फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand An uproar over non-removal of promotion

उत्तराखंडः प्रमोशन पर रोक हटाने न हटाने को लेकर छिड़ा घमासान

Thu, 21 Nov 2019 08:51 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 21 Nov 2019 08:51 AM IST
विज्ञापन
uttarakhand An uproar over non-removal of promotion
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

प्रदेश सरकार के विभागों में पदोन्नतियों पर रोक हटाने और रोक बरकरार रखने को लेकर घमासान तेज हो गया है। दोनों संगठन प्रमोशन को लेकर तीखे तेवर दिखा रहे हैं।

विज्ञापन


एक तरफ उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन तत्काल रोक हटाने की मांग कर रही है तो दूसरी ओर उत्तराखंड एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन तब तक कोई डीपीसी न करने की मांग कर रही है जब तक न्यायालय से अंतिम फैसला नहीं हो जाता है। 
विज्ञापन

 
विभागों में पदोन्नति पर से तत्काल रोक हटाए सरकार : एसोसिएशन

उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन ने सभी विभागों में पदोन्नतियों पर लगाई गई रोक को तत्काल हटाने की मांग की है। इस मांग को लेकर एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को प्रदेश सचिवालय में अपर मुख्य सचिव (कार्मिक एवं सतर्कता) राधा रतूड़ी से मिला और उनसे अनुरोध किया कि वे पदोन्नतियों में लगी रोक हटाने के निर्देश जारी करें।
विज्ञापन
विज्ञापन


एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी और प्रदेश महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसांई के नेतृत्व में अपर मुख्य सचिव से मिले प्रतिनिधिमंडल ने उच्च न्यायालय के 15 नवंबर को आए न्यायिक आदेश की प्रति भी सौंपी। मांग के समर्थन में उन्होंने कहा कि एक अप्रैल 2019 को ज्ञानचंद बनाम राज्य व अन्य में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने सभी विभागों में विभागीय पदोन्नतियों पर रोक लगा दी थी। लेकिन एक अप्रैल को पारित उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई।

इस याचिका पर 15 नवंबर को उच्च न्यायालय ने पूर्व के निर्णय को संशोधित किया है। इससे अब कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को 11 सितंबर को पदोन्नतियों में लगाई गई रोक का कोई औचित्य नहीं रह गया है। प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव से उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में पदोन्नतियों पर लगी रोक तत्काल हटाने और एक नियत अवधि के अंदर आरक्षण के बगैर विभागीय पदोन्नतियां किए जाने के आदेश करने का अनुरोध किया।

जोशी के मुताबिक, अपर मुख्य सचिव ने एसोसिएशन की बातों को बहुत गंभीरता से सुना। जोशी ने उम्मीद व्यक्त की कि सरकार पदोन्नतियों पर लगी रोक हटाकर नए सिरे से पदोन्नतियां किए जाने का आदेश जल्द जारी करेगी। प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय सचिव विनोद नौटियाल, एसोसिएशन के सीएल असवाल, वीके धस्माना, मुकेश बहुगुणा, हीरा सिंह बसेड़ा, शांतनु शर्मा, मुकेश रतूड़ी, शिव राज, रीता कौल, डॉ. गार्गी मिश्रा, केके उनियाल, मुकेश रतूड़ी, डीएस सरियाल, राजेंद्र सिंह चौहान, नरेंद्र भट्ट समेत कई अन्य कर्मचारी नेता शामिल थे।

मामला न्यायालय में, रोक नहीं हटा सकती सरकार: फेडरेशन

उत्तराखंड एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन ने प्रमोशन पर लगी रोक हटाने पर कड़ा विरोध करने की चेतावनी दी है। फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जब तक न्यायालय से कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता है, तब तक प्रदेश सरकार प्रमोशन पर लगी रोक नहीं हटा सकती है। 

उन्होंने कहा कि ज्ञानचंद बनाम उत्तराखंड सरकार व अन्य में उच्च न्यायालय ने एक अप्रैल 2019 के पारित आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर जो फैसला दिया है, उसमें पूर्व के पारित निर्णय को निरस्त नहीं किया गया है। आदेश को थोड़ा मोडीफाइ किया गया है। इसमें सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वो सरकारी नौकरियों में एससी व एसटी कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व का आंकड़ा तैयार करे।

इसके लिए सरकार ने चार माह का समय दिया ह। इसके अलावा स्वयं सरकार उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में गई है। उसने 15 नवंबर को पारित उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली एक और पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है।

ऐसे में जब पूरा प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है, तो सरकार कैसे पदोन्नतियों पर रोक हटा सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए और न्यायालय के अंतिम फैसले का संयम से इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है और समय पर मिलने पर उनके समक्ष तर्कसंगत पक्ष रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल

प्रदेश सरकार ने ज्ञानचंद बनाम उत्तराखंड व अन्य के मामले में 15 नवंबर को पारित आदेश को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल वंशजा शुल्का ने बताया कि मंगलवार को ही एसएलपी फाइल कर दी गई थी। अब बृहस्पतिवार को प्रयास करेंगी कि 25 नवंबर को लग जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed