जिस सेना के कायल थे अंग्रेज, वो आज पहचान को मोहताज
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सरहदों को लांघ कर विदेशी भूमि पर वीरता का परचम लहराने वाले उत्तराखंड़ के वीरों के सम्मान के लिए जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा नसीब नहीं हो रहा है।
देहरादून में प्रस्तावित स्टेट वार मेमोरियल सियासी घोषणाओं में सिमट कर रह गया है। देश को सर्वाधिक सैनिक देने वाले राज्य की सरकार चंद एकड़ भूमि शहीदों के लिए नहीं दे पाई है।
तीन बार भूमि चिन्हित हुई लेकिन उसके लिए या तो एनओसी नहीं मिली या फिर सरकार ने अन्य योजनाएं के लिए इस्तेमाल कर लिया। अब एक बार फिर सरकार ने भूमि चिन्हित करने के बजाए एक कमेटी बनाने का फैसला लिया है।
इस सेना के अंग्रेज भी कायल थे
उत्तराखंड का समृद्ध सैन्य इतिहास है। एकमात्र ऐसा राज्य है जिसके रणबांकुरों की जांबाजी के अंग्रेज भी कायल थे। ब्रिटिश काल के सर्वोच्च सैन्य सम्मान विक्टोरिया क्रास से तीन उत्तराखंड के सैनिक सम्मानित है जो किसी अन्य क्षेत्र में नहीं हुआ।
गढवाल और कुमाऊं रेजिमेंटों का गठन यहां के शूरवीरों के युद्ध कौशल के चलते हुआ। आजादी के बाद हर युद्ध में उत्तराखंड के वीरों ने सरहद पर दुश्मनों के दांत खट्टे किये।
अब तक लगभग 1350 सैनिक विभिन्न युद्धों में शहीद हुए हैं। अकेले कारगिल में राज्य से 74 सैनिक शहीद हुए हैं, जिसके बाद वार मेमोरियल की परिकल्पना उभर कर आई। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय वार मेमोरियल के निर्माण के लिए एक करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की थी।
भूमि चिन्हीकरण में बरती कोताही
वार मेमोरियल के लिए भूमि चिन्हीकरण शुरू से विवादस्पद रहा है। राज्य सरकार ने अपनी तरफ से भूमि देने के बजाए गढ़ी कैंट चीड़बाग में ए 1 श्रेणी की भूमि सेना से मांगी, लेकिन रक्षा मंत्रालय से अनुमति नहीं मिली।
इसके बाद न्यू कैंट रोड हाथीबड़कला में भूमि चिन्हित हुई। यह भूमि सर्वे आफ इंडिया की थी लिहाजा इसकी एनओसी नहीं मिल पाई।
तीसरी बार 2013 राज्य सरकार ने पुरानी जेल परिसर में एक एकड़ भूमि वार मेमोरियल के लिए चिन्हित कर घोषणा कर दी, लेकिन उसकेबाद यह भूमि मेडिकल कालेज निर्माण के लिए दे दी गई।
यह होगा वार मेमोरियल में
स्टेट वार मेमोरियल में राज्य के आजादी से पूर्व और बाद के हुए सभी शहीदों का नाम अंकित होगा। मोर्चे पर लड़े अहम युद्धों का उल्लेख किया जाएगा।
सैनिकों की वीरगाथाओं पर एक म्यूजियम बनाया जाएगा, जिसमें शहीदों के अदम्य साहस को झलकाते दस्तावेज रखे जाएंगे। भारतीय सेना से भी इसमें सहयोग लेने का प्रस्ताव है। सैन्य इतिहास को उजागर करते हुए एक पुस्तकालय स्टेट वार मेमोरियल का हिस्सा है।
फिर कमेटी बनाने के आदेश
राज्य सरकार ने वार मेमोरियल के लिए भूमि चयन हेतु फिर एक कमेटी बनाने के आदेश दिए हैं। चयन करने वाली कमेटी में पूर्व सैन्य अधिकारियों, विभागीय सचिव सहित संबंधित जिले के डीएम और सैनिक कल्याण निदेशक को रखा गया है। यह कमेटी भूमि का चयन कर सरकार को रिपोर्ट देगी।
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-aruneshp@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 9675812459 पर संपर्क कर सकते हैं।)