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Uttarakhand Chunav 2022: आप, निर्दलीय ने केदारनाथ विधानसभा में चुनावी मुकाबला बनाया चुनौतीपूर्ण
Sun, 13 Feb 2022 11:19 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:19 AM IST
सार
प्राचीन धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और रमणीक स्थलों से सुशोभित केदारनाथ विधानसभा में इस बार का चुनाव रोचक बना हुआ है।
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केदारनाथ
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
केदारनाथ विधानसभा सीट पर निर्दलीय कुलदीप रावत और आप के समुंत तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी कर रखी है। इस बार बीजेपी के कुनबे के एकजुट होने से यहां प्रत्याशी की ताकत बढ़ी है, जिससे कार्यकर्ता भी जोश में हैं। लेकिन पार्टी के सामने जीत के साथ साख और बीते दो चुनाव में खोए वोट बैंक को वापस लाने की सबसे बड़ी चुनौती भी है।
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पार्टी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट के सहारे अपनी नैया पार करने में जुटी है। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी पांच वर्ष के कामकाज के साथ सरकार की नाकामियों को लेकर जनता के बीच में पहुंच रहे हैं। फिलहाल केदारनाथ विस में मुकाबला चतुष्कोणीय बना हुआ है।
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प्राचीन धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और रमणीक स्थलों से सुशोभित केदारनाथ विधानसभा में इस बार का चुनाव रोचक बना हुआ है। यहां बीते विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी निर्दलीय प्रत्याशी दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए मुश्किल का सबब बने हुए हैं। उस, रही-सही कसर आप के उम्मीदार पूरी कर रहे हैं। वर्ष 2017 में हुए विस चुनाव में निर्दलीय कुलदीप रावत 642 वोट से कांग्रेस के प्रत्याशी मनोज रावत से हार गए थे। जबकि भाजपा में बगावत के चलते प्रत्याशी शैलारानी रावत को चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा। इस बार भी केदारनाथ में पटकथा बहुत हद तक 2017 जैसी है। अंतर सिर्फ इतना है कि भाजपा में बगावत नहीं है और पूर्व विधायक आशा नौटियाल मैदान में नहीं हैं।
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बाकी, मुकाबले के चेहरे वही हैं। भाजपा के लिए सुखद पहलू यह है कि उनके सभी लोग एक मंच पर आ रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार दिख रहा है। ऐसे में पार्टी, अपने प्रत्याशी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट केदारनाथ पुनिर्नर्माण सहित केंद्र की योजनाओं का सहारा लेकर विस में अपना खोया रुतबा हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास होह रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी स्वयं वर्ष 2017 से 2021 तक पांच बार केदारनाथ पहुंच चुके हैं। उन्होंने इस क्षेत्र के प्रति अपनी आस्था व स्नेह को भी बयां किया है। साथ ही इस विस चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी यहां प्रचार के लिए आना पड़ा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि भाजपा के लिए केदारनाथ विस सीट कितने मायने रखती है।
दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रत्याशी व निवर्तमान विधायक मनोज रावत ग्रामीण पुस्तकालय, ई-लर्निंग, टेलीमेडिसिन सहित विधायक निधि के कार्यों को जनता के बीच लेकर जा रहे हैं। वह भाजपा सरकार पर सहयोग न करने का आरोप भी लगा रहे हैं। यहां कांग्रेस को कुछ झटके भी मिले हैं, उसके जिपं सदस्य विनोद राणा व सुमन नेगी पार्टी छोडर्क आम आदमी पार्टी के साथ हो गए हैं, सुमन विधायक मनोज रावत के गृह क्षेत्र के वार्ड से हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं। जबकि निर्दलीय कुलदीप रावत, भाजपा और कांग्रेस से क्षेत्र में किए गए विकास को धरातल पर बताने का सवाल पूछ रहे हैं।
विस के कई क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी सुमंत तिवारी ने भी मुकाबले को रोचक बना दिया। फिलहाल जो तस्वीर है, उसमें निर्दलीय प्रत्याशी और आप नेंभाजपा-कांग्रेस के साथ मुकाबला चतुकोष्णीय बना रखा है। जहां, हल्की सी चूक भी किसी पर भारी पड़ सकती है। विस से वर्ष 2002 व 2007 में भाजपा और 2012 व 2017 में कांग्रेस जीत चुकी है। विधानसभा में राज्य निर्माण के बाद अभी तक हुए चुनावों में इस बार सबसे अधिक 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिसमें कम्युनिष्ट माक्र्सवादी पार्टी के राजाराम सेमवाल, बसपा से श्याम लाल चंद्रवाल, उक्रांद से गजपाल रावत, सपा से बद्रीश, पीपूल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटी से मनोज कुमार, निर्दलीय देवेश नौटियाल, रेखा देवी, कुलदीप सिंह और सूरत सिंह भी शामिल हैं।
संक्षिप्त इतिहास
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद नए परिसीमन के तहत केदारनाथ विस 2002 में अस्तित्व में आई। 2002 व 2007 में भाजपा की आशा नौटियाल विधायक चुनी गई। जबकि 2012 में कांग्रेस से शैलारानी रावत व 2017 में मनोज रावत विधायक चुने गए।
मतदाता
कुल - 89829
पुरूष - 44125
महिला - 51607
स्थानीय मुद्दे
जून 2013 की केदारनाथ आपदा से प्रभावित गौरीकुंड का विकास, स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च शिक्षा का विस्तार, दूरस्थ गांवों को सड़क, संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बैंक सुविधा से जोड़ना, आपदा प्रभावित गांवों का विस्थापना व प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्य।
इन दावेदारों के बीच मुकाबला
मैंने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में जनता के बीच में रहकर काम किया है। 160 ग्राम पंचायत को ग्राम पुस्तकालय से जोड़ा गया है। साथ ही खेल मैदानों का निर्माण हो रहा है। मेरा प्रयास नई पीढ़ी को किताब व खेल से जोड़ने का रहा, जिससे आने वाले दिनों में उनका भविष्य बेहतर हो सके। पूरे गढ़वाल क्षेत्र में कांग्रेस का एकमात्र विधायक था। लेकिन भाजपा सरकार से मुझे किसी भी स्तर पर सहयोग नहीं मिला। यहां तक कि मेरे क्षेत्र के अस्पतालों के लिए जो उपकरण खरीदे जाने थे, उन पर स्वास्थ्य मंत्री ने रोक लगा दी।
- मनोज रावत, कांग्रेस प्रत्याशी
जनता ने मुझे मौका दिया तो केदारनाथ अपदा से प्रभावित गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। प्राचीन मठ-मंदिरों व रमणीक स्थलों को विकसित कर तीर्थाटन, पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया हो सके। विस क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करुंगी।
- शैलारानी रावत, भाजपा प्रत्याशी
भाजपा-कांग्रेस ने बारी-बारी से जनता को छलने का काम किया है। जनता मुझे मौका देती है तो क्षेत्र में जनसुविधाओं को विकसित करना मेरी प्राथमिकता होगी। स्वरोजगार व रोजगार के लिए वृहद खाका तैयार किया जाएगा। जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा के लिए धरातल पर काम किए जाएंगे।
- कुलदीप रावत, निर्दलीय प्रत्याशी
भाजपा और कांग्रेस ने सिर्फ वोटबैंक की राजनीति को बढ़ावा दिया है। जनहितों की अनदेखी कर केदारनाथ विस में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, जिसका खामियाजा यहां की जनता भुगत रही है।
- सुमंत तिवारी, आप प्रत्याशी