राम मंदिर पर बोले सीएम योगी आदित्यनाथ, सुप्रीम कोर्ट ने 50 मिनट में निपटा दिया 500 साल पुराना विवाद
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उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के हक में फैसला इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया है। कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला जनभावनाओं के अनुकूल है। श्री राम मंदिर निर्माण के लिए 500 साल पुराने विवाद पर 50 मिनट में माननीय उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया।
फैसले के बाद लोगों ने जिस तरह से देश भर में शांति और सौहार्द बनाया उसके प्रति वह आभार जताते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. स्वामीराम ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक शिक्षाओं और आदर्शों से रूबरू कराया। वे बुधवार को हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटल ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. स्वामीराम के महासमाधि दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे।
इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत के आध्यात्म ने ही वसुदेव कुटुंब्कम का स्वरूप दुनिया को दिखाया। स्वामीराम ने विश्वशांति और मानव कल्याण के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
डॉ. स्वामीराम लोक कल्याण की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अध्यात्म के माध्यम से लोगों को लोक कल्याण का मार्ग दिखाया। हिमालय के संत स्वामीराम ने पूरी दुनिया को नई दिशा देने का काम किया।
स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज को मरणोपंरात डॉ. स्वामीराम मानवता पुरस्कार
हिमालय से निकलने वाली पवित्र नदियां जहां लोक कल्याण का काम करती हैं वहीं यह भूभाग को उर्वरा शक्ति प्रदान करती हैं। इससे उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश मिलकर समूचे देश के लिए खाद्यान्न की पैदावर कर सकते हैं। कहा कि ऋषिकेश, हरिद्वार से लेकर गंगा सागर तक मां गंगा की निर्मलता के कारण ही धाम बने हैं।
योगी आदित्यनाथ ने भारत माता मंदिर हरिद्वार के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज को मरणोपंरात डॉ. स्वामीराम मानवता पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज ने ग्रहण किया। पुरस्कार के तहत प्रशस्ति पत्र और पांच लाख की धनराशि दी गई।
साथ ही स्वामीराम हिमालयन विश्वविद्यालय समेत राज्य के 2158 निर्धन और मेधावी छात्र-छात्राओं को 13 करोड़ की छात्रवृत्ति प्रदान की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने कुलपति डॉ. विजय धस्माना और महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी को प्रयागराज कुंभ-2019 पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।
स्वामी सत्यमित्रानंद ने 1973 में की थी भारत माता मंदिर की स्थापना
मूलत: सीतापुर उत्तरप्रदेश के निवासी स्वामी सत्यमित्रानंद ने बाल्यकाल में ही संयास ले लिया था। उनके पिता शिव शंकर पांडेय राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किए गए थे। स्वामी जी ने 1973 में हरिद्वार में भारत माता मंदिर की स्थापना की।
इसके अलावा 65 से अधिक देशों का भ्रमण किया। 26 वर्ष की आयु में ज्योतिर्मठ भानपुरा पीठ पर जगदगुरु शंकराचार्य पद पर उन्हें प्रतिष्ठित किया गया। नौ वर्षों तक धर्म और मानव सेवा की। 2015 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार मिला। 87 वर्ष की आयु में 25 जून 2019 को उन्होंने शरीर त्याग दिया।
इन्हें मिला बेस्ट इम्प्लॉई अवॉर्ड
इस दौरान बेस्ट टीचर डॉ. दीपशिखा, बेस्ट क्लीनिशियन डॉ. सागर मोदी, बेस्ट पैरा-क्लीनिकल इम्प्लॉई अवॉर्ड मनीष कुमार, डिन्नी पॉल, अमित चमोली, गजेंद्र सिंह नेगी, प्रवीण सिंह रावत, बेस्ट नॉन क्लीनिकल इम्प्लॉई अवार्ड राजेश चमोली, अनूप कुमार शाही, उमराव सिंह रावत, महेश सिरोही, देवपाल सिंह सिंधवाल, सूरत सिंह रावत, सुनील कुमार सिंह, गुरमीत सिंह, सीताराम, धर्मपाल, सुभाष कुमार, बेस्ट आरडीआई इम्प्लॉई अवार्ड लीला उनियाल, स्पेशल अवार्ड एमएम माथवान के अलावा कर्मचारी आनंद सोलंकी, अमीचंद, अशोक और सत्यप्रकाश को बेस्ट इम्प्लॉई अवॉर्ड सम्मानित किया गया।