यूकेडी: जनभावना जुड़ी है पर वोट नहीं जोड़ पाई पार्टी, उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी
उत्तराखंड क्रांति दल ने चुनावी मैदान में अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति तैयार कर ली है।
क्षेत्रीय मुद्दों को धार देकर जनता के बीच पहुंच बढ़ाने और सभी 70 सीटों पर दम दिखाने की तैयारी है।
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उत्तराखंड अलग राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले उत्तराखंड क्रांति दल के साथ जनभावना तो जुड़ी है लेकिन दल वोट नहीं जोड़ पाया है। पार्टी के सामने आगामी विधानसभा चुनाव में जनभावनाओं को वोट के रूप में तब्दील करने की बड़ी चुनौती है। दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी के मुताबिक दल सभी 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा। चुनाव में क्षेत्रीय सरोकारों से जुड़े अन्य दलों के साथ चुनावी गठबंधन का विकल्प खुला रखा गया है।
प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले दल ने राज्य के ज्वलंत क्षेत्रीय मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाते हुए जनता के बीच पैठ मजबूत करने की रणनीति बनाई है। राज्य की जमीनों को बाहरी खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए कठोर कानून, कटऑफ वर्ष 1950 के आधार पर मूल निवास प्रमाणपत्र लागू करने एवं राज्य के संसाधनों और रोजगार में स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देने सहित कई मुद्दों को लेकर दल ने जनता के बीच जाने का निर्णय लिया है। दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती के मुताबिक दल के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इसके लिए प्रदेश भर का भ्रमण किया जाएगा।
दल के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी के मुताबिक उत्तराखंड की जनता के साथ उक्रांद का भावनात्मक रिश्ता रहा है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन जनभावनाओं को वोटों के रूप में तब्दील करने की है, इसके लिए संगठनात्मक स्तर पर मंथन किया जाएगा। पार्टी में गुटबाजी पर उन्होंने कहा, संगठन में विवाद उन लोगों की ओर से पैदा किया जा रहा था जो महज एक से डेढ़ साल पहले दल में शामिल हुए थे। अब वे लोग खुद ही दल से बाहर हो चुके हैं, जिससे पार्टी अब पूरी तरह एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार है। मूलनिवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया बताते हैं कि चुनाव में उन लोगों को टिकट दिया जाना चाहिए जो जनाधार वाले और गंभीर हों। पुरानी गलतियों को नहीं दोहराया जाना चाहिए।
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पार्टी मुझे निकालती मैं खुद बाहर हो गई : संतोष
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल महिला प्रकोष्ठ की केंद्रीय अध्यक्ष संतोष भंडारी के मुताबिक उन्होंने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले पार्टी निकालती वह खुद बाहर हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्रांद के कुछ लोग भाजपा की बी टीम के रूप में काम कर रहे हैं। जो हर साल हारने के लिए चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया जाएगा।