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उत्तर प्रदेश का खराब चावल उत्तराखंड में खपाया

Sun, 10 Sep 2017 03:38 PM IST
हरीश पांडे / अमर उजाला, हल्द्वानी
हरीश पांडे / अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sun, 10 Sep 2017 03:38 PM IST
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up bad quality rice used in uttarakhand
मिल में रखा चावल

उत्तराखंड में खराब चावल घपले के बीज धान की खरीद से ही जुड़े हुए नजर आ रहे हैं। एक ही दिन में हजारों क्विंटल धान की खरीद से भी यह संदेह गहरा रहा है। 

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बताया तो यहां तक जा रहा है कि इसमें चावल मिलों और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की मिलीभगत भी रही। अब स्टेट पूल के कमलुवागांजा गोदाम से निकल रहा खराब चावल भी इस मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।
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नैनीताल जिले में धान की पैदावार बहुत कम होती है। ऊधमसिंह नगर में कृषि जमीनों में कॉलोनी कटने से कृषि रकबा कम हुआ है। इसके बावजूद हल्द्वानी मंडी की धान की आवक  हर साल नए रिकार्ड कायम कर रही है। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सिर्फ 31 जनवरी 2017 को मंडी में 32354 क्विंटल धान खरीदा गया। इसी तरह, ऊधमसिंह नगर की बगवाड़ा मंडी में 31 जनवरी 2017 को 26510 क्विंटल धान की खरीद हुई। ये आंकड़े सिर्फ दो दिन के हैं। ये खरीद सिर्फ एक दिन की ही है। 
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सूत्रों की मानें तो यह सभी खरीद सिर्फ कागजों में की गई है। उत्तराखंड में जितना धान खरीदा गया, उतना धान उत्तराखंड में होता ही नहीं है। ऊधमसिंह नगर और नैनीताल की मिलों ने उत्तर प्रदेश से छनने के बाद निकला हुआ टूटा, डैमेज और बदरंग चावल खरीदा और विभाग की मिलीभगत से इस चावल को उत्तराखंड में खपा दिया गया। 

यही चावल है जो स्टेट पूल के कमलुवागांजा गोदाम से अब बांटा जा रहा है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद इस चावल की जांच हुई तो अधिकतर सैंपल फेल पाए गए। हद तो यह हुई कि मामला सामने न आने तक फेल चावल के सैंपलों को भी पास किया जा रहा था। 

 
वे सवाल जो अनुत्तरित हैं
- एक दिन में की गई खरीद की क्या वीडियो रिकार्डिंग हुई है।
- क्या नियमानुसार किसानों के धान की बोली की गई है।
- इतना धान एक ही दिन में खरीदने के लिए मजदूर कहां से आए।
- इतने अधिक संख्या में वाहनों की आवाजाही मंडी में कैसे हुई
- क्या मंडी में इतना अधिक धान रखने और उसकी बोली कराने के लिए पर्याप्त जगह और कर्मचारी हैं।

हल्द्वानी मंडी में कालाढूंगी में बने यार्ड में धान खरीद होती है। यहां बहुत कम जगह है। इतना धान वहां आ नहीं सकता। मेरा तबादला अभी हाल में हल्द्वानी मंडी में हुआ है। इसकी मुझे जानकारी नहीं है कि इतना धान यहां आया कैसे।
- विश्वविजय सिंह देव, मंडी सचिव हल्द्वानी

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