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ऐसा क्यों कहा हरीश, देखो गरमा गई ना सियासत

अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 24 Oct 2013 04:39 PM IST
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Union Minister Harish Rawat's statement heating politics

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हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़ने के प्रति केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत के ढुलमुल रवैए के बाद हरिद्वार कांग्रेस की राजनीति गरमा गयी है। अनेक नेताओं के चेहरे जहां खिल उठे हैं, वहीं भाजपा में भी नया जोश आ गया है।
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हरीश के बयान के बाद कांग्रेस में ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी खेमा एकाएक सक्रिय हो उठा है। हरिद्वार के सांसद हरीश रावत के बयान को हालांकि राजनीतिक पंडित उनकी राजनीति का ही हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन ब्रह्मचारी खेमा इसका फायदा उठाने के मूड में है।
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दो खेमे अलग-अलग चलते आ रहे
गौरतलब है कि हरिद्वार में उत्तराखंड बनने के बाद से ही हरीश रावत और ब्रह्मचारी के दो खेमे अलग-अलग चलते आ रहे हैं। जैसे ही हरीश रावत ने रास्ते से हटने का ऐलान स्वयं किया, वैसे ही ब्रह्मचारी खेमा अचानक ही बेहद सक्रिय हो उठा।

इस घटनाक्रम के बाद हरिद्वार के सियासी समीकरण भी नए सिरे से बनने बिगडने शुरु हो गए हैं। वहीं भाजपा भी हरीश के बयान के बाद नई संभावनाओं को तलाशने में जुट गई है।

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देहरादून और दिल्ली तक सक्रिय
ब्रह्मचारी के तमाम सिपहेसालार जहां हरिद्वार से लेकर देहरादून और दिल्ली तक सक्रिय हो उठे, वहीं स्वयं ब्रह्मचारी ने भी हरीश के बयान के बाद अपनी राजनैतिक पकड़ के आधार पर कांग्रेस आलाकमान से बातचीत शुरु कर दी है।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की ओर से वर्तमान विधायक मदन कौशिक का दावा टिकट के लिए सबसे मजबूत माना जा रहा है। जबकि डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, स्वामी चिन्मयानंद आदि अनेक अन्य नेता भी हरिद्वार के सियासी मूड को भांप रहे हैं।

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उमा पहले ही जता चुकी दिलचस्पी

चार माह पूर्व संघ के शीर्ष नेताओं ने जिस प्रकार उमा भारती के नाम पर विचार-विमर्श शुरु किया था, उससे लग रहा था कि एनवक्त पर उमा को भी हरिद्वार से लड़ाया जा सकता है। इस सीट पर दिलचस्पी स्वंय उमा पहले ही जता चुकी है।

ऐसे में कांग्रेस की ओर से कद्दावर हरीश रावत के रास्ते से हटने के ऐलान के बाद अब मदन और निशंक खेमे समेत अन्य नेताओं में भी इस सीट को लेकर दिलचस्पी बढ़ती दिख रही है।

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राजनीति नया मोड़ लेगी
दिल्ली में बैठे अपने राजनैतिक आकाओं के माध्यम से दोनों खेमे यह बताने में जुटे हुए हैं कि हरीश रावत के जाने का फायदा केवल स्थानीय भाजपा नेता ही उठा सकते हैं। हरीश रावत यदि वास्तव में हरिद्वार से चुनाव न लड़े तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की राजनीति नया मोड़ लेगी यह निश्चत है।
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