उत्तराखंड: हड़ताल पर प्रदेश के 24 हजार कर्मचारी, आज इमरजेंसी सेवाएं भी रहेगी ठप
समान कार्य के लिए समान वेतन सहित अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर उपनल कर्मचारी महासंघ से जुड़े प्रदेश के 24 हजार कर्मचारी सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल पर चले गए। इससे विभिन्न विभागों में सेवाएं बुरी तरह से लड़खड़ा गई हैं। इसका सबसे अधिक असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा।
दून मेडिकल कॉलेज में पंजीकरण, बिलिंग, सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्सरे, पैथोलॉजी सेवाएं ठप रहीं। महासंघ ने हड़ताल के मंगलवार को आपातकालीन सेवाएं भी ठप रखने का एलान किया है।
प्रदेश भर में उपनल कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से राजकीय अस्पताल कोरोेनेशन, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, दून मेडिकल कॉलेज देहरादून, राज्य संपत्ति विभाग के अतिथि गृह, विधायक आवास, सरकारी वाहन सेवाओं पर हड़ताल का सबसे अधिक असर दिखा।
दून मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद रहा। मरीजों को होने वाली परेशानी को देखते हुए बाद में स्थायी स्टाफ तैनात कर मरीजों के हस्तलिखित पर्चे बनाए गए। इसमें बहुत अधिक समय लगने से अस्पताल में मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहीं। अस्पताल में बिलिंग भी बंद रही। बिलिंग न होने से मरीजों को जांच कराए बगैर लौटना पड़ा।
यही हाल मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के काउंटरों का रहा। अस्पतालों में आने वाले मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। दून महिला अस्पताल में सुबह बिलिंग काउंटर खुला था, लेकिन हड़ताली कर्मचारियों ने अस्पताल पहुंचकर इसे बंद करा दिया। परेड ग्राउंड में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि सोमवार को अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं संचालित रहीं, लेकिन मंगलवार को इसे भी बंद करा दिया जाएगा।
ये हैं महासंघ की लंबित मांगें
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक सिंह चौहान ने कहा कि मंगलवार को कर्मचारी शहर में रैली निकालकर डीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन देंगे, जबकि शाम को कनक चौक होते हुए लैंसडौन चौक तक कैंडल मार्च निकाला जाएगा। प्रदर्शनकारियों में संरक्षक भावेश जगुड़ी, हेमंत रावत, राकेश, ज्योति, अभिनव जोशी, विनोद गोदियाल, विद्या सागर धस्माना, दिनेश रावत, महेश भट्ट, कुशाग्र जोशी, रमेश रावत और हरीश कोठारी शामिल रहे।
कर्मचारी वर्ष 2014 से लंबित मांगों को लेकर समय-समय पर आंदोलन करते रहे हैं। वर्ष 2016 में पहले 19 और फिर 21 दिन की हड़ताल के बाद सरकार ने सात वर्ष की सेवा वाले कर्मियों को विभागीय संविदा पर रखने का शासनादेश जारी किया था, लेकिन कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिला। अब भाजपा सरकार ने अपने एजेंडे में उपनलकर्मियोें को सौ दिन के भीतर सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक वेतन देने का वादा किया था, इस पर भी कुछ नहीं हुआ। -दीपक सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, उपनल कर्मचारी महासंघ
ये हैं महासंघ की लंबित मांगें
- समान कार्य के लिए समान वेतन या न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये की जाए
- जिन पदों पर उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, उन पदों को सृजित किया जाए
- कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए नियमावली बनाई जाए
उक्रांद ने उपनलकर्मियों को दिया समर्थन
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने उपनल कर्मियों के आंदोलन को समर्थन देने का एलान किया है। उक्रांद के महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने कहा कि सरकार को उपनलकर्मियों की समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग पर अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपनल कर्मियों के समर्थन में 10 जनवरी को जिला मुख्यालय में प्रदर्शन कर धरना दिया जाएगा।