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जाड़े में बिजली नहीं जलाएं बायो हीटर
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:39 AM IST
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जाड़े के मौसम में प्रदूषण को नियंत्रित रखने और ऊर्जा की खपत कम करने के लिए बायो हीटर का इस्तेमाल करें।
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इसमें चीड़ की पत्तियों (पेरुल) से बने ब्रीकेट का इस्तेमाल होता है, जिससे धुआं नहीं निकलता और माहौल भी गर्म हो जाता है। जीबी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट ने एक बायो हीटर तैयार किया है। प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में बिजली की जगह इस बायो हीटर का इस्तेमाल किए जाने के संबंध में इंस्टीट्यूट ने शासन को पत्र भेजा है।
जीबी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट के रूरल टेक्नोलॉजी विभाग ने बायो हीटर तैयार किया है। इसके लिए विभाग आसपास के गांवों की महिलाओं से पेरुल की विभिन्न प्रकार की ब्रीकेट भी तैयार करवा रहा है। इससे ग्रामीणों को रोजगार के साधन उपलब्ध हो रहे हैं।
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इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. डीएस रावत ने बताया कि सरकारी दफ्तरों में बायो हीटर इस्तेमाल किए जाने की अल्मोड़ा में शुरुआत हो गई है। अब यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू किए जाने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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डॉ. रावत ने बताया कि पूरे प्रदेश में ग्रामीणों को ब्रीकेट्स बनाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ब्रीकेट्स जलाने पर धुआं नहीं होता है। चीड़ की पत्तियों से जंगल में आग का खतरा रहता है। इसे आजीविका से जोड़ा जा रहा है। इससे पेरुल की पत्तियों की खपत होगी। लोगों को रोजगार मिलेगा और जंगल में आग का खतरा भी कम होगा।
वन और ऊर्जा के बीच अटकी योजना
पेरुल से बिजली बनाने की शासन की योजना वन और ऊर्जा विभाग के बीच लटक गई है। पहल करने के लिए कोई विभाग तैयार नहीं है। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में यह तय हुआ था कि वन विभाग पेरुल उपलब्ध कराएगा और ऊर्जा विभाग कंपनियों से बात करके परियोजनाएं शुरू करेगा। लेकिन किसी विभाग ने शुरुआत नहीं की।
अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी का कहना है कि पेरुल देने के संबंध में निर्णय हो चुका है। प्रमुख सचिव ऊर्जा उमाकांत पंवार का कहना है कि विभाग सिर्फ ऊर्जा खरीदेगा। वन विभाग बिजली बनवाकर दे तो विभाग खरीद लेगा।