अब उत्तराखंड के विकास में उमा भारती लगाएंगी अड़ंगा!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड सरकार के लिए उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के सपने को हकीकत में बदलना अब और मुश्किल हो गया है।
गंगा पर बांधों के बनाने के विरोध में मुखर रहीं उमा भारती के पास अब केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय है। हालांकि इस मंत्रालय को खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी संभाल चुके हैं और रावत भी उस समय बांधों के विरोध में थे।
यह अलग बात है कि अब हरीश रावत बांधों के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे हैं। जून 2013 में आई केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखंड में नदियों पर बांध का सवाल उठ खड़ा हुआ था।
23 परियोजनाओं को निरस्त करने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पीएसआई के संस्थापक निदेशक रवि चोपड़ा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भागीरथी प्रस्तावित 24 में से 23 परियोजनाओं को निरस्त करने का सुझाव दिया है।
समिति का तर्क था कि बांध परियोजनाओं में मलवा नदी में ही डंप किया जा रहा है और इससे नदियों का तल ऊंचा होकर विनाश का कारण बन रहा है।
दूसरी ओर उमा भारती का विरोध गंगा का प्रवाह बनाए रखने को लेकर रहा है। उमा भारती का तर्क रहा है कि जल विद्युत परियोजनाओं में लंबी-लंबी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है और इससे नदी का प्रवाह बाधित हो रहा है।
बांधों के मामले में अड़ंगों का सामना करना होगा
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय मुख्य रूप से नदियों के जल संसाधन के रूप में नदियों पर नियंत्रण रखता आया है।
ऐसे में नदियों पर बांध बनाने में जल संसाधन मंत्रालय का कुछ हद तक हस्तक्षेप भी रहता आया है। जाहिर है कि प्रदेश सरकार को अब बांधों के मामले में जल संसाधन मंत्रालय के अड़ंगों का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, जल संसाधन मंत्री रहते हुए हरीश रावत ने नदियों केफ्लड जोन की मैपिंग, जल संग्रहण क्षेत्रों को बढ़ाने, मिट्टी का कटाव रोकने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग आदि पर जोर दिया था।
उमा भारती के सामने चुनौती
उमा भारती के सामने अब इन मामलों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। हालांकि केंद्रीय जल संसाधन मंत्री रहते हुए रावत इन सारे मामलों में उत्तराखंड को खास कुछ नहीं दे पाए थे।
पर बहुगुणा के मुख्यमंत्री रहते हुए रावत खुद इस बात से नाराज थे कि प्रदेश की मुख्य नदियों की सहायक नदियों पर थोक के भाव बांध बनाने की अनुमति दी जा रही है।
अब हरीश रावत खुद इस कोशिश में हैं कि बांधों का स्वीकृति मिले।