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उत्तराखंड: राज्य आंदोलनकारी बाबा बमराड़ा का निधन, चंदा लेकर करना पड़ा अंतिम संस्कार

Mon, 19 Feb 2018 10:59 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 19 Feb 2018 10:59 PM IST
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Uttarakhand agitator Baba Bamrada passes away
Baba Bamrada

राज्य आंदोलनकारी बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा (80 वर्षीय) का लंबी बीमारी के बाद रविवार रात निधन हो गया। पिछले डेढ़ साल से दून अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मूल रूप से पौड़ी जनपद निवासी बमराड़ा न सिर्फ राज्य गठन आंदोलन में कई बार भूख हड़ताल पर रहे बल्कि राज्य गठन के बाद भी गैरसैंण स्थाई राजधानी को लेकर संघर्षरत रहे।

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चंदा लेकर उनका अंतिम संस्कार किया गया। दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि वाहन में तेल के लिए उनकी ओर से एक हजार रुपये दिए गए। वही हरिद्वार में कर्मकांड के लिए शहर कोतवाल बीडी जुयाल ने दो हजार रुपये अपनी जेब से दिए।
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 बाबा बमराड़ा राज्य आंदोलन के दौरान कई बार भूख हड़ताल पर रहे। वे इस बात से दुखी थे कि जिन उद्देश्यों को लेकर अलग राज्य का गठन हुआ और आंदोलनकारियों ने शहादतें दीं, वो राज्य गठन के 17 साल बाद भी पूरे नहीं हो सके। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने बताया कि लंबी बीमारी के बावजूद पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार ने उनकी सुध नहीं ली।
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वे युवाओं के पहाड़ से बढ़ते पलायन को लेकर चिंतित थे। वे उन आंदोलनकारियों में से थे जो अलग राज्य गठन की मांग को लेकर 1994 से पहले से आंदोलनरत थे। उत्तराखंड कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक एवं पूर्व राज्य मंत्री धीरेन्द्र प्रताप ने भी उनके निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि बमराड़ा ने अपना पूरा जीवन राज्य आंदोलन को समर्पित कर दिया।

राज्य आंदोलनकारियों को नहीं मिल पाई सूचना

Uttarakhand agitator Baba Bamrada passes away
दून अस्पताल

आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने अंतिम दिनों में भी उनकी सुध नहीं ली। वहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी, महासचिव रामलाल खंडूड़ी, मोहन सिंह रावत, राकेश नौटियाल, ओमी उनियाल, अंबुज शर्मा, सुलोचना भट्ट, राकेश थपलियाल, विजयेश नवानी, जीतपाल बड़थ्वाल, पूर्ण सिंह लिंगवाल, संजय पुंडीर, भानू रावत, योगेश भट्ट, रविंद्र जुगरान, यशवंत रावत, चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे सहित विभिन्न आंदोलनकारियों और संगठनों ने उनके निधन पर शोक जताया है।

राज्य आंदोलनकारियों को नहीं मिल पाई सूचना
प्रदीप कुकरेती ने बताया कि बमराड़ा को भूख न लगने संबंधित दिक्कतें थी। लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। कहा कि उनके निधन की आंदोलनकारियों को भनक नहीं लग पाई। कहा कि प्रशासन की ओर से आनन फानन में उनका शव हरिद्वार ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
 

अंतिम संस्कार के लिए शव को हरिद्वार ले जाने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट ने दून अस्पताल की ओर से वाहन की व्यवस्था करने को कहा, लेकिन नियमानुसार अस्पताल से वाहन नहीं दिया जा सकता, ऐसे में उन्होंने किसी अन्य अस्पताल से वाहन की व्यवस्था करा उसे तेल के लिए एक हजार रुपये दिए। जबकि शहर कोतवाल ने कर्मकांड के लिए दो हजार रुपये एवं तहसीलदार की ओर से भी कुछ धनराशि दी गई।
-डा.केके टम्टा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक दून अस्पताल
 

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