Unlock 6.0 in Uttarakhand: दूसरे दिन स्कूलों में छात्रों की संख्या में हुआ थोड़ा इजाफा, 9वीं और 11वीं कक्षाएं भी हों शुरू
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देहरादून जिले में दूसरे दिन स्कूलों ने छात्रों की संख्या में थोड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है। नारी शिल्प कन्या इंटर कॉलेज में कल 10वीं व 12वीं कक्षा में कुल 17 छात्राएं पहुंची थी, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 22 तक पहुंच गई। वहीं, एसजीआरआर रेसकोर्स में कल सिर्फ 03 छात्र पहुंचे थे, जबकि आज 05 छात्र पहुंचे। ऐसे ही कई स्कूलों में भी छात्रों की संख्या आंशिक रूप से बढ़ी है।
सहमति पत्र न लाने वालों को लौटाया
कई स्कूलों ने अभिभावकों द्वारा हस्ताक्षरित सहमति पत्र साथ न लाने पर उन्हें लौटा दिया। नारी शिल्प कन्या इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल मंजू रावत ने कहा कि आज एक छात्र को सहमति पत्र न लाने पर घर भेजा गया है। कई अन्य स्कूलों में भी मामले सुनने को मिले हैं। स्कूलों का कहना है कि सरकार से स्पष्ट निर्देश हैं कि अभिभावकों की अनुमति के बिना छात्रों को स्कूल नहीं बुलाया जा सकता।
कई शर्तों पर बोर्डिंग स्कूलों को एतराज, फंसा पेंच
देहरादून जिले में निजी स्कूल तो खुलने शुरू हो गए, लेकिन बोर्डिंग स्कूलों को लेकर पेंच फंसा नजर आ रहा है। सरकार द्वारा जारी एसओपी की कई शर्तों पर बोर्डिंग स्कूल संचालकों ने सवाल खड़े किए हैं। अधिकांश संचालकों ने फिलहाल बोर्डिंग स्कूलों को खोलने से हाथ खींच लिए हैं।
बोर्डिंग स्कूल संचालकों का कहना है कि एसओपी में नियम है कि बोर्डिंग स्कूलों में स्टाफ के रहने की व्यवस्था परिसर में ही हो। उन्हें घर न भेजा जाए। यह समझ से परे है। कहा कि कई बोर्डिंग स्कूल ऐसे भी हैं जहां स्टाफ के रहने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रातों-रात आवासीय सुविधा मुहैया नहीं कराई जा सकती है। इसके अलावा छात्रों के बेड के बीच में अस्थायी फ्रेम लगाने की शर्त को भी गैरजरूरी है। यही वजह है कि बोर्डिंग स्कूल जल्दबाजी में नहीं हैं।
बोर्डिंग स्कूलों को खोलने को लेकर कई शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं। एसओपी में बोर्डिंग स्कूलों में स्टाफ को परिसर में ही रहने को कहा जा रहा है, जबकि स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी बाहर से आते हैं। उन्हें घर जाने की छूट है। यह अलग-अलग नियम क्यों हैं। इस संबंध में शासन व सरकार को भी शिकायत से अवगत कराया है। स्कूल संचालकों को शिकायत का समाधान करने का आश्वासन दिया है।
-प्रेम कश्यप, अध्यक्ष, प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन
छात्र-छात्राओं ने शिक्षा मंत्री के समक्ष रखी मांग
प्रदेश में 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल खुलने के बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने मंगलवार को वर्चुअल क्लासरूम के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों और स्कूल प्रिंसिपलों के साथ बातचीत की। बच्चों ने मांग की कि 9वीं और 11वीं के छात्र-छात्राओं के लिए भी स्कूल खोले जाएं। इस पर शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया।
शिक्षा मंत्री ने 500 वर्चुअल क्लासरूम युक्त स्कूलों के प्रिंसिपल, शिक्षकों और छात्रों से बातचीत किए जाने के साथ ही सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सुना। अल्मोड़ा की एक छात्रा ने बताया कि स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है, लेकिन स्कूल से घर जाने के दौरान रास्ते में काफी भीड़ रहती है। इस पर शिक्षा मंत्री ने पुलिस महानिदेशक को स्कूल की छुट्टी के दौरान रास्ते में भीड़भाड़ न हो इसके लिए आवश्यक व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। कुछ बच्चों ने स्कूल में शिक्षकों की कमी की समस्या से भी अवगत कराया।
शिक्षा मंत्री ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे भयमुक्त होकर स्कूल आएं और सुरक्षा के लिए शासन की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। इस दौरान मंत्री ने स्कूल समय, फर्नीचर, पेयजल व्यवस्था, ऑनलाइन पढ़ाई, पाठ्यक्रम एवं अटल उत्कृष्ट स्कूलाें की भी समीक्षा की।