अपहरण मामले में यूपी के दो पूर्व मंत्रियों सहित दस आरोपी दोषमुक्त, सीजेएम कोर्ट ने सुनाया फैसला
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बहुचर्चित बिजनौर यूपी के जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के मामले में आरोपी यूपी के दो पूर्व मंत्रियों सहित सभी दस लोगों के खिलाफ आरोप साबित न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सिंह की अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
मामला लक्ष्मणझूला थानाक्षेत्र का जनवरी वर्ष 2013 का है। प्रकरण जिला पंचायत अध्यक्ष बिजनौर के उपचुनाव से जुड़ा है। यूपी के पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान व पूर्व मंत्री एवं वर्तमान में नगीना से सपा विधायक मनोज पारस सहित दस लोगों पर 28 लोगों के अपहरण का आरोप था।
उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के लिए 21 जनवरी वर्ष 2013 को उप चुनाव होना था। चुनाव से चार दिन पूर्व जिला बिजनौर के नियामतपुर निवासी रोहित कुमार ने अपने पिता और तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य पवन कुमार सहित 28 लोगों के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।
17 जनवरी 2018 की रात लक्ष्मण झूला थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में उसने कहा कि बिजनौर यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के लिए होने वाले उप चुनाव के लिए विजय गिरी और पूर्व जिप अध्यक्ष नसरीन की ओर से नामांकन कराया गया था।
48 में से 38 गवाह पेश किए गए
जिला पंचायत की अध्यक्ष रही नसरीन को विजय गिरी की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटाया गया था। अविश्वास प्रस्ताव के बाद नसरीन सैफी बसपा छोड़ सपा में शामिल हो गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी सपा के मंत्री, सांसद, जिला अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी जिला पंचायत के सदस्यों पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में मतदान कराना चाहते हैं। आरोपियों ने 17 जनवरी की रात ढाई बजे लक्ष्मण झूला स्थित शिवा रिजॉर्ट में घुसे और जिला पंचायत सदस्यों से मारपीट कर उनका अपहरण किया।
आरोप लगाया कि तीन से चार पुलिस की जीप और 40 अन्य वाहनों के साथ आए आरोपी सदस्यों को जबरन अपनी गाड़ी में ले गए। जिनका अपहरण हुआ उनमें चार महिलाएं और दो युवतियां भी शामिल थी।
पुलिस की ओर से मामले में दस लोगों को आरोपी बनाया गया। मामले की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सिंह की अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन की ओर से 48 में से 38 गवाह पेश किए गए। सहायक अभियोजन अधिकारी श्रद्धा रावत ने बताया कि आरोप साबित न होने पर अदालत ने सभी को बरी कर दिया।
इन्हें बनाया गया था अपहरण का आरोपी
जिस घटनास्थल की बात की जा रही थी मैंने वे स्थान आज तक नहीं देखा, इस तरह का मुकदमा दर्ज कराकर हमारी छवि खराब करने का प्रयास किया गया, हमें अदालत से न्याय मिला है।
-मूलचंद चौहान, पूर्व मंत्री यूपी
राजनीतिक षड़यंत्र के तहत हमारे खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था। इससे हमारी राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। सामाजिक एवं राजनीतिक व्यक्तियों पर इस तरह केस दर्ज नहीं किया जाना चाहिए
-मनोज पारस, विधायक नगीना एवं पूर्व मंत्री