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Uttarakhand: दो मंत्रालयों की रस्साकसी से पंचायतों के उद्धार की योजना फंसी, अभी तक जारी नहीं हो पाया फरमान

Fri, 12 May 2023 01:20 PM IST
रेनू सकलानी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 12 May 2023 01:20 PM IST
सार

पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज की इच्छा के आगे सरकार को झुकना पड़ा। मगर शासन स्तर से इस संबंध में अभी तक कोई फरमान जारी नहीं हो पाया है। नतीजा यह है कि खुद पंचायती राज विभाग भी इस योजना को लेकर अंधेरे में है। 

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Upliftment scheme of 7950 gram panchayats of state got stuck between two ministries Uttarakhand
मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश सरकार के दो मंत्रालयों की रस्साकसी से राज्य की 7950 ग्राम पंचायतों के उद्धार की योजना फंस गई है। पूरे उत्साह और तेजी के साथ योजना का रोडमैप तैयार करने में जुटे ग्राम्य विकास विभाग से यह महत्वाकांक्षी योजना वापस लेकर इसे पंचायती राज विभाग को देने का निर्णय ले लिया गया।

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माना जा रहा है कि पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज की इच्छा के आगे सरकार को झुकना पड़ा। मगर शासन स्तर से इस संबंध में अभी तक कोई फरमान जारी नहीं हो पाया है। नतीजा यह है कि खुद पंचायती राज विभाग भी इस योजना को लेकर अंधेरे में है। एक योजना जिस पर अभी तक काम शुरू हो जाना चाहिए था, उसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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सामूहिक मांग पर आधारित योजना

ग्राम पंचायत संतृप्तीकरण योजना जन आकांक्षाओं और सामूहिक मांग पर आधारित है। यानी ग्रामसभाओं में ग्रामीणों के सहयोग से पंचायतों के अपने क्षेत्रीय संसाधनों और जरूरतों के हिसाब से दीर्घ और अल्पकालिक योजनाएं बनेंगी, जिन पर केंद्र और राज्य सरकार पोषित योजनाओं, जिला योजना व अन्य योजनाओं के माध्यम से तब तक कार्य होगा, जब तक वे पूरी नहीं हो जातीं। इस ग्राम विकास महायोजना के तहत एक से अधिक ग्राम पंचायतों के समान संसाधन, प्रकृति, उपजों और कौशल विकास पर आधारित कार्य के क्लस्टर तैयार किए जाएंगे, जिनमें विपणन की व्यवस्था भी होगी। योजना का मुख्य ध्येय स्थानीय जरूरत के हिसाब से प्रत्येक पंचायत के विकास का अपना मॉडल तैयार करना है।

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यहां फंस गया पेच

ग्राम्य विकास विभाग ने इस योजना को बनाने का बीड़ा उठाया। विभागीय स्तर पर एक सर्वे कराया गया, जो तकरीबन अंतिम दौर में भी है। सूत्रों का कहना है कि इस योजना में ग्राम विकास अधिकारी सबसे प्रमुख कड़ी है, लेकिन सभी पंचायतों में यह पद ही नहीं है। इसकी कमी को पूरा करने के लिए तय हुआ कि ग्राम विकास अधिकारी का पद नहीं है, वहां पंचायती राज विभाग ग्राम पंचायत अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दे। इसी पर विवाद हो गया और मसला दो मंत्रालयों के बीच की तनातनी में तब्दील हो गया। पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज के दखल के बाद योजना पंचायती राज विभाग के सुपुर्द करने का निर्णय हो गया। तब से योजना ठंडे बस्ते में है।

नियोजन विभाग से भी मिल गई थी हरी झंडी

ग्राम्य विकास विभाग के स्तर पर तैयार की गई योजना को नियोजन विभाग से भी कुछ सुझाव के साथ मंजूरी मिल गई थी। अब योजना पर काम शुरू होना था।

अब इस योजना पर ग्राम्य विकास विभाग काम नहीं कर रहा है। यह योजना पंचायती राज विभाग को दे दी गई है। - गणेश जोशी, मंत्री, ग्राम्य विकास

मुख्य सचिव स्तर पर हुई बैठक में निर्णय हो चुका है कि इस योजना पर पंचायती राज विभाग काम करेगा। योजना के संबंध में सभी जिलों का सर्वे पूरा हो चुका है। हरिद्वार और कुछ हिमाच्छादित क्षेत्रों की सर्वे रिपोर्ट नहीं आ पाई है। -डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, सचिव, ग्राम्य विकास

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पंचायती राज विभाग को शासन से अभी योजना के संबंध में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे ही निर्देश प्राप्त होंगे, योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। - आनंद स्वरूप, निदेशक, पंचायती राज निदेशालय

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