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उत्तराखंड: धैर्य की परीक्षा लेंगे 100 भूस्खलन क्षेत्र, चारधाम यात्रा मार्ग पर 40 से अधिक सक्रिय

Wed, 04 May 2022 08:27 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 04 May 2022 08:27 AM IST
सार

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंबा से लेकर धरासू के बीच 12 से अधिक डेंजर जोन सबसे बड़ी चुनौती हैं। कंडीसौड़ के निकट रोमलगांव धार में भूस्खलन जोन सक्रिय है। तीन साल से सक्रिय चिन्यालीसौड़ (नगुण) के पास दूसरा बड़ा डेंजर जोन है।

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Uttarakhand: 100 landslide areas will test patience more than 40 active on Chardham Yatra route
चारधाम यात्रा यात्रा मार्ग में हैं संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला- फाइल फोटो

विस्तार

चारधाम की यात्रा करने जो श्रद्धालु इस बार दो-तीन साल के बाद आ रहे हैं, उनके लिए ऑलवेदर रोड पर सैर का अनुभव निसंदेह सुखद होगा। लेकिन पहले से कम घुमावदार, अधिक चौड़े हो चुके इस मार्ग पर 40 से अधिक ऐसे स्थान हैं, जो भूस्खलन (लैंड स्लाइड) की संभावना के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। ये एक्टिव लैंड स्लाइड जोन यात्रियों के धैर्य की परीक्षा लेंगे। सरकारी तंत्र के लिए भी ये लैंड स्लाइड जोन सबसे बड़ी चुनौती हैं। इस समाधान के लिए अभी तक हो रहे उपाय नाकाफी माने जा रहे हैं।

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गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंबा से लेकर धरासू के बीच 12 से अधिक डेंजर जोन सबसे बड़ी चुनौती हैं। कंडीसौड़ के निकट रोमलगांव धार में भूस्खलन जोन सक्रिय है। तीन साल से सक्रिय चिन्यालीसौड़ (नगुण) के पास दूसरा बड़ा डेंजर जोन है। यहां गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग कई दफा बाधित हो चुका है। बडे़थी से धरासू बैंड के डेंजर जोन क्षेत्र में निर्माण की गति धीमी है। यहां तीन किलोमीटर के दायरे में डेंजर स्थिति वाले पांच से अधिक स्थान हैं।

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यात्रा करना दुश्वार कर देते हैं ये लैंड स्लाइड जोन

गढ़वाल परिक्षेत्र में तोताघाटी, तीन धारा, सिंगटाली, नरकोटा, सिरोबगड़, बांसबाड़ा, ओजरी, कालाडूंगी सक्रिय लैंड स्लाइड जोन हैं। यहां यात्रा करना कई बार दुश्वार हो जाता है। टिहरी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर आठ बेहद खतरनाक सक्रिय लैंड स्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं। पौड़ी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-58 दो, रुद्रप्रयाग में राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर तीन और राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर 14 बड़े लैंड स्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं। इसमें से कुछ पर पीडब्ल्यूडी तो कुछ पर टीएचडीसी काम कर रहा है।

बदरीनाथ की राह में डेंजर जोन की अड़चनें

बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 14 स्थानों पर डेंजर जोन यात्रा की राह में अड़चन पैदा कर देते हैं। इनमें कमेड़ा, चडुवा पीपल, कालेश्वर, लंगासू, बैडाणू, देवलीबगड़, नंदप्रयाग, मैठाणा, कुहेड़, बिरही चट्टान, भनारपानी, हेलंग, सेलंग, लामबगड़ डेंजर जोन प्रमुख हैं।

यमुनोत्री एनएच में भी दो बड़े डेंजर जोन

यमुनोत्री धाम को जोडने वाले धरासू बैंड यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का भी यही हाल है। धरासू बैंड से लेकर सिलक्यार के बीच दो बड़े डेंजर जोन हैं। सड़क की हालत भी बदहाल है। डाबरकोट भूस्खलन जोन का भी ट्रीटमेंट नहीं हुआ है। पालीगाड़ से फूलचट्टी तक सड़क पर गड्ढ़े भरने की गति धीमी है। इस क्षेत्र में भी चार बड़े डेंजर जोन हैं, जो हल्की बारिश में सक्रिय हो जाते हैं।

चारधाम मार्ग पर बड़े लैंडस्लाइड जोन

टिहरी में अटालीगंगा होटल के समीप, होटल ताज के निगट सिंगटाली, कौड़ियाला पानी गदेरा के निकट, महादेव चट्टी, तोताघाटी, तीनधारा, देवप्रयाग तहसील के निकट, मूल्यागांव, पौड़ी में फरासू और चमधार, रुद्रप्रयाग में जवाड़ी बाईपास के निकट, नरकोटा, सिरोबगड़, डीएफओ ऑफिस के निकट, बांसवाड़ा में दो जगह, काकड़ागाड़, सेमी बैंड, देवीधार, ब्यूंगाड़ खुमेरा, खुमेरा (खाट), खाट, जामू, चंडिकाधार, कालाडूंगी, मुनकटिया, वाड़ा, चुन्नी बैंड, मस्तुरा, उत्तरकाशी में धरासू, छटांगा, सिलाई बैंड, ओजरी, खराड़ी, किसाला में दो जगह और पालीगाड़ में बेहद खतरनाक लैंडस्लाइड जोन सक्रिय हैं।

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14 सालों से सक्रिय है सिरोबगड़ डेंजर जोन

श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच बदरीनाथ हाईवे पर सिरोबगड़ डेंजर जोन पिछले 14 वर्षों से सक्रिय है। इस डेंजर जोन से मुक्ति पाने के लिए ऑलवेदर के तहत जिन पुलों का निर्माण होना था, वह निर्माण अभी अभी पूरा नहीं हुआ है।

केदारनाथ मार्ग पर डेंजर जोन

केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बासवाड़ा, बडासू, डोलिया देवी के पास डेंजर जोन हैं। इसके अलावा गैरीकुंड को जोडने वाली पांच किलोमीटर की सड़क भी बेहद ही संकरी है।

चारधाम यात्रा मार्ग सुगम और सुरक्षित यात्रा के लिए पहले से बहुत अच्छी स्थिति में है। कुछ स्थानों पर लैंड स्लाइड जोन सक्रिय हैं, उनका उपचार चल रहा है। लोनिवि, बीआरओ और सभी कार्यदायी एजेंसियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि यात्रा मार्ग पर यदि भूस्खलन से मार्ग प्रभावित होता है, तो उसे तत्काल खोला जाए। सभी अधिकारियों को इस संबंध में पहले से निर्देश जारी किए जा चुके हैं। सभी से अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
- आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, लोनिवि।

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