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Dehradun News: दो आईटीआई को मिली स्वीकृति, खुला एक भी नहीं
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साहिया। वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने कालसी ब्लॉक साहिया और पजिटीलानी में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोलने की घोषणा की थी। स्वीकृति मिलने के बाद अधिकारियों ने आईटीआई की स्थापना के लिए स्थान का चयन किया था। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। करीब 19 साल बीतने के बाद भी क्षेत्र में आईटीआई नहीं खुल पाया है। छात्रों को पढ़ाई के लिए कालसी और विकासनगर जाना पड़ता है।
साहिया 100 से अधिक गांवों का केंद्र बिंदु है। वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी पजिटीलानी गांव में एक खेल प्रतियोगिता का शुभारंभ करने के लिए पहुंचे थे। यहां उन्होंने साहिया और पजिटीलानी में आईटीआई की स्थापना की घोषणा की थी। ग्राम प्रधान गंभीर सिंह राय, स्थानीय ग्रामीण रणवीर सिंह राय, महेंद्र सिंह, सुल्तान सिंह, जालम सिंह, कुंवर सिंह आदि बताया कि एक आईटीआई भवन के निर्माण के लिए ग्रामीणों ने कुरोली में एक एकड़ भूमि दान दी थी। भूमि विभाग के नाम पर ही है। बताया कि 19 साल बीत चुके हैं, लेकिन न आईटीआई का भवन बना और न ही कक्षाएं संचालित हो पाईं।
प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय के उपनिदेशक जेएम नेगी ने कहा कि मामला काफी पुराना है। आईटीआई की स्थापना वित्तीय स्वीकृति निदेशालय स्तर पर लंबित है। वित्तीय स्वीकृति मिलती तो निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता।
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साहिया 100 से अधिक गांवों का केंद्र बिंदु है। वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी पजिटीलानी गांव में एक खेल प्रतियोगिता का शुभारंभ करने के लिए पहुंचे थे। यहां उन्होंने साहिया और पजिटीलानी में आईटीआई की स्थापना की घोषणा की थी। ग्राम प्रधान गंभीर सिंह राय, स्थानीय ग्रामीण रणवीर सिंह राय, महेंद्र सिंह, सुल्तान सिंह, जालम सिंह, कुंवर सिंह आदि बताया कि एक आईटीआई भवन के निर्माण के लिए ग्रामीणों ने कुरोली में एक एकड़ भूमि दान दी थी। भूमि विभाग के नाम पर ही है। बताया कि 19 साल बीत चुके हैं, लेकिन न आईटीआई का भवन बना और न ही कक्षाएं संचालित हो पाईं।
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प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय के उपनिदेशक जेएम नेगी ने कहा कि मामला काफी पुराना है। आईटीआई की स्थापना वित्तीय स्वीकृति निदेशालय स्तर पर लंबित है। वित्तीय स्वीकृति मिलती तो निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता।
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