हरिद्वार: पतंजलि पहुंचे केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, कहा पहले योग अब शिक्षा से बनाएंगे नया भारत
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देश की शिक्षा प्रणाली में बड़े परिवर्तन की जरूरत है। शिक्षा मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। योग और आयुर्वेद से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने सराहनीय कार्य किया है।
ये बातें केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने रविवार को पतंजलि योगपीठ की ओर से संचालित आचार्यकुलम के वार्षिकोत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहीं।
जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार देश की जरूरतों के मद्देनजर शिक्षा में व्यापक परिवर्तन के लिए प्रयासरत है। स्कूली शिक्षा अच्छी होगी तभी देश की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। पीएम नरेंद्र मोदी के विजन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सबका साथ सबका विकास का नारा लेकर काम कर रहे हैं।
इस नारे को तभी साक्षात किया जा सकता है, जब सबकी शिक्षा एक समान हो। इस दिशा में प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने आचार्यकुलम की शिक्षा पद्धति को सराहते हुए स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के राष्ट्र निर्माण के विजन को सराहा।
इससे पहले आचार्यकुलम के निदेशक एलआर सैनी ने उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर सीबीएसई की हाईस्कूल परीक्षा में आचार्यकुलम की ओर से शीर्ष रैंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया।
स्वामी रामदेव ने मैकाले की शिक्षा पद्धति पर उठाए सवाल
आचार्यकुलम की प्राचार्या वंदना मेहता और जाह्नवी के निर्देशन में आचार्यकुलम के छात्र-छात्राओें ने महर्षि दयानंद के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ‘वेदों की ओर लौट चलो’ की प्रस्तुति दी। साथ ही योग नृत्य के माध्यम से योग की क्रियाएं प्रस्तुत की। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने सभी को मोहित कर दिया।
आचार्यकुलम के वार्षिकोत्सव में स्वामी रामदेव ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की स्थापना के अपने संकल्प को फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि मैकाले ने हमारी प्राचीन वैदिक शिक्षा पद्धति को बदल दिया था। आज हम सबका दायित्व है कि मैकाले की शिक्षा पद्धति के स्थान पर वैदिक शिक्षा पद्धति की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास, पाखंड और जाति मुक्त भारत का सपना सबसे पहले महर्षि दयानंद ने देखा था।
उन्होंने ही हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दिलाई। उनके आदर्शों पर चलते हुए वेदों कोे आधार बनाकर हमें शिक्षा पद्धति में सुधार करना है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने स्वामी दयानंद सरस्वती को याद करते हुए कहा कि वह ऐसे योद्धा संन्यासी थे, जिन्होेंने सच्चे शिव को पाने और मृत्यु के रहस्य को जानने के लिए घर त्याग दिया था। महर्षि दयानंद ने गुरुकुलीय परंपरा की नींव रखी। इस गुरुकुलीय परंपरा को बचाने की जिम्मेदारी अब हमारे ऊपर है।