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उत्तराखंड: 12 IAS अधिकारियों ने दाखिल नहीं किया अचल संपत्ति का ब्योरा, बढ़ सकती है परेशानी

Mon, 18 Jun 2018 10:16 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 18 Jun 2018 10:16 PM IST
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Uttarakhand 12 IAS officers not submit real immovable property

राज्य के 12 आईएएस अधिकारियों ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की वेबसाइट पर अचल संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध नहीं कराया है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले आईएएस अधिकारी उमाशंकर पंवार का नाम भी इस सूची में शामिल है।

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भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के नियमों के मुताबिक देश के हर आईएएस अफसर को अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन फाइल करना होता है। इसके लिए डीओपीटी की वेबसाइट पर सभी को लॉग इन की सुविधा दी जाती है। जिस वर्ष का रिटर्न या घोषणा पत्र दाखिल करना होता है, उसके लिए वर्ष समाप्ति के बाद एक माह का वक्त दिया जाता है। यानी वर्ष 2017 के घोषणापत्र को 31 जनवरी तक दाखिल करना होता है।
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ऐसा न होने की दशा में भारत सरकार संबंधित अधिकारी का केंद्र में इनपैनलमेंट (सूचीबद्धता) नहीं करती है। इसके चलते केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में तमाम कठिनाइयां आती हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और 1986 बैच के आईएएस अधिकारी एस.रामास्वामी और उन्हीं के बैच के डॉ.रणवीर सिंह ने अपनी अचल संपत्तियों का ब्योरा डीओपीटी को ऑनलाइन दाखिल नहीं किया है।

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Uttarakhand 12 IAS officers not submit real immovable property
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ये दोनों अधिकारी राज्य के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारियों में शुमार हैं। इनके अलावा इस सूची में वर्ष 1992 बैच के राकेश कुमार, वर्ष 2005 बैच के रंजीत सिन्हा, इसी बैच से आने वाले जिलाधिकारी देहरादून एसए मुरुगेषन, वर्ष 2006 बैच के आशीष जोशी और सुशील कुमार, वर्ष 2007 बैच के नीरज खैरवाल और उनकी पत्नी व वर्ष 2009 बैच की आईएएस अधिकारी ज्योति नीरज खैरवाल, वर्ष 2010 बैच की सोनिका, वर्ष 2013 बैच के सुनीत कुमार और वर्ष 2015 बैच के निखिल खंडेलवाल के नाम भी शामिल हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेवानिवृत्ति के करीब आने वाले कई अधिकारी अचल संपत्ति का ब्योरा दाखिल करने से परहेज करने लगते हैं, पर नए अधिकारियों को इसका ध्यान रखना चाहिए। भारत सरकार में सूचीबद्धता न होने की दशा में उन्हें भविष्य में तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ सकती हैं।

समय से रिटर्न फाइल करने संबंधी पत्र पूर्व में जारी किया गया था, जिसमें ऑनलाइन रिटर्न न दाखिल करने वाले अधिकारियों को विजिलेंस क्लियरेंस न देने की बात कही गई थी। उक्त अधिकारियों ने रिटर्न क्यों नहीं फाइल किया, यह दिखवाया जाएगा।
- उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव


 

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