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आम बजट से बाजार को बड़े बदलाव की उम्मीद

Wed, 01 Feb 2017 11:09 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 01 Feb 2017 11:09 AM IST
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Union Budget expectation
- फोटो : file photo

आम बजट-2017 से बाजार को बड़े बदलाव की उम्मीद है। लोग लुभावने के बजाय सुधारवादी बजट की आस लगाए हैं। उनका मानना है इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बचत होगी और महंगाई पर भी अंकुश लगेगा।

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वित्त मंत्री अरुण जेटली से इस बजट को लेकर बहुत अधिक उम्मीदें हैं। यह बजट बेहद महत्वपूर्ण है। नोटबंदी के फैसले से एक बात साफ हो गई है कि अब हम बैंक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ेंगे। इसलिए बैंक में रखा धन उत्पादक कार्यों में लगेगा। सरकार को आयकर सीमा बढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही 80 सी में मिलने वाली छूट की सीमा डेढ़ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख कर देना लाभदायक होगा। इससे अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी।
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- संजय मित्तल, आर्थिक व वित्त मामलों के विशेषज्ञ

बजट से बाजार को बहुत उम्मीदें हैं। सरकार को चाहिए कि वह जीएसटी को कड़ाई से लागू करे। आयकर समेत अन्य करों के ढांचे में छूट बेहद आवश्यक है। इससे लोगों के हाथ में पूंजी आएगी और बचत व निवेश का चक्र बढ़ेगा। वित्त मंत्री से उम्मीद है कि वह बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाएंगे। लुभावने बजट वाले सिद्धांत पर चलना नुकसानदायक होगा। बजट में सूक्ष्म व लघु सेक्टर के हित के बारे में भी सोचना चाहिए।
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- पंकज गुप्ता, वित्तीय व बाजार पेशेवर 

इस बजट से आम जन को बहुत उम्मीदें हैं। इस समय अर्थव्यवस्था की गति कमजोर है। उसको ताकत प्रदान करना बेहद जरूरी है। किसान, मजदूर, बेरोजगार परेशान हैं। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि व प्राथमिक सेक्टर के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता। इसलिए इस क्षेत्र पर बहुत बल देने की दरकार है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे, बैंकों के एनपीए, किसानों, बेरोजगारों पर ध्यान केंद्रित करने की दरकार है। 
- नासिर हुसैन, वित्तीय पेशेवर व जानकार

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को ताकतवर बनाने की आवश्यकता है। मेक इन इंडिया नारे को मूर्त रूप देने की जरूरत है। बजट ऐसा हो, जिससे नए उद्यमियों को बल मिले, न कि सिर्फ बड़े समूहों पर केंद्रित नीति हो। जो भी नीति घोषित हो वह स्पष्ट हो और लालफीताशाही समाप्त की जाए। नीति घोषित करने के साथ ही उसके क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जाए। इसके लिए व्यवहारिक प्रणाली विकसित करने की जरूरत है। 
- अनिल मारवाह, फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के उद्यमी

वित्त मंत्री अरुण जेटली से जादूगरी और क्रांतिकारी फैसलों की उम्मीद है। मोदी सरकार बहुत बड़े और कड़े फैसले ले सकने में सक्षम है। पर्सनल टैक्स स्लैब में भारी तब्दीली की दरकार है। इससे बाजार में जबरदस्त तेजी आएगी चूंकि लोगों की आय बढ़ेगी। फिलहाल हमारा आयकर ढांचा उदार नहीं कहा जा सकता। इसलिए इनकम टैक्स स्लैब जितना अधिक लिबरल होगा उससे उपभोग में तेजी आएगी। उपभोग बढ़ेगा तो अर्थव्यवस्था खुद ब खुद गतिशील होगी। दूसरे मैन्यूफैक्चरिंग को ऊर्जा व प्रोत्साहन देने से रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। विशेषकर एमएसएमई सेक्टर को विशेष पैकेज की आवश्यकता है। - सुधीर कुमार अरोड़ा, प्रबंधन विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री व उद्यमी 

आज जो बजट पेश होगा उससे देश की दिशा तय होगी। यह बजट रोजगारपरक होना ही चाहिए। इस समय मुल्क में रोजगार की कमी और इसकी सबसे अधिक दरकार है। इसलिए सैद्धांतिक जोड़ तोड़ से कहीं बेहतर होगा रोजगार बनाने वाली नीति बनाना। टैक्स स्लैब को उदार बनाना ही होगा। पांच लाख तक की आय पर इनकम टैक्स माफ हो जाना चाहिए। इससे होने वाली बचत उपभोग बढ़ाएगी और निवेश बढ़ेगा। फिर वरचुएस साइकल का जन्म होगा। जितने भी मैक्रो वैरिएबल्स हैं उनके केंद्र में रोजगार होना चाहिए। एमएसएमई सेक्टर को बढ़ाना होगा।
- प्रो. वीए बौड़ाई, वरिष्ठ अर्थशास्त्री

आज आने वाले बजट से बहुत उम्मीदें हैं। सरकार को तीन साल होने वाले हैं। मोदी सरकार को चुने जाने के पीछे लोगों की बड़ी आकांक्षा काम कर रही थी। वे भ्रष्टाचार मुक्त शासन व रोजगार के आकांक्षी थे। इसलिए वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजट रोजगार बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा पैदा करने और आर्थिक तौर पर समावेशी होना चाहिए। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक से अधिक धन आवंटित होना चाहिए। सरकार को मेक इन इंडिया और रीबिल्ड इंडिया पर सबसे अधिक फोकस करना चाहिए। मैन्यूफैक्चरिंग व इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को ताकत मिलेगी तो रोजगार की बारिश होगी। नोटबंदी से आर्थिक विकास थमा है उस दशा को बदलने के लिए यह बड़ा हथियार है।
- विनीश माथुर, वित्त विशेषज्ञ

इस समय ज्वैलरी सैक्टर तमाम परेशानियां झेल रहा है। इसलिए हमें वित्त मंत्री से बहुत उम्मीद हैं। सरकार को जल्द से जल्द जीएसटी लागू करना चाहिए। इसका रेट स्ट्रक्चर बेहद तार्किक होना आवश्यक है। हद से हद तीन फीसदी तक ही हो तो ठीक रहेगा। इसके साथ ही हमें इंपोर्ट ड्यूटी के घटने की भी उम्मीद है। ऐसा होने से हमारे सेक्टर में मैन्यूफैक्चरिंग का उछाल आएगा। कारीगरों का रोजगार बढ़ेगा और हम मंदी से बाहर आ सकेंगे। सरकार को कुछ ऐसी बड़ी नीतिगत घोषणा करनी चाहिए जिससे छोटे उत्पादकों का कारोबार बढ़ सके। अन्यथा बड़ी तादाद में लोग रोजगार खो बैठेंगे।
- गुरदीप सिंह, महासचिव, उत्तराखंड ज्वैलर्स एसोसिएशन

केंद्र सरकार के आज आने वाले बजट से वित्तीय सेक्टर के पेशेवरों ने बहुत उम्मीद पाल रखी हैं। आयकर स्लैब में भारी बदलाव होना ही चाहिए। इससे लोगों की बचत बढ़ेंगी और उपभोग भी बढ़ेगा। इसके साथ ही कारपोरेट सेक्टर को अधिक से अधिक स्ट्मिूलेस देने की दरकार है। इससे नए नए कारोबार पैदा होंगे। इससे रोजगार बढ़ेगा और गरीबी भी कम होगी। इसलिए पेशेवर तबका बहुत उम्मीद पाले हुए है। जब आय बढ़ेगी और निवेश बढ़ेगा तथा बचत में इजाफा होगा तो स्वभाविक तौर पर मनी मार्केट को बहुत ताकत मिलेगी।
- रंजन वर्मा, शेयर बाजार विशेषज्ञ

अरुण जेटली के नए बजट से पब्लिशिंग व किताब ट्रेड ने काफी उम्मीदें पाल रखी है। इस समय हमारी बहुत अधिक दिक्कतें हैं। उन दिक्कतों को दूर किया जाना बेहद आवश्यक है। इसलिए तमाम दिक्कतों को दूर करने की आवश्यकता है। इससे इस क्षेत्र में अधिक से अधिक रोजगार के मौके पैदा होंगे। इस सेक्टर को अभी तक उपेक्षित ही रखा गया है जबकि हमारे प्रदेश में तो यहां बहुत रोजगार मिल सकते हैं। इसलिए बहुत काम करना होगा।
- रणधीर अरोड़ा, पुस्तक कारोबारी व प्रकाशक 

बैंकिंग सेक्टर पर बहुत बंदिशें हैं। इसलिए सरकार को बैकिंग सेक्टर को अधिक स्वायत्ता देने की आवश्यकता है। पहले हमें स्टैंडर्ड डिडक्शन पर छूट मिलती थी। उसको समाप्त कर दिया गया। अब दुबारा उसे शुरु करना होगा। इसके साथ ही सरकार को सामाजिक क्षेत्र में अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। सीनियर सिटीजन के लिए अलग से नीति बनानी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम होना चाहिए।
- जगमोहन मेंदीरत्ता, बैंक इंप्लाइज यूनियन के महासचिव 

नए बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा पर अधिक धनराशि बढ़ाए जाने की उम्मीद है। शिक्षा पर बजट का कम से कम छह फीसदी हिस्सा खर्च होना चाहिए। स्वास्थ्य व चिकित्सा पर सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत खर्च किया जाना आवश्यक है। इससे हमारे देश में स्वाभाविक तौर पर गरीबी दूर हो जाएगी। इसके साथ ही कृषि व कृषि से जुड़े क्षेत्र में भी ज्यादा से ज्यादा निवेश की उम्मीद है।

- पीयूष शर्मा-रिसर्च स्कॉलर

आम बजट से महिलाओं को खास उम्मीद है। महिलाओं को गैस सिलेंडर ही नहीं आटा, दाल, चावल, सब्जी सब कुछ सस्ता चाहिए। महिलाओं को कास्मेटिक आइटम सस्ता होने की भी उम्मीद है। 

रोज-रोज की जरूरत का सामान आटा, दाल तो कम से कम सस्ता होना चाहिए। जिस तरह से दाल की कीमत बढ़ रही है। गरीब लोग तो दाल खा ही नहीं पा रहे हैं। 
- ऊषा नवानी, गृहिणी

गैस सिंलेंडर के दाम घटने चाहिए। कम से कम रसोई कुछ तो सस्ती हो। गैस सिलेंडर भरवाना भी अब सिर दर्द बनता जा रहा है। 
- रोशनी कोठारी, गृहिणी 

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