवाई जुमले बनकर रह गए। दोनों दलों के प्रत्याशियों की सूचियां जारी हो चुकी हैं। भाजपा ने आठ और कांग्रेस ने पांच महिलाओं को टिकट दिए। युवा मुख्यमंत्री की अगुवाई में चुनाव लड़ने जा रही भाजपा ने भाजयुमो के एक भी नेता पर भरोसा नहीं जताया जबकि कांग्रेस ने युवा कांग्रेस के दो नेताओं को टिकट दिया है। परिवारवाद के मोह में दोनों ही राजनीतिक दल फंसे नजर आ रहे हैं।

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भाजपा : युवा सीएम की सरकार के लिए युवाओं पर भरोसा नहीं
भारतीय जनता पार्टी इस बार युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में युवा सरकार के दावे के साथ चुनाव मैदान में ताल ठोक चुकी है। डोईवाला को छोड़कर अभी तक 69 सीटों पर प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। इन प्रत्याशियों में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेताओं पर केंद्रीय नेतृत्व ने भरोसा नहीं जताया। एक भी भाजयुमो नेता को भाजपा ने टिकट नहीं दिया है, जबकि सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी से आगे बढ़े हैं।
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महिलाओं के नजरिए से देखें तो कांग्रेस के मुकाबले भाजपा का स्कोर बेहतर रहा है। भाजपा ने आठ महिलाओं को मैदान में उतारा है। इनमें केदारनाथ से शैला रानी रावत, कोटद्वार से ऋतु भूषण खंडूड़ी, नैनीताल से सरिता आर्य, देहरादून कैंट से सविता कपूर, खानपुर से कुंवरानी देवयानी, यमकेश्वर से रेनू बिष्ट, पिथौरागढ़ से चंद्रा पंत, सोमेश्वर से रेखा आर्य के नाम शामिल हैं। परिवारवाद के नजरिए से देखें तो भाजपा ने एक परिवार-एक टिकट के सिद्धांत का पालन तो किया है लेकिन परिवार में ही टिकट देने की परंपरा से छुटकारा नहीं पा सकी। खानपुर में भाजपा ने विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की पत्नी कुंवरानी देवयानी को प्रत्याशी बनाया है।

देहरादून कैंट में कार्यकर्ताओं के विरोध के बीच भाजपा ने दिवंगत विधायक हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर को टिकट दिया है। पिथौरागढ़ में भाजपा ने दिवंगत वरिष्ठ नेता प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत, सल्ट में दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के भाई महेश जीना, कोटद्वार में पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी की बेटी ऋतु भूषण खंडूड़ी, सितारगंज में भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा, काशीपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता व विधायक हरभजन सिंह चीमा के बेटे त्रिलोक सिंह चीमा को टिकट देकर यह साफ हो गया कि इस बार भाजपा परिवार में ही राजनीतिक विरासत संभालने की पंरपरा से पीछा नहीं छुड़ा पाई है।

कांग्रेस : युवा कांग्रेस पर भरोसा, परिवारवाद से नहीं छुड़ा पाए पीछा

विधानसभा चुनाव की तैयारी की शुरुआत एक परिवार-एक टिकट के दावे के साथ करने वाली कांग्रेस इससे पीछा नहीं छुड़ा पाई। खुद जिन पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जा रहा है, उनकी ही बेटी को टिकट दे दिया गया। हालांकि युवाओं के मामले में कांग्रेस ने अपने युवा कांग्रेस संगठन पर भरोसा जताया है। महिलाओं के नजरिए से देखें तो कांग्रेस इस बार पांच महिलाओं पर भरोसा जता पाई है जबकि दो महिलाओं के नाम की घोषणा करने के बाद उन्हें सूची से हटा दिया गया।

कांग्रेस ने हरिद्वार ग्रामीण में पूर्व सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत, मसूरी में गोदावरी थापली, भगवानपुर में ममता राकेश, रुद्रपुर से मीना शर्मा औ लैंसडोन से अनुकृति गुसाईं को टिकट दिया है। जबकि हरिद्वार जिले की ज्वालापुर सीट पर बरखा रानी और लालकुआं सीट पर संध्या डालाकोटि का टिकट देने के बाद नाम वापस ले लिया गया। भाजपा की आठ महिला प्रत्याशियों के मुकाबले कांग्रेस ने पांच महिलाओं को टिकट दिए। युवाओं पर भरोसे की बात करें तो कांग्रेस ने दो टिकट युवाओं को दिए हैं। इनमें युवा कांग्रेस कोटे से जयेंद्र चंद रमोला को ऋषिकेश सीट से और ज्वालापुर से रवि बहादुर को टिकट दिया गया।

परिवारवाद के मामले में कांग्रेस न तो को एक परिवार-एक टिकट के सिद्धांत का पालन कर पाई और न ही परिवारवाद से छुटकारा हासिल कर पाई। कैंट सीट पर वैभव वालिया और अभिनव थापर भी युवा कोटे से टिकट चाह रहे थे, लेकिन उनके अरमान पूरे नहीं हो पाए। पूर्व सीएम हरीश रावत लालकुआं से लड़ेंगे जबकि उनकी बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव मैदान में उतारी गई है।

इसके अलावा यशपाल आर्य बाजपुर से लड़ेंगे जबकि उनका बेटा संजीव आर्य नैनीताल से चुनाव मैदान में है। पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा के बेटे नरेंद्र चंद सिंह को पार्टी ने काशीपुर से टिकट दिया है। लैंसडोन विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री व वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं को टिकट दे दिया है। कुल मिलाकर देखें तो परिवारवाद की छाया से कांग्रेस भी बच नहीं पाई।

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