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आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील उत्तराखंड में बड़े नुकसान का सबब ना बन जाए ऊंची इमारतों का ख्वाब
Tue, 09 Feb 2021 03:46 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 09 Feb 2021 03:46 PM IST
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भूकंप (सांकेतिक फोटो)
- फोटो : iStock
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प्रदेश में ऊंची इमारतों का ख्वाब बड़े नुकसान का सबब बन सकता है। राज्य सरकार भवनों की अधिकतम ऊंचाई बढ़ाने की तैयारी कर रही है। हालांकि विशेषज्ञ इस फैसले से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार, आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील राज्य में ऊंची इमारतों से नुकसान बढ़ सकता है। विशेषकर भूकंप से होने वाले नुकसान में इजाफा हो सकता है। इसलिए वे ऐसा कोई फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं की समीक्षा करने पर जोर दे रहे हैं।
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अभी प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकतम नौ मीटर और मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम 12 मीटर ऊंचे भवन ही बनाए जा सकते हैं। लेकिन राज्य सरकार के स्तर पर इनकी ऊंचाई बढ़ाने की तैयारी चल रही है। संशोधित बिल्डिंग बायलॉज का प्रस्ताव शासन के पास है, जिस पर जल्द फैसला हो सकता है। संभावना है कि सरकार भवनों की अधिकतम ऊंचाई में बढ़ोत्तरी करे।
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अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अधिकतम ऊंचाई अलग-अलग हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि उत्तराखंड जैसे भूगर्भीय दृष्टि से बेहद सक्रिय राज्य में भूमि के भीतर प्लेटों का मूवमेंट चलता रहता है, जिससे निकट भविष्य में बड़ा भूकंप आ सकता है। ऐसे में यहां भवनों की ऊंचाई बढ़ाने का फैसला बैकफायर भी कर सकता है।
कई बड़े संस्थान कर चुके आगाह
प्रदेश में बड़े भूकंप की आशंका को लेकर देश के कई बड़े संस्थान पहले ही आगाह कर चुके हैं। बंगलूरू के जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च, आईआईटी कानपुर और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक कई बार सार्वजनिक रूप से भी इसकी आशंका व्यक्त कर चुके हैं। उनका कहना है कि भूगर्भीय तनाव के कारण कई इलाकों में नियमित तौर हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि पिछले करीब 500 वर्षों से आठ या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप नहीं आया है, लेकिन यह कभी भी आ सकता है।
सभी पहलुओं का हो विस्तृत अध्ययन
उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से जोन चार और पांच में है। यहां कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है। भवनों की ऊंचाई बढ़ाने से पहले सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन होना चाहिए। इसके लिए सरकार की ओर से कमेटी गठित की जाती है। इस कमेटी की रिपोर्ट इस फैसले में अहम साबित हो सकती है।
- कालाचांद साई, निदेशक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी
भूकंप के बाद सबसे ज्यादा नुकसान भवनों के गिरने से होता है। जोन चार और पांच में स्थित उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आया तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। हमको अभी से इसके लिए एहतियातन उपाय करने चाहिए। अधिक ऊंचे भवनों के साथ खतरा बढ़ सकता है।
-प्रो. एमपीएस बिष्ट, निदेशक, उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र