खतरे में जिंदगियां: हर दिन सिस्टम को कोसते हैं इस गांव के लोग,अपने घर छोड़ दूसरे स्थानों पर शरण लेने की मजबूरी
अधिकारियों की टाल मटोल के कारण आज टिहरी और देहरादून जिले के बॉर्डर पर स्थित काला मोडा गांव पर आपदा खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन देहरादून और टिहरी जिले के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। जब कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने गांव का निरीक्षण किया तो ग्रामीणों ने उन्हें यह समस्या बताई।
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प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान के लिए कहीं न कहीं हमारा सिस्टम भी जिम्मेदार होता है। अगर समय से खतरे को भांपते हुए व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया जाए तो कई लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकता है। लेकिन, हमारे अधिकारी शायद इतनी मेहनत नहीं करना चाहते हैं।
अधिकारियों की टाल मटोल के कारण आज टिहरी और देहरादून जिले के बॉर्डर पर स्थित काला मोडा गांव पर आपदा खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, देहरादून और टिहरी जिले के बॉर्डर पर स्थित काला मोडा गांव में पहले कई परिवार रहते थे। लेकिन, पिछले दिनों आई आपदा के कारण इन परिवारों को काफी नुकसान पहुंचा। जिससे अधिकांश परिवारों ने अपनी जान बचाने के लिए दूसरे स्थानों पर शरण ले ली है। अब यहां मात्र एक ही परिवार बचा हुआ है।
इस पूरे गांव से ग्रामीणों के पलायन का एक कारण यह भी है कि यहां गांव के ऊपर पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पानी आता है। जिससे सुरक्षा के लिए गांव के पास दीवार बनाई गई है। लगातार पानी के दबाव के कारण इस दीवार पर दरार आ गई है। जिससे यह दीवार कभी भी टूट सकती है और मलबा व पानी गांव को बहा सकता है।
मंत्री ने किया आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण
इस संबंध में ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन देहरादून और टिहरी जिले के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। बृहस्पतिवार को जब कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने गांव का निरीक्षण किया तो ग्रामीणों ने उन्हें यह समस्या बताई।
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जिस पर मंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को फोन पर निर्देश दिए कि दो दिन के अंदर इस दीवार की मरम्मत की जाए। उधर मंत्री ने आपदा प्रभावित अन्य गांवों का भी निरीक्षण किया और ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। साथ ही अधिकारियों को फोन पर जल्द से जल्द समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए।