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'शापित' हैं हिंदू, नहीं तो चुप नहीं रहतेः उमा भारती
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 03 Jan 2014 11:34 AM IST
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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती ने राज्य में अपनी 'छवि' को लेकर सफाई दी है।
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गंगा समग्र अभियान के तहत आयोजित गंगा चौपाल के दौरान उमा भारती ने कहा कि वो बांध विरोधी नहीं हैं। कुछ लोग मुझे बांध विरोधी बताकर दुष्प्रचार कर रहे हैं।
अपने शासनकाल में मैने स्वयं मध्य प्रदेश में बांध निर्माण करवाए हैं, लेकिन बांध निर्माण के दौरान स्थानीय धार्मिक स्थलों व मान्यताओं का पूरा ख्याल रखा गया।
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गंगा बचाने के लिए मुहिम
उन्होंने कहा कि गंगा का अस्तित्व है, तभी समाज है। गंगा को बचाने के लिए यह मुहिम चलाई जा रही है, जो गंगा की अविरल धारा की तरह देवभूमि से शुरू होकर गंगासागर तक पहुंचेगी।
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वर्ष 2014 गंगा वर्ष के तौर पर मनाया जाएगा, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि विकास की सोच को दरकिनार कर दिया जाए।
बल्कि गंगा के अस्तित्व व धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप ये कार्य हों। उन्होंने कहा कि बांध निर्माण में नदी की एक धारा को अविरल छोड़ दिया जाए, जिससे उसका अस्तित्व खतरे में न आए।
उमा ने हिंदू एकता का आह्वान करते हुए देश को सशक्त हाथों में देने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जड़ता का श्राप लगा है, जिससे इतना सब कुछ होने के बावजूद हम चुप हैं। लेकिन अब हमें इस जड़ता को तोड़ना होगा।
आपदा के दौरान सरकार पूरी तरह संवेदनहीन
केदारनाथ आपदा पर उमा ने कहा कि राज्य सरकार आपदा के दौरान पूरी तरह संवेदनहीनता दिखाई दी। 14 जून से ही पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई थी, तो क्यों यात्रा को समय पर रोका नहीं गया और क्यों केदारघाटी को खाली नहीं करवाया गया।
अब सरकार आपदा से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों से प्राप्त आर्थिक मदद का दुरुपयोग कर रही है। इस मुद्दे को लेकर 19 जनवरी को देहरादून में संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
28-29 जनवरी को होगा जागरण
भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने पूर्व संकल्प के अनुसार 28-29 जनवरी को गंगा की अविरलता के लिए धारी देवी में धार्मिक कार्यक्रम की घोषणा की है।
पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि पूर्व में मूर्ति शिफ्टिंग के विरोध व मंदिर के मूल स्थान की रक्षा के लिए महिलाओं ने जागरण का संकल्प लिया था, लेकिन अब केवल संकल्प पूरा करने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है।
उमा के मुताबिक 28 जनवरी से धारी देवी मंदिर में महिलाएं कपाट बंद होने तक भजन-कीर्तन करेंगी। 29 को सुबह दस बजे से फिर यही क्रम चलेगा और दोपहर एक बजे भंडारा होगा।