आपदा की दूसरी बरसी पर भी केदारधाम में मिले 'शव'
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जलप्रलय के दो साल बाद भी केदारनाथ धाम में नरकंकाल के रूप में शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को भी उदक कुंड के निकट सफाई के दौरान दो कंकाल मिले। पुलिस डीएनएन सैंपल के बाद बुधवार को इनका दाह संस्कार करवाएगी।
उदक कुंड केदार मंदिर से 50 मीटर दूर है। मालूम हो कि केदारघाटी में 16/17 जून 2013 की भीषण आपदा में बड़ी संख्या में लोग लापता हुए और मारे गए। कंकाल के रूप में अब तक लापता लोगों के शव मिलने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। खासकर विपक्ष इस मसले पर सरकार को घेर रहा है।
तीर्थ पुरोहित उदक कुंड के निकट सफाई कर रहे थे। इस दौरान उन्हें वहां दो कंकाल दिखे। एक कंकाल का पैर का हिस्सा और दूसरे कंकाल में हाथ का हिस्सा ही बचा रह गया था।
कंकाल के पास मिला पर्स, पुलिस करेगी खोजबीन
मालूम हो कि पिछले दिनों केदारनाथ में शवों का मसला काफी गरमाया रहा। 8 जून को केदारनाथ पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को कुछ तीर्थ पुरोहितों ने बहल आश्रम के पास एक कंकाल का पंजा दिखाया था।
तब निशंक ने केदारनाथ में मलबे में अब भी सैकड़ों कंकालों के दबे होने की बात कही। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानों का दौर चलता रहा।
सैकड़ों कंकाल हो सकते हैं केदारपुरी में
केदारनाथ में और कंकाल होने की आशंका शवों की तलाशी का अभियान बंद होने के बाद से ही जताया जाता रहा है। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित भी मान रहे हैं कि धाम में अब भी मलबे में सैकड़ों कंकाल या उनके अवशेष हो सकते हैं। आपदा के बाद से यहां निजी भवनों की सफाई नहीं हो पाई है। इन भवनों में भी कंकाल होने की आशंका है।
केदारनाथ नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश बगवाड़ी और केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना है कि धाम में आपदा के बाद पूरी सफाई नहीं हुई है। ऐसे में वहां पांच सौ से अधिक कंकाल हो सकते हैं।
भवनों में तबाही से पहले परिवार रात्रि विश्राम के लिए रुके हुए थे। शासन-प्रशासन मकान मालिकों को उनके मकानों की सफाई नहीं करने दे रहा।
बगवाड़ी का कहना है कि धाम में मौजूद भारी मशीनों से सफाई की जाए तो मंदिर परिसर से लेकर तीन किमी के दायरे में हर दस से बीस कदम पर कंकाल दबे मिल सकते हैं।
डीएम का कहना
केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के साथ उनके जर्जर भवनों को तोड़ने के लिए वार्ता चल रही है। अनुबंध के बाद ही प्रशासन इन भवनों में प्रवेश कर सकेगा और सफाई हो पाएगी। आपदा के बाद से निजी भवनों की सफाई नहीं हुई है। ऐसे में इनके अंदर या मलबे में कंकाल दबे होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इन कंकालों की संख्या सैकड़ों में भी हो सकती है।
-डॉ. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
निशंक ने सीएम पर बोला तीखा हमला
मैं मुख्यमंत्री की तरह कोरी बयानबाजी नहीं करता। केदारनाथ में नरकंकालों का मिलना साबित करता है कि ढंग से सफाई नहीं हुई। मकानों में दबे शवों को निकालने की कोशिश भी नहीं हुई। मैं फिर चुनौती दे रहा हूं कि वहां काफी नरकंकाल हैं। हरीश रावत इसे स्वीकार कर वहां तलाशी अभियान चलवाएं। या फिर इस्तीफा दें और जनता से माफी मांगें। जिन लोगों की जान गई है, उनके परिवारों का दर्द यह असंवेदनशील सरकार कैसे समझ सकती है।
-रमेश पोखरियाल निशंक, हरिद्वार सांसद
बाद में नहीं चला सघन अभियान
केदारनाथ आपदा के दो साल पूरे होने के दिन मंगलवार को दो कंकाल मिलने के बाद विपक्ष के इन आरोपों को और बल मिला है कि सरकार लापता लोगों को मृत मानकर चुप बैठ गई। एक बार भी वृहद स्तर पर शवों को खोजने का काम नहीं हुआ।
विपक्ष लगातार इस बात को उठाता रहा है। सड़क से सदन तक आपदा के मुद्दे गूंजते रहे। फिर भी 2014 ही नहीं 2015 में भी ठंड का मौसम समाप्त होने के बाद सघन अभियान चलाकर शवों को खोजने की कोशिश नहीं की गई।
हरीश रावत ने किया जवाबी पलटवार
सरकार ने यह दावा कभी नहीं किया कि सारे शव निकाल लिए गए हैं। जो भाजपा 2017 में प्रदेश में सत्ता में आने का सपना देख रही है, उसे इतना जरूर समझना चाहिए कि लाखों टन मलबा वहां है और इसे हटाने का कोई वैज्ञानिक तरीका अभी तक नहीं निकल सका है। कुछ भी करने से पहले जीएसआई की रिपोर्ट देखनी होगी। मलबा कैसे निकाला जाए और कैसे उसका निस्तारण हो, इसकी कोई तरकीब निशंक के पास हो तो हमें बताएं, हम तैयार हैं।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
स्पष्ट नहीं किसके हैं कंकाल
केदारनाथ में मिल रहे कंकालों को लेकर स्पष्ट कुछ नहीं कहा जा सकता है। तबाही के दौरान धाम में देश भर के के यात्रियों के अलावा केदारघाटी के विभिन्न गांवों के तीर्थ पुरोहित भी मौजूद थे।